मंगलवार, 23 अगस्त 2011

हमारा लोकतंत्र पानी का रेला आने के बाद पाल क्यों बांधता है ? ? ?

हमारा लोकतंत्र पानी का रेला आने के बाद पाल क्यों बांधता है ? ? ?                                                                      

जबसे हम स्वतंत्र हुए हैं तब से लेकर अभी तक की सभी सरकारे पानी रेला गर्दन तक पहुँचने पर उपाय क्यों ढूंढ़ती
है ? क्यों----------------
१.सरकारों की यही परिपाटी बन गयी  है ?
२.इसी तरह से लोकतंत्र में  दायित्व निर्वाह होने चाहिए ?
३.जनप्रतिनिधि अपने कर्तव्य पालन को समय पर नहीं करते ?
४.जनप्रतिनिधि जनता से वोट लेकर उनकी सेवा नहीं करना चाहते हैं ?
५.जनप्रतिनिधि वोट तो जनसेवा के नाम पर मांगते हैं, जनहित के काम करने में कोताही दिखाते हैं ?
६.जनप्रतिनिधि समस्या को चरम सीमा तक ले जाते हैं ?
७.देश हित की संसद में सपथ लेते जनप्रतिनिधि अपनी सपथ और राष्ट्रिय हित को भूल जाते हैं ?
८.जन हित की योजनाओं का पैसा आम जनता के हित में पूरा नहीं पहुँच पाता है ?
९.सरकार भ्रष्ट व्यवस्था का उपाय नहीं सोचकर घुटने टेक देती है  ?
१०.सरकारी गौदामो में अनाज सड़ता है और जनता भुखमरी झेल रही है ?
११.गरीब और गरीब होता जा रहा है ?
१२.आर्थिक उदारीकरण को गति दी जा रही है जबकि उसके दुष्परिणाम भयंकर हो रहे  हैं ?
१३.किसान की भूमि छिनकर उद्योगों को कौड़ियो में दी जा रही है ?
१४.प्रतिवर्ष टैक्स के जाल को बढा कर जनता को चोर बनने पर मजबूर किया जाता है ?
१५.सरकारे जनहित की योजनाओं को बनाने में ग्राम स्तर पर नागरिको के मंतव्य से नहीं जुडती है ?
१६.जनप्रतिनिधि जनता के काम करने में उपेक्षा दिखाते हैं ?
१७.जनप्रतिनिधि देश सेवा के पवित्र काम को  व्यापार में तब्दील कर देते हैं ?
१८.जनता अपनी आशाओ पर पानी फिरता देख  अनशन का हथियार उठाने पर मजबूर होती है ?
१९.संसद में शब्दों के वार होते हैं,कागज पर जनकल्याण चलता है ?
२०.भारत युवा देश होने के बाद भी  मेघावी युवा बेकार है, हताश है,निराश है ?

 यह सब किसका पाप है ?

निर्णय आप पर निर्भर है - नैतिकता या अनैतिकता , शांति या अशांति , विकास  या भुखमरी , इमानदारी या
भ्रष्टाचार, अन्ना का अनशन या मूक संविधान इनमे से आपको ही चयन करना है की आप क्या चाहते है


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