रविवार, 24 अप्रैल 2011

जरुरत


प्रगति का शिखर,
तब-
दूर चला जाता है,
जब-
सफलता पड़ाव की जगह मंजिल लगती है.
या
असफलता तोड़ कर कुचल देती है .
तब,
हम कर्त्तव्यविमुढ़ हो जाते हैं.
जरुरत है इस चक्रव्यूह से उबरने की;
हार या जीत से फ़ोलाद बन उभरने की;
सफलता व असफलता मैं लिप्त नहीं होने की;
गति को बढ़ाकर लक्ष्य की और मोड़ देने की.

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