रविवार, 14 अगस्त 2011

कदम से कदम मिलाये जा ............

कदम से कदम मिलाये जा ............

सरकार का अपना संविधान है और भारतीय जनता के पास अपना संविधान है.सवाल यह उठ सकता है कि क्या संविधान का अर्थघटन बदल सकता है.क्यासिविल सोसायटी संविधान के ऊपर जाकर काम कर रही है या सरकारी नुमायन्दे जो अर्थ करे वही संविधान .

सरकारी तंत्र ,जनता द्वारा चुने प्रतिनिधि यदि जनता की आवाज को अनसुना करना या क्रूरता से दबाना चाहते हैं तो जनता शांतिपूर्वक विरोध का अधिकार रखती है.यदि सरकारीतंत्र इस अधिकार को बलपूर्वक खत्म करना चाहेगी तो याद रहे  जनता की ऊर्जा से तख्त और ताज बदल दिए जाते हैं.

जनता के धन का दुरूपयोग यदि जनप्रतिनिधि करते हैं तो उसको रोकना भी जनता के अधिकार क्षेत्र में आता है . हमने अपना संविधान अपने भारतीय परिवार की सुव्यवस्था के लिए बनाया है.संविधान कोई अटल सिद्धांत 
तो नहीं होता है की उसमे सुधार नहीं हो सकता है.अगर सुधार की प्रक्रिया में अनुचित देरी की जाएगी तो जनता
में असंतुष्टि फेलेगी इस असंतुष्टि को तुष्ट नहीं जाएगा तो जनता विरोध करेगी और विरोध की लपटे बगावत में 
भी बदल जाये तो आश्चर्य नहीं होगा .जनता के शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हक़ छिनना दमन के अलावा ओर क्या हो सकता है.

अन्ना को भ्रष्ट बताने वाले क्या अपने गिरेबान में झाँक कर देखेंगे की वो जो सरकार चला रहे हैं उनके ऊपर जनता का धन हड्फने के आरोप क्यों लग रहे हैं? विदेशो में जमा काला धन हम भारतीयों के खून पसीने की कमाई का है उसे देश की सम्पति क्यों नहीं घोषित की जाती है .

अन्ना को असंवेधानिक ठहराने वाले खुद कितने पाक साफ हैं? देश का प्रधान जब खुद लोकपाल के दायरे में आना चाहता है तो उनकी इच्छा का गला घोंटना क्या संवेधानिक कदम है? क्या ब्रष्ट शासको के खिलाफ जनता
का एकजुट होना असंवैधानिक है? ए.राजा की पीठ पर वरदहस्त रखना क्या संवैधानिक है?

सरकार जब भ्रष्ट नेताओ ,अधिकारियों पर कार्यवाही नहीं करती तब क्या वह संविधान के तहत ऐसा नहीं करती? अन्ना के सत्याग्रह में हड्डियाँ उछाल कर सरकार क्या सिद्ध करना चाहती है?

अब अन्ना एक व्यक्ति नहीं रहे हैं,आज अन्ना ६४ वर्षो से लुटते भारतीयों की आवाज बन गए हैं. आम भारतीय
भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना के विश्व रूप में खड़ा हो चूका है. देश को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते देख भ्रष्ट नेताओ  की चुलें हिल गई है .

आज के परिपेक्ष्य में अन्ना , देश-हित का सुविचार है.सिविल सोसायटी का अर्थ भारत राष्ट्र हो चूका है.इनसे
इनका परिचय पूछना बौने नेताओ के अधिकार में नहीं है.

आज मोदीजी ने गुजरात से हुंकार भरी है की गुजरात अन्ना के साथ है. आगे आने वाले समय में एक-एक करके और राष्ट्रप्रेमी हुंकार भरेंगे क्योंकि यह राष्ट्र -हित का हवन मंडप है और भारतीय जनता की उम्मीद है
की बहुत से राज्य इसमे अपनी पावन आहुति देंगे .

अरे ! भारतीयों, पीछे मुड़कर ये मत देखों की कारवां कितना लम्बा हो चूका है. आपको राष्ट्र हित में कदम से कदम बढाकर चलना है क्योंकि अब हम लक्ष्य के बहुत करीब हैं.

अरे!भारतीयों अपने भविष्य को अपने हाथों से लिखने का समय आ चूका है.अब एक ही लक्ष्य है- भ्रष्टाचार मुक्त भारत;

चलना ही जिन्दगी है रुकना है"........................."



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