शनिवार, 4 जून 2011

भ्रष्ट-आचरण की समस्या से झुन्झता भारत

 भ्रष्ट-आचरण की  समस्या से झुन्झता भारत

आज हम भ्रष्ट-आचरण और महंगाई से त्रस्त हैं .हमारे सभी सकारात्मक विचारों को इन दौ प्रमुख
नकारात्मक विचारों ने अपने नागफांस में लपेट लिया है और पूरा देश दिशा एवं मार्गदर्शन विहीन
हो गया है.

भ्रष्ट-आचरण की  समस्या के संभावित कारण

१. नैतिक अधोगति - हमारा सम्पूर्ण समाज चारित्रिकता और नैतिकता को भूलता जा रहा है.हम खुद
ईमानदारी से जीना पसंद नहीं कर रहें हैं और नए युवा होने वाले समुदाय को भी  ईमानदारी से
डरा रहें हैं. हम जाने -अनजाने  में उन्हें गलत राह पर चलना सिखा देते हैं , झूठ बात को चतुराई
बताना, अनुशासन को स्वतंत्रता पर रोक के रूप में देखना, गलत आदतों को आधुनिकता का नाम
देना, दूसरों के विश्वास को ठेस पहुंचाकर अपना स्वार्थ निकालने को बुद्धिमता में खफा देना ,आदि

२.शिक्षा के क्षेत्र से नैतिक मूल्यों के पाठ्य-क्रम का अभाव- हम अपनी संस्कृति,सभ्यता,परिवेश,
सामाजिक मूल्य,वैदिक आचरण सभी को एक-एक करके स्वाहा करते जा रहें हैं. शिक्षा यांत्रिक
समाज को जन्म दे रही है जंहा मानवीय संवेदना उपेक्षित है. वैदिक आचरण को सिर्फ कर्मकांड
के जीवन में खफा कर हम अपने सभी अच्छे आचरण भी बेड़ियाँ समझ कर तोड़ते जा रहें हैं.

३.जनता के धन का निजी हित में उपयोग - आज सरकार ने नाना प्रकार के टैक्स जनता से लेने
शुरू कर दिए हैं.सरकार के नुमाइंदे दिन-रात इसी फिराक में लगे रहते हैं कि कैसे जनता की खून-
पसीने की कमाई को टैक्स का रूप देकर दिखाने के लिए सरकार का लेकिन वास्तव में खुद का
खजाना भरा जाये .

४.-लचर कानून पद्धति - हम हमारे कानून देश हित में नहीं बना पा रहें हैं. उधार में लिए विचारों   
 की कानून व्यवस्था यहाँ के नागरिक भोगते हैं,हमें अहसास ही नहीं हो पा रहा है की हम स्वतंत्र
देश के वासी हैं ,पहले अंग्रेज और अब अफसर !


५.न्याय में विलम्ब - न्याय की कछुआ से भी धीमी चाल जिससे आम आदमी व्यथित है.
बाजार के माल की तरह बिकता न्याय मजबूर वर्ग में उग्रता पैदा कर देता है.  धनी और रुआबदार वर्ग
के हाथों में कानून को खेलते देख सामान्य वर्ग भी कानून को हाथों में ले ही लेता है.

६.कालाबाजारी एवं सट्टा- बड़ी मछलियों के द्वारा जानबूझ कर की गयी कालाबाजारी एवं सट्टा भी
आम वर्ग को गलत मार्ग की ओर आगे बढ़ने को उकसाता है.                       

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