रविवार, 3 जुलाई 2011

                                               बिल्लियों का लोकतंत्र 

एक बार कुछ बिल्लियाँ शेरों के जंगल में घुस गयी . अपने चारों ओर शेर ही शेर देखकर हड़बड़ा गयी. बात जान पर बन आई थी ,भूखे शेर उन पर टूट पड़े तो कोई भी बिल्ली बचने वाली नहीं है यह बात बिल्लियों की मुखिया समझ रही थी. उसने सब बिल्लियों को इशारा किया की यदि रास्ते में कोई भी शेर कुछ भी पूछे तो कोई भी कुछ नहीं बोले ,मैं शेरों से निपट लुंगी.

          थोड़ी देर चलने के बाद कुछ दहाड़ते हुए शेरों ने बिल्लियों के झुण्ड को रोका और पूछा आप कौन हैं ?
बिल्लियों की मुखिया ने जबाब दिया -हम आपकी सेविकाएँ हैं .भगवान् ने हमको आपकी सेवा के लिए 
भेजा है .हम आपके जंगल के राज की व्यवस्था संभालने के लिए आयी हैं ताकि आप सभी शेर आराम से 
पेट भरने के बाद चैन की नींद सो सके .

         जंगल के सभी शेरों ने मिलकर एक तात्कालिक सभा बुलायी और बिल्लियों की बात पर विचार -विमर्श किया .बिल्लियों की ताक़त पर विचार  किया और निर्णय किया कि  इन बिल्लियों की ताकत बहुत कमजोर है इसलिए ये हमारे लिए  खतरे का कारण कभी भी बन नहीं पायेगी. ये सब यदि अपनी जान बचाने के लिए हमारे  सभी भागदौड़ के काम कर देती है तो हम शेरों के लिए आराम हो जायेगा.इस प्रकार शेरों ने अपने राज की व्यवस्था को बिल्लियों के हाथों में सौप दिया और अब सभी शेर खा पीकर ऊँघने  लगे.

     शेरों को शिकार करके और दिन भर ऊँघते देख बिल्लियों की मुखिया ने निर्णय किया की अब हम सभी 
यहाँ पर सुरक्षित हैं इसलिए इसी जंगल में स्थायी निवास कर शेरों  पर शासन करना चाहिये.

               कुछ दिन बीत जाने के बाद बिल्लियों की मुखिया ने जंगल के सभी शेरों की एक सभा बुलायी और शेरों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कुछ योजनायें सभा में रखी.शेरों को बिल्लियों  की बुद्धि और 
विवेक पर भरोसा हुआ और उन्होंने उनकी बात मान ली .अब बिल्लियों ने  सुरक्षा के नाम पर जंगल के  एक 
भाग पर शेरों को बाहरी हिंसक जानवरों से भय है यह कहकर उनके लिए वह क्षेत्र प्रतिबंधित कर दिया .
उस प्रतिबंधित क्षेत्र में शेर भय के मारे जाने से डरने लगे तब उस क्षेत्र पर बिल्लियों   ने अपना कब्ज़ा कर लिया.सभी बिल्लियाँ अब आराम से रहने लगी और शेरों के खा चुके शिकार से अपना पेट भरने लगी .

         एक दिन बिल्लियों  की मुखिया ने सभी बिल्लियों को बुलाया और कहा की हमें शेरों की झूठन से पेट भरना पड़ता है यह हमारे गौरव के अनुकूल नहीं है ,हमें शेरों के किये गए शिकार से हिस्सा चाहिये इसलिए तुम 
सब मेरे साथ चलो .मुखिया बिल्ली सभी बिल्लियों को लेकर शेरों के पास गयी और बोली -"हे शूरवीरों !हम दिन-रात आपकी सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के कारण अपने भोजन के लिए भी समय नहीं निकाल पा रही हैं  हम सभी अब भूखे रह कर जीवित नहीं रह सकती हैं इसलिए हम ये जंगल छोड़ कर जा रही हैं"

शेरों ने उनसे जंगल छोड़ कर नहीं जाने की प्रार्थना की तो मुखिया बिल्ली बोली ,"हम एक शर्त पर आप सबकी सेवा कर सकती  हैं यदि आप अपने- अपने शिकार से निश्चित भाग हमें भरण -पोषण के लिए दे  दो" .

      शेरों ने इस आसान सी बात को मान ली तब बिल्लियों ने भी उन्हें उनकी सेवा में बने रहने का आश्वासन 
दे दिया .अब बेचारे शेर दिन में ज्यादा मेहनत करने लगे और बिल्लियाँ आराम से रहने लगी.

          थोड़े दिन बाद एक दुसरे जंगल का मेहमान  शेर वहां आया और सभी जाती बंधुओं का हालचाल जाना .साथी बंधुओं ने जंगल की राज्य व्यवस्था को बिल्लियों को सौप कर निश्चिंत हो जाने की बात भी मेहमान शेर को बतायी  .मेहमान शेर ने उनके गिरते स्वास्थ्य के बारे में पूछा तो शेरों के भूतपूर्व राजा ने बताया की हमें अपनी सुरक्षा व्यवस्था को समुचित रूप से चलाने के लिए अपने शिकार का निश्चित भाग बिल्लियों को देना होता है इसलिए सभी शेर  हरदिन थोड़े भूखे रह जाते हैं ,लेकिन सुरक्षा के लिए तो ये सहन करना ही पडेगा .

      मेहमान शेर ने बिल्लियों की चालाकी को समझ लिया था इसलिए उसने सभी शेरों को संबोधित 
करते हुए कहा-ये बिल्लियाँ आप  सभी को मुर्ख बना कर अपना जीवन सुख से बिता रही है .ये इस जंगल की राजा नहीं है असल में आप सभी इस जंगल के राजा हैं ,आप सभी को मिलकर उन पर आक्रमण कर देना 
चाहिये लेकिन लम्बे समय से ऊँघते शेरों का साहस जबाब दे चुका था .उन्होंने मेहमान शेर से कहा,"भाई ,
तुम तो मेहमान बनकर आज आये हो ,कल चले भी जाओगे लेकिन हमें तो यहीं रहना है .हम इन बिल्लियों 
से पंगा लेकर अपनी सुरक्षा को खतरे में नहीं डाल सकते हैं .

      जब बिल्लियों की मुखिया को मेहमान शेर की दहाड़ सुनाई दी तो उसने  तुरंत आसन्न खतरे को  भांप 
लिया और सभी बिल्लियों को हिदायत दे दी की इस शेर को तुरंत नोच डाले वर्ना ये सभी शेर हमारे अस्तित्व 
को मिटा डालेंगे .सभी बिल्लियाँ गुर्राती हुयी मेहमान शेर पर टूट पड़ी .मेहमान शेर अपने को अकेला निसहाय 
देखकर भाग निकला .अब बिल्लियाँ आराम से जिन्दगी गुजारने लगी .

कथा सार- चालाक लोगों कि चालबाजी से बचे और अपनी शक्ति पर अविश्वास नहीं करें.        

  
           

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