गुरुवार, 18 अगस्त 2011

साबरमती से रालेगन सिद्धि

साबरमती से रालेगन सिद्धि 

लोकसभा में आज प्रधानमंत्री को सुना ,कपिल सिब्बल  को सुना,प्रणव को सुना,समझा .

प्रधान मंत्री के अनुसार ,अन्ना हज़ारे ने जो रास्ता चुना है, वो लोकतंत्र के लिए नुक़सानदेह है.

प्रश्न यह उठता है की बाबा रामदेव के अनशन पर राष्ट्र के नागरिको पर क्रूरता क्या आपका संवैधानिक कदम था? 

आपके मंत्रिमंडल द्वारा आपकी नाक के निचे अरबों के घोटाले किये क्या वे लोकतंत्र के लिए फायदाकारक थे .आपने कहा की मेरी निजी इच्छा है की प्रधानमंत्री को लोकपाल के अंतर्गत लाने में आपत्ति नहीं है और उसके बाद आपका 
इस बात से किनारा कर लेना क्या लोकतंत्र के अनुकूल है?

 प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा है कि अन्ना हज़ारे ने दिल्ली पुलिस की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया था, इसलिए उन्हें गिरफ़्तार करना पड़ा.




उन्होंने कहा कि उनकी सरकार मज़बूत लोकपाल के पक्ष में है, लेकिन इसकी एक प्रक्रिया 

है और क़ानून बनाने का हक़ संसद को है.

पुरे संसार ने देखा था की अन्ना का अनशन सुबह ८ बजे से था और गिरफ्तार ७.२० पर ही कर लिया, यानि आप

 करे वह संवैधानिक और प्रजा करे वह असंवैधानिक .सरकार की मंशा यदि मजबूत लोकपाल की होती तो वह लूला

 लोकपाल क्यों लायी? क्या लोकपाल कोई कठपुतली है जो सरकार के नुमयांदो के इशारे पर नाचता रहे .

माना की कानून बनाने का हक़ संसद का है,मगर सरकार का कर्तव्य होता है वह जो कानून लाएगी 

उसका अच्छा बुरा भोगना तो आम जनता को है.सही कानून नहीं होने से ही आप स्विस  बेंको में 

पड़े धन को देश में अभी तक वापिस नहीं ला पाए . यदि संविधान की दुहाई देकर आपकी सरकार 

काले कानून पास कराना चाहेगी तो जनता चुप बैठी रहकर सहन कर ले क्या यही संविधान है?

इस समय लोकपाल विधेयक स्थायी समिति के पास है और अन्ना हज़ारे की टीम अपनी बात वहाँ रख सकती है. स्थायी समिति चाहे तो विधेयक में संशोधन कर सकती है ऐसा प्रधानमंत्री ने कहा .  


आपने संयुक्त कमिटी बनवाई ,आपके मंत्री उसमे थे आपका लोकपाल बिल और सिविल सोसायटी के 


बिल में दिन-रात का फर्क था तो फिर दोनों बिल के मसौदे सदन में रखने थे, आपने सिर्फ एक 


मसौदा संसद की बहस के लिए रखवा कर भारत की प्रजा के साथ कौनसी संवैधानिकता दिखाई ?


प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत विश्व के मंच पर आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है, लेकिन 

कुछ शक्तियाँ ऐसा नहीं चाहती. हमें ऐसी शक्तियों के हाथ में नहीं खेलना चाहिए."

भारत आज विश्व के मंच पर उभर रहा है यह सिद्ध करता है की हम मेहनती विवेकी बुद्धिशाली और

 हमारे में ये सब गुण हैं तो हमें कौन मुर्ख बना सकता है?


कपिल सिब्बल सांसदों के अधिकार के बारे में खूब जम कर बोले 




कपिल साहब अधिकार जताने में और जनता के भले के लिए सोचने में बहुत फरक होता है.जिसे

 आप पांच आदमी की सोसायटी कहते है उस सोसायटी के विश्व रूप के दर्शन आपने खूब कर लिए 

होंगे . यदि हमारा संविधान कही कमजोर रह गया है और वह देशवासियों से सुधार की उम्मीद करता है तो आपका पुनीत दायित्व बनता है की संविधान की मजबूती के लिए भी कुछ करे मगर अफसोस ! संविधान में रह गयी कमजोर कड़ी का बेजा लाभ उठाना  चाहते दिख  रहे हैं.मगर समय बता रहा है की जनता जाग्रत हो गयी है

साबरमती से जो अलख जगा था वह रालेगन सिद्धि से फिर जग गया है .गीता में कृष्ण ने वचन दिया था की अधर्म के बढ़ने पर मै धर्म न्याय की स्थापना के लिए जन्म लेता रहूंगा और दुष्टों का विनाश करता रहूंगा

जब आप लक्ष्य के करीब हो तो आपको बहुत ज्यादा धीरज रखना होता है ,आपका संयम आपका उत्साह आपकी दूरदर्शिता आपका कर्तव्य स्पष्ट होना चाहिए .भारतीयों ,हम भेदभाव भूलकर मिलझुल
आगे बढे .हम इस युद्ध में भारतीय बनकर लड़े.हमारा दल पीछे छुट जाना है ,हमारी जाती पीछे छुट
जानी है.हम एकसूत्र में बंध कर संघर्ष करे .विजय आगे दासी बन खड़ी है बस हमें कदम से कदम
बढ़ाना है       







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