रविवार, 26 जून 2011

स्मरण शक्ति को कैसे प्रखर किया जाए

                                       स्मरण शक्ति को कैसे प्रखर किया जाए 


                      स्मरण शक्ति को प्रखर कैसे किया जाये ? क्या यह ईश्वर प्रदत्त शक्ति है या मानवीय प्रयास का सुफल .मैंने जहाँ तक अनुभव किया है यह शक्ति कुछ प्रभावों का मिश्रण है .स्मरण शक्ति के लिए जो कारण बनते है उनमे १.प्रारब्ध के कर्म २. आनुवांशिकता ३.परिस्थिति ४.मस्तिष्क की कार्यप्रणाली की जानकारी .

प्रारब्ध के कर्म :-  जिस तरह विज्ञान के नियम के अनुसार अणु को नष्ट नहीं किया जा सकता उसी प्रकार हमारी चेतन्यता  को भी कभी नष्ट नहीं किया जा सकता है.हमारी चेतनता को आत्मा का नाम दिया जा सकता है .आत्मा अणु से भी सूक्ष्म है और सदैव चेतन है .हमारे शरीर बदलते रहते हैं मगर आत्मा नहीं.हमारे हर जीवन के अंत के साथ यह आत्मा उस शरीर के भोगे जा चुके और भोगना बाकी रह जाने वाले कर्मो का लेखा-जोखा अपने साथ ले जाती है और नयी उत्पति के बाद बाकी रह गए कर्मों का फल प्रदान करती है.इस विषय पर आधुनिक विज्ञान निरंतर प्रयोग  कर रहा है ,कभी विस्तृत चर्चा इस विषय पर आगे करेंगे ,लेकिन प्रारब्ध  के कर्म भी मेघा शक्ति पर निश्चित रूप से अपना प्रभाव छोड़ते हैं .इसका उदाहरण 
राजा दशरथ के चरित्र को पढ़ कर जाना जा सकता है.

आनुवांशिकता:-  माता-पिता के जीन्स का प्रभाव भी पड़ता है ,यह तथ्य विज्ञान से सिद्ध हो चुका है. जिस तरह की उर्वरता शक्ति माता-पिता की होती  है उसका बहुत बड़ा प्रभाव बच्चे के ऊपर पड़ता है.शायद यही कारण है कि हमारे शास्त्र हमें बार-बार चेतावनी देते हैं कि गर्भाधान संस्कार के समय माता-पिता के विचार,क्रियाकलाप उत्तम रहें ताकि आनेवाली संतान तेजस्वी हो.

परिस्थिति:- जिस परिवेश में ,जिस पर्यावरण में हम रहते है उसका प्रभाव हमारे मस्तिष्क के क्रियाकलापों पर पड़ता है.

४.मस्तिष्क कि कार्य प्रणाली कि जानकारी:-हमारा दिमाग कैसे काम करता है इसकी जानकारी सही रूप से हमें मिल जाए तो हम काफी हद तक अपने मस्तिष्क कि उर्वरता को बढ़ा सकते हैं.

                हम अपनी पांचो इन्द्रियों से स्मरण करते हैं यानि कि हमारी पाँचों इन्द्रियाँ स्मरण शक्ति के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध रखती है.हम जाने - अनजाने में स्मरण शक्ति को बनाए रखने के लिए पाँचों इन्द्रियों का उपयोग करते हैं .आँख ,कान,नाक,जीभ तथा त्वचा ये सभी दिमाग से झुड़ी हुई है.हमें अपनी हर इन्द्रियों कि कार्य प्रणाली को समझ कर उपयोग करना है


(अ) आँख की कार्य प्रणाली :- आँख का काम है अवलोकन करना ओर दिमाग की तरफ देखे गए दृश्य को भेजना .आँख ओर मस्तिष्क दृक तंत्रिका से झुड़े हुए हैं.आँख जैसे ही कोई वस्तु को देखती है उसकी तस्वीर मस्तिष्क को भेजती है और मस्तिष्क उस देखी गयी वस्तु को संचय कोष में सहेजता है.


