रविवार, 24 अप्रैल 2011

सफलता की राह

सफलता की राह

एक - एक करके पगथिया
सौ भी होज्या पार.
पण सागै दौ चार भी,
लान्घ्याँ खतरों त्यार .

हम सभी सफलता की खोज में निरंतर लगे रहते हैं क्योंकि हम ऐसे सूत्र की खोज करना चाहते  हैं जिससे सफलता को पाया जा सके .क्या सफलता का कोई रहस्य है, जिसे हम नहीं जानते हैं? मेरा मानना है की सफलता का कोई रहस्य होता ही नहीं है .हर सफल व्यक्ति अपनी सभी प्रकार की सफलता का ढोल पीटता आया है और पीटता रहेगा .अब प्रश्न यह उठता हैकी जब सफलता पारदर्शी होती है तो फिर ज्यादातर व्यक्ति असफलता से परेशान क्यों हैं?शायद उन्होंने जो राह तैयार की है उसमें अपूर्णता रह गयी      है .

सफलता की राह कैसे बनाएं :-जब भी हम किसी भी काम को करना चाहते हैं तो सबसे पहले
उस का एक खाका तैयार करते हैं. यह खाका हमारे मस्तिष्क में जन्म लेता है और एक विचार रूपी 
बीज की उत्पत्ति होती है. हमारे प्रतिपल जन्म लेते रहने वाले विचारों का बहुत बड़ा प्रभाव हमारे जीवन 
में पड़ता है. मस्तिष्क द्वारा देखा गया हर एक सपना विचार बन कर बाहर निकलता है लेकिन हम 
असावधानीवश ध्यान नहीं देते हैं जिसके कारण विचारों के भ्रूण असमय नष्ट हो जाते हैं जबकि ये नन्हें से विचार वट वृक्ष बनने की ताकत रखतें हैं.हमारी सम्पूर्ण  कोशिश होनी चाहिए की हम हमारे सकारात्मक 
विचारों को सहेजने  की शक्ति को पैदा करें .

विचार सपने पैदा करते हैं:- हमारे नन्हें- नन्हें विचारों में सपने पैदा करने की भरपूर ऊर्जा होती है 
हमारे द्वारा देखें गए सपने कभी भी निर्रथक नहीं जाते क्योंकि हर सपनें में एक संभावना छिपी रहती है 
उस संभावना में छिपी शक्ति का महत्व होता है .हमारे सकारात्मक विचारों में छिपे सपनों ने ही तो 
दुनिया की तस्वीर बदली है , तकदीर  संवारी है. हमारी कोशिश होनी चाहिए की हम अपने अन्दर 
पनपने वाले सकारात्मक एवम  नकारात्मक सपनों को पृथक-पृथक करना सीखें. हमें पूर्ण सजगता से 
इस काम को करना चाहिये; हमें यह सीखना ही पड़ेगा.   नकारात्मक सपनों को पृथक करना एवं 
उन्हें तुरंत नष्ट करना हमारी दैनिक दिनचर्या में शामिल होना बहुत जरुरी है वरना ----

नावडिया! खे नाव नै ,
लहरां पर मत छोड़ .
ऐ ले ज्यासी मन-मतै
तनै लागसी खोड.

यदि नाविक नाव का पाल सही दिशा में नहीं बांधता है और चप्पू नहीं चलाता है तब नाव लहरों के
भरोसे रह जाती है और उस पतवार रहित नौका का कोई लक्ष्य नहीं होता है वह लक्ष्यविहीन 
होकर इधर उधर हिचकोले खाकर नष्ट हो जाती है .

सपने आत्म- साक्षात्कार कराते हैं:- विचार जब सपनों में बदलते हैं तब सपने हमारा परिचय हम 
से कराते हैं.जब हमारा हम से साक्षात्कार होता है तब हमको हमारी ताकत ,हमारी निर्बलता, हमारे गुण - अवगुण का ज्ञान  होता है. यह एक ऐसा पड़ाव है जहां से हमारी मंझिल का सही दिशा- 
निर्देश होता है 

इस विषयवस्तु को हम अगली पोस्ट में समझने की कोशिश करेंगें              


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