शनिवार, 30 जुलाई 2011

आओ लोकपाल -जोकपाल खेले !

आओ लोकपाल -जोकपाल  खेले !

गली के बच्चे आज गेंद और बल्ला लेकर नहीं खेल रहे थे,यह भी एक अजूबा था मेरे लिए क्योंकि हर दिन तूफान मचाने वाले बच्चे आज शांत थे .उनकी शांति भी मेरे लिए कौतुहल बन गयी.जब मैं इस  राज को समझने के लिए नीचे उतरा तो देखा सभी बच्चे तीन झुण्ड में खड़े थे.उनसे अलग-विलग खड़े होने  का कारण पूछा तो एक बच्चे ने बताया ,"अंकल ,अब हम पुरे अगस्त महीने में नया रोमांचक खेल खेलेंगे "

               बच्चो से जब खेल का नाम पूछा तो हमारा मन भी इस खेल को नियमित देखने का हो गया क्योंकि यह बिलकुल नया प्रयोग था .खेल है "लोकपाल-लोकपाल"

खेल के नियम -     
  1. इसमें तीन ग्रुफ के लिए कुल जमा २० बच्चे कम से कम चाहिए 
  2. पहला ग्रुफ शासक पक्ष , दूसरा ग्रुफ जनता  ,तीसरा ग्रुप पंचायत सदस्यों का 
  3. पहला ग्रुफ आँखों  में धुल  झोकने,झूठ को सच दिखाने ,पसीना किसी का और माल चटाई शासक पक्ष की ये सभी करतब इतनी होशियारी से ,दादागिरी से ,नफ्फट बनकर करेगा  
  4. दूसरा सिविल पक्ष इनको पकड़ने के लिए बिना दादागिरी के ,सभ्य बनकर ,पहले ग्रुफ के नियम तले रहकर धरना देगा ,अनशन करेगा ,भूखा रहेगा 
  5. तीसरा ग्रुफ पंचों का रहेगा जो अपनी-अपनी रोटी इनके सुलगते अंगारों पर सकेगा मतलब यह की अपना नफा -नुकसान तौलकर दोनों ग्रुफ में पलटी मारता रहेगा .जो पंच पलटी बेहुदे तर्क से मारेगा वह अगले दिन पहले ग्रुफ का सदस्य बनेगा तथा जो पंच सही तथ्यों का सहारा लेगा वह अगले दिन के खेल में दूसरा ग्रुफ बनेगा .शेष बचे सभी बच्चे तीसरे ग्रुफ में रहेंगे 
खेल शुरू     
जोकपाल :- हम इस  देश में राजनीती का व्यापार पिछले ६५ वर्षो से कर रहे हैं .क्या हमने आपके धंधे में कभी बाधा  डाली है जो  तुम सब हमारे धंधे में टांग  फंसा रहे हो?

जनता  :- तुमने हमारी आँखों में धुल झोंकी है .हमारे से कर का पैसा लिया और देश के विकास   की जगह अपना घर भर लिया.

पंच  :-हमने कभी देश के विकास की सोची ही नहीं थी .ये आरोप सही नहीं है हमने नोट देकर वोट ख़रीदा .अपनी अक्ल और गुंडागर्दी की ताकत  पर पंच बने .क्या पेट भरने का अधिकार हमारा नहीं है क्या?

जोकपाल :-अब बोलो ?पेट भरने के लिए क्या करे हम.क्या सेवा से पेट भर जाता है 

जनता :- पेट भरने के लिए तुम हमसे पगार लेते हो ,भत्ते लेते हो ,रेल, टेलीफोन, हवाई जहाज सब फ्री में पाते हो.फिर भी  लूट चलाते हो .यह सहन नहीं करेंगे .हम लूट गिरी  के खिलाफ धरना देंगे   

पंच :- लोकपाल का अधिकार है की वह धरना दे लेकिन पहले सब तय हो जाए की धरना  कैसे टूटेगा 

जनता :- क्या तुम हमें  खरीदना चाहते हो.हम पैसे से नहीं बिकते ये काम तुम्हारा  है.हम तुम्हे जेल  भेजेंगे  
.देश को लूटने वालों के मुंह काला करेंगे

जोकपाल :- किसी भी पंच को पकड़ कर मुंह काला करने का किसी को अधिकार नहीं होगा .अगर जनता ने  चुने हुए पंचों का मुंह काला किया तो गोली चलेगी ,भुन दिया जाएगा  

पंच :- गौली नहीं चल सकती ,ये मर ही गए तो फिर हम रुआब किस पर झाडेंगे ,रुतबा किसे दिखाएँगे .सजा कम की जाए जोकपाल.इन्हें डंडे मारे जाए 

जनता :- लो अब हम धरने पर बैठ गए .अब नारे लगायेंगे .भ्रष्टाचारियों को जेल भेजो .देश  का धन देश में लाओ .आतंकवाद  दूर करो.वन्दे ............

पंच :- नारे बंद करो .हम तुम्हारी वाजिब मांगे सुनते हैं .बोलो क्या मांगे हैं.

जनता :- देश को किसने लुटा ?

पंच :हम में से वे सभी जिसको लुटने का मौका मिला ?

जनता :- लुट का माल कहाँ है ?

पंच :- देश के बाहर सुरक्षित है 

जनता :- उस पैसे को देश में लाओ और देश की सम्पति घोषित करो और तुम जेल की हवा खाओ 

पंच:- आपकी पहली  मांग मंजूर है .हम मारीशस रूट से पैसा वापिस ला रहे है.दूसरी बिलकुल मंजूर नहीं 
क्योंकि बड़ी सफाई से माल लुटा है वह अब हमारा है .तीसरी शर्त आधी मंजूर है जो पंच अपनी जान पर जोखिम महसूस करेगा वाही जेल सेवा का उपयोग करेगा 

ज़ोकपाल :- पंच सही कह रहे हैं .पंच अपनी सुरक्षा के लिए जेल जा सकता है .पैसे जिसने लूटे उसके रहेंगे .अब अंतिम  फैसला है हम नफ्फट ,कमीने बने रहेंगे 

जनता :- तो हमारा फैसला भी अंतिम ....चौक में झंडा गाड़कर अनशन शुरू 

पंच :- चौक पंचो का है .वहां तुम लोग नहीं जा सकते .वहां धारा 144 लगा देंगे .

जनता:- हम नहीं डरते ....हम तुम सबसे लुटा हुआ धन लेकर रहेंगे .कल हम फिर सब मिलकर नई राह बनायेंगे 

पंच हडबडा कर दौ  धड़ों में बाँट गए  कुछ जनता के saath  तो कुछ जनता के खिलाफ 

कल क्या गुल खिलेगा कल देखेंगे . 

                 

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