शनिवार, 20 अगस्त 2011

संविधान का पालन या अवमानना 

संविधान का पालन क्या ये नेता कर पाए हैं जो आज जनता को सीख दे रहे हैं .आइये कुछ भ्रष्ट नेताओ के कृतित्व को समझे .

१.संविधान ने जनता को जीने की आजादी का अधिकार दिया है और जीने की आजादी में हर नागरिक को अधिकार है की उसे जल,स्वच्छ्तता ,पर्याप्त पोषण ,शिक्षा,विचार प्रगट करने तथा देश में कंही भी आने जाने की छुट है.अपने अपने धर्म के पालन की छुट है.सरकार का कर्तव्य है की इनका पालन हो 

क्या हमारे देश में स्वच्छ पीने का पानी सरकार उपलब्ध करा पायी है.क्या पानी के प्रबंधन पर संसद में उचित बहस हुयी है.नदियों के मिट्ठे जल को प्रदूषित होते कोई भी सरकार क्यों नहीं रोक पाई हैं? क्यों अब तक निगमा नन्द को प्राण होमने पड़े .क्यों नदियों को जोड़ने का काम नहीं हुआ ? क्या पानी की समुचित व्यवस्था 
 नहीं कर पाना  संसद या संविधान की अवमानना के अंतर्गत नहीं आती है?

हमारे देश की प्राथमिक और उच्च शिक्षा व्यवस्था बदतर स्थिति में है. सरकारी स्कुल में विद्यार्थियों के लिए समुचित भवन ,शिक्षक तक नहीं है? क्या इस पर संसद में विशेष चर्चा हुयी है ?ज्यादातर निजी हाथों में शिक्षा व्यवस्था चल रही है जिसका  खर्च सहन कर पाना ७५% भारतीयों के बूते के बाहर है. क्या शिक्षा  की समुचित व्यवस्था  नहीं कर पाना  संसद या संविधान की अवमानना के अंतर्गत नहीं आता  है?

भारतीय नागरिक जो प्रतिदिन ३५/- रुपया भी नहीं कमा पा रहा है उसको सरकार पर्याप्त पोषण उपलब्ध करा
पाई है ? महंगाई से नागरिक आत्महत्या जैसा कदम उठाने को क्यों मजबूर हुआ क्या संसद ने इस पर समुचित निर्णय लेने का बीड़ा उठाया है ?क्या पर्याप्त खाद्य आपूर्ति उचित मूल्य पर सभी को मिले इसकी समुचित व्यवस्था  नहीं कर पाना  संसद या संविधान की अवमानना के अंतर्गत नहीं आता है?

जनता पर अनगिनत कर लगाकर उस पैसे की पारदर्शी व्यवस्था बनाने का किस सरकार ने पालन किया है? क्या संसद इस गलत ,अन्यायी ,लुट की व्यवस्था को नहीं बदल कर संवेधानिक दायित्व निभा रही है

भारत हमारा देश है,हम सभी भारतीय इसके अभिन्न अंग हैं.यहाँ पर  संविधान हम सबके लिए  एक सरीखा
बिना भेदभाव के लागु होना चाहिए . प्रधान मंत्री भी पहले भारतीय नागरिक होता है,उसके बाद ही उसका पद
आता है? भारतीय संविधान के ऊपर प्रधानमंत्री, मंत्री,सांसद कैसे हो सकता है?

यदि भ्रष्ट नेता जेल जाता है,भ्रष्ट राजकर्मी को समय पर काम करना पड़ता है तो इसमें इमानदार सांसदों को
आपत्ति क्यों है?. अगर भारतीय नागरिक होने के नाते उन पर भी संविधान का पालन करने की बात समस्त
भारतीय( अन्ना ) कर रहे हैं तो संसद सहित प्रधान मंत्री को जन लोकपाल के दायरे में आकर संविधान की
गरिमा को बढ़ाना चाहिए

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