सोमवार, 1 अगस्त 2011

जन लोकपाल आये तो आये नहीं आये तो मेरे बाप का क्या जाता है!!!!!!!!!

जन लोकपाल आये तो आये नहीं आये तो मेरे बाप का क्या जाता है!!!!!!!!!  

      कल क़ी बात है अन्ना को टी वी पर सुना . उनकी निश्चल बात सुन कर मेने भी एक -दौ गाली भ्रष्ट नेता को देने कि सोची और  घर से बाहर आकर चीखा ,"मेरे देश का भ्रष्ट नेता कुत्ता है " बस फिर क्या था सा'ब, गाँव के कुत्ते एकजुट हो गए और भोंके , ख़बरदार! जो  भ्रष्ट नेता को कुत्ता बोला तो .हमारी जात आज भी वफादार है चोरों के पीछे पड़ जाती है .कुत्तो क़ी आपत्ति से हमे अपनी इस गाली को बदलना पड़ गया .   

      हम चिल्लाये ,"अगर तुम कुत्तो को  आपत्ति है तो भी मैं एक बार भ्रष्ट नेता को गाली तो दूंगा ही ,मैं उसे गधा  कह दूंगा" .मेरा यकीं मानिए सा'ब गाँव भर के गधे इक्कठे होकर रेंकने लगे कि तुम्हारा भरष्ट नेता हमारीजमात में कभी भी बैठने के काबिल नहीं है .हम दिन भर मेहनत करके पेट भरते हैं ,हराम का नहीं खाते . तुम्हारा नेता तो हराम कि डकारता है .गधों से माफी मांग कर हम बोले ,"गधों ,आज मैं अपने भ्रष्ट नेता को गाली देकर ही रहूंगा .मैं मेरे देश के भ्रष्ट नेता को खटमल कहूंगा . सा'ब , मेरे खटमल कहते ही घर के सभी खटमल चरमराये और बोले ,"हम अपनी खटमल जाती का अपमान सहन नहीं कर सकते .हम खटमल जरुर हैं ,हम खून जरुर पीते हैं लेकिन खुद कि बिरादरी का खून नहीं पीते ,एक भी उदाहरण नहीं बता पाओगे कि एक खटमल ने दुसरे खटमल  का खून चूसा हो ,लेकिन एक भ्रष्ट नेता  ही दुसरे निर्दोष सहोदर का खून चुंस सकता है .

      खटमल कि बात सुन मेरा भी माथा भिन्ना गया. आखिर आज एक गाली तो देना ही था सो मेने फिर चिल्लाकर नयी  गाली दी, "मेरा भ्रष्ट नेता गीद्ध है "मेरे द्वारा इतना सुन कर गाँव का पूरा आकाश कौओं,चील और गीद्ध  जाती से भर गया .वे सभी काँय-काँय कर   बोले , "तुम्हारा भ्रष्ट नेता कभी भी गिद्ध  नहीं बन सकता है ."हम गिद्ध सहकार से जीते हैं ,अरे तुम  तो हमारे कुछ भी नहीं लगते थे फिर भी तुम्हारे पूर्वज राम के लिए हमने हमारा खून बहाया था लेकिन तुम्हारा ये भ्रष्ट नेता लुच्चा बनकर तुम्हारा ही खून बहाता है .

           मेरे से रहा नहीं जा रहा था .पहली  बार हिम्मत कि थी गाली देने की. अभी तक सफल नहीं हो पाया था .काफी विचार करने के बाद एक गाली हाथ लगी ,मैं जोर से चिल्लाया ,"मेरा भ्रष्ट नेता सांप है ". मेरा इतना कहते ही बाँबियों से सांप बाहर निकले और फन तानकर फुंकारे ,"तुम्हारा नेता सांप नहीं हो सकता क्योंकि हम उसे कभी  भी नहीं काटते जो हमें नहीं सताता है लेकिन तुम्हारा भ्रष्ट नेता सिर्फ उसे ही काटता है जो निर्दोष है ,गरीब है.

             अब क्या किया जाये  हमारे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था .कोई अच्छी सी गाली भी नहीं सूझ रही थी . लेकिन मैं भी आज हार मानने  वाला कहाँ था,टहलते -टहलते गाँव के गंदे नाले  के पास  पहुँच  गया था .बहुत बदबूदार गंध  थी नाले की.तभी अचानक नयी गाली सूझी ,"मैं दम लगाकर चिल्लाया ,मेरा भ्रष्ट नेता गंदे नाले का कीड़ा है .

      मेने जैसे ही यह गाली दी कि नाले के सभी कीड़े मर गये.शायद मेरी गाली को कीड़े बर्दाश्त नहीं कर पाए और सामूहिक आत्महत्या कर स्वर्ग सिधार गये .मेरा मन आत्म ग्लानी से भर गया .अरे, मेरे से तो अच्छे ये कीड़े हैं जो अपनी जाती का अपमान सहन नहीं कर पाये तो जान दे गये और एक मैं हूँ जो यह सोचता हूँ कि
भ्रष्ट नेता चोरी करे तो करे मेरे बाप  का क्या जाता है.अन्ना मेरे लिए मरे तो मरे,  मैं क्यों आगे आऊ,मेरे बाप का क्या जाता है .जन लोकपाल आये तो आये नहीं आये तो मेरे बाप का क्या जाता है .                                                       

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