शनिवार, 13 अगस्त 2011

छद्म लोकतंत्र

छद्म लोकतंत्र 

फिर होगा तमाशा किल्ले के बुर्ज पर,
बहेगी कुछ धाराएँ आश्वासन की ,
कागजी  विकास के सपने होंगे,
थोथी बातों के पुलिंदे होंगे,

शब्दों को मक्खन में लपेटा जाएगा ,
महंगाई को आंकड़ो से मारा जाएगा,
भ्रष्ट नेता भी सफेद लबादे में होगा,
ज्वलंत प्रश्न को अनुत्तरित रखा जाएगा,

माँ-बेटे को साष्टांग प्रणाम करेंगे,
माँ के लाडले का गुणगान करेंगे,
नौसिखिये की चपलता में खड़े रहेंगे,
मगर- राष्ट्रगान की धुन पर बैठे रहेंगे .

इंसान को इंसान से अलग करेंगे,
आरक्षण या अनुदान की बौछार करेंगे,
अफजल,कसाब की दरिंदगी भूलेंगे,
मौका मिला तो इनके कसीदे पढेंगे,

छद्म लोकतंत्र से परेशान लोग -
रटा-रटाया भाषण सुन चलती पकड़ेंगे ,
तब नन्हे बच्चों से नारे लगवाएंगे,
अगले बरस फिर यही भाषण दोहराएंगे .



     

    

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