                                   आँख के द्वारा जब हम किसी शब्द समूह यानि वाक्य को देखते हैं उस समय देखा गया वाक्य मस्तिष्क तक जाता है और हम उस वाक्य को पढने की कोशिश करते हैं.किसी भी शब्द को पढ़ते समय हमें कुछ समस्याएं आती है जैसे-विजन,पढने की गति,समझना,समय,पढने की मात्रा,नोट,याद रख पाने की क्षमता,विश्लेषण,दोहराना ,शब्दावली,उच्चारण,शब्दों के चुनाव,एकाग्रता ,पीछे का भूलना आदि

                      पढ़ना क्या है?कोई भी भाषा के वर्ण देख कर उन्हें समझना ,पूरी पंक्ति की सुचना को पकड़ना,रेखांकित सुचना का विश्लेषण करना,पढ़ी गई सभी सूचनाओं को एकत्रित करना,एकत्रित की गई सूचना को अलग -अलग कोष में संग्रहित करना और संग्रहित की गई सूचनाओं को पुन: बाहर लाना यानि सोचने पर पढ़ी गई सामग्री याद आना.


                  पढने की समस्या तब आती है जब हम मस्तिष्क के काम करने के तरीके से अनजान होते हैं या फिर हमारे पढने का तरीका ही गलत होता है.


                 आँख की क्षमता एक पल के सौवें भाग में पांच से अधिक शब्द देखने की होती है और दिमाग की शक्ति भी इससे भी तेज होती है .यदि हम आँख की गति से बहुत धीमे पढ़ते हैं तब हम क्या पढ़ चुके हैं यह भी नहीं समझ पाते याद रखना तो दूर की बात है यदि हम इतना जल्दी पढने की कोशिश करते हैं की पढ़ते समय शब्द छोड़ते जाते हैं तो भी हम यह नहीं जान पाते की हमने क्या पढ़ा है .हमें आँख की गति के बराबर तेजी से बिना कोई अक्षर छोड़े पढना है .यदि पढ़ते समय हम किसी शब्द का अर्थ नहीं समझ 
पाए हैं तो पेन से चिन्हित करते आगे बढ़ते जाना है.हम शब्द का अर्थ जानने के लिए नहीं पढ़ते हैं बल्कि पुरे वाक्य का अर्थ समझने  के लिए पढ़ते हैं .हम यदि एक बार में एक-एक शब्द पढ़ते है और धीमी गति से पढ़ते हैं यानी एक मिनिट में 100 शब्द, इसका मतलब यह की हम जो पढ़ रहे हैं उसे याद नहीं रख पायेंगे.यदि हमारी पढने की गति एक मिनिट में 250 शब्दों के आसपास है तो हम जो पढ़ रहे होते हैं उसे याद रखने के प्रयास में काफी हद तक सफल भी रहते हैं .हमें पढ़ते समय अंगुली,पेन या पेन्सिल का उपयोग करना चाहिए जिससे हम पढने की गति को बढा सकते हैं. जब भी हम पढने बैठते हैं हमारी कोशिश 
यह होनी चाहिए की हम एक साथ दौ से तीन शब्द तक पढ़ पाए ,लगातार इस बात पर ध्यान देते रहने से हम सीख सकते हैं.


धीमी गति से जब हम पढ़ते हैं तो हमें ज्यादा मानसिक श्रम करना पड़ता है और तेज गति से पढने पर आँखों को कम थकान होती है .आपको यह जानकार आश्चर्य होगा की जब हम तेज गति से पढ़ते हैं तब हमारी एकाग्रता बढ़ जाती है.जैसे -हम सुबह अखबार पढ़ते हैं जो प्राय: तेज गति से ही पढ़ते हैं और हमें उस दिन के मुख्य समाचार बिना दबाब के याद हो जाते हैं.


   जब हम किसी पुस्तक या चेप्टर को पढ़ते हैं तब हमारा  मस्तिष्क अपने save सिस्टम को खोल देता है और हम जो पढ़ते हैं वह दिमाग के संचय कोष में save हो जाता है .दिमाग पढ़ी गयी सामग्री को मस्तिष्क के अलग-अलग कोशों में सुरक्षित करता है उसमे उसे कुछ समय लगता है इसलिए यदि हमें पांच से सात घंटे पढ़ना है तो हमें हर 35 से 45 मिनिट के बाद एक छोटा सा विराम(ब्रेक) ले ही लेना चाहिए ताकि मस्तिष्क का save सिस्टम सुचारुरूप से काम कर सके.
यह पोस्ट आगे जारी रहेगी .             
   

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