बुधवार, 28 सितंबर 2011

तू भी चोर मैं भी चोर ,जाने भी दो यारो !!

तू भी चोर मैं  भी चोर ,जाने भी दो यारो !!

दौ पडोसी चोर आपस में भीड़ पड़े .बात भी कोई खास नहीं थी ,बस पहले चोर ने दुसरे चोर को सरे आम बीच  
बाजार में चोर कह दिया था .वैसे चोर को चोर कहना मेरे लिहाज से बुरा है क्योंकि हमारी संस्कृति में अंधे
 को अँधा कहने पर अंधे को ठेस ना पहुंचे इसलिए हम सूरदास कह देते हैं ,लंगड़े  को लंगडा कहना कोई
बढ़िया बात नहीं है .हम चोर को चोर नहीं कह कर कोई अच्छा शब्द प्रयोग कर सकते हैं .वैसे भी कोई गुनाह
 करते पकड़ा नाजाए तब तक उसे संवेधानिक रूप से चोर या गुनाहगार नहीं कह सकते हैं और तो और
किसी चोर का सहयोगी चोर यदि पकड़ा भी गया तो आप पकडे गए को चोर कहने का दुसाहस कर
सकते हैं परन्तु जो अभी तकनहीं पकड़ा गया उसे भी चोर कह देना जायज हो सकता है क्या ?

इसी बात को लेकर दोनों चोर भिड पड़े थे.पहले ने कहा टेलीफोन का तार मेने नहीं चुराया था वह तो मेरे 
कबीले का बाजीगर था ,लेकिन तुमने मुझ पर आरोप लगा कर ठीक नहीं किया ,मैं आम जनता के 
सामने जाऊँगा और सच बताऊँगा. मेने जो पूरा टेलीफोन चुराया था उस योजना में तुम भी मेरे साथ थे .
मेने उस टेलीफोन का ढांचा कबाड़ी को बेचा और तुमने अन्दर के उपकरण .

दोनों को जोर जोर से आक्षेप लगाते देख काफी भीड़ जमा हो गयी थी .दोनों चोर अपना -अपना पक्ष रख 
रहे थे . भीड़ में से नहीं पकडे गए शातिर न्याय करने बैठ गये.बड़ी उलझन थी सा'ब! क्योंकि शातिर महोदय
 को किसी एक को सही ठहराना था .एक को सही और दुसरे चोर को चोर कह देने से एक बार तो बात बन
जाती मगर दुसरे चोर से पंगा लेना पड़  जाता .बहुत माथापच्ची के बाद हल निकाला गया 

वे बोले ,आप दोनों का दोष मुझे दिखाई नहीं देता है .आप अपने काम का ठीक से निर्वाह नहीं कर सके 
इसलिए लड़ पड़े हो .भविष्य में काम इतनी सफाई से करो की माल भी झपट लो और पकडे भी मत जाओ .
खेर ...अभी तुम लोगो के लिए यही फैसला है की तुम भी चोर और ये भी चोर इसलिए एक दुसरे को
अस्थिर मत करो ,जाने भी दो यारो ,बात आई गयी कर दो .

दोनों चोरो को यह फैसला भा गया और गिला शिकवा भूल कर गले मिल गये .भीड़ में से कुछ उनकी
एकता पर नारे लगाने लगे कुछ अपना अपना करम पीट कर बिखर गये कबीले की शांति और सौहार्द के
लिए -जाने भी दो यारो !!     

नारी....?

नारी....?


नारी -
तुझ से लेकर ,
अनुत्तरित है प्रश्न ?
नहीं ढूढ़ पाया हूँ हल,
कि-    
तेरा पूजन ,
अब पंडालो में ,
या -
मंदिरों तक क्यों सिमट गया है ?
इसी आर्यावृत में कभी  ,
तुम-
शक्ति और श्रद्धा थी , 
शुचिता और आद्या थी ,
दुर्गा और लक्ष्मी थी . 
इसी आर्यावृत में अब ,
तुम-
भोग्या, 
काम्या , 
अबला ,
निर्लज्जा बन रही हो .
क्या,
इसे स्वतंत्रता  कहें?
इसे प्रगति पथ कहें ?  
तुम्हारी -
इस दुर्दशा का जबाबदार कौन ?
तुम खुद,
या 
पुरुष  समाज !!




रविवार, 25 सितंबर 2011

वो ३२/-खर्च नहीं कर पाता और तुझे कम पड़ते हैं ..........?

 वो ३२/-खर्च नहीं कर पाता और तुझे कम पड़ते हैं  ..........?

संसद सदस्य भी भर पेट खाने के बाद भी ३२/- दिन भर में खर्च नहीं कर पाता है ,यह कटाक्ष नहीं है ,कटु सत्य है .भारतीय सत्य को स्वीकार करते हैं परन्तु पचा नहीं पाते और जोर शोर से धमाचोकड़ी मचा देते हैं .इसी योजना आयोग की गूढ़ बात का भावार्थ जानने जब मैं तत्व मर्मज्ञ के पास गया तो उसने कुछ ध्यान लगाया और बोला ,बेटा ये योजना आयोग की बात मैं दम है और तुम जैसा ब्लॉग में बक बक करते हो वो बड़े आदमी की तौहीन करना है .तेरे पास कोई डिग्री है ?
मैं बोला -नहीं है सा'ब.
तेरे पास वातानुकूलित ऑफिस है ?
मैं बोला- नहीं है सा'ब .
तेरे साथ सरकार है?
मैं बोला =नहीं है सा,ब .
तभी तो कहता हूँ की तेरी बात मैं आक्रोश ज्यादा ,तथ्य कम रहता है .अगर तुम्हे ३२/-में भरपेट खाना चाहिए तो बेटा एक काम कर ,जनता की सेवा करने का ढोंग सीख ले .
मैंने पलटकर पूछा ,सा,ब ३२/- में शानदार दिन गुजारने और जनता की सेवा का ढोंग सीखने में आपसी ताल्लुक क्या है ?
वो बोले -वाचाल !तथ्य मर्मज्ञ मैं हूँ या तु?
मैं बोला-वो तो आप ही हैं इसलिए तो ३२/- में शानदार रहीसी दिन गुजारने का रहस्य समझने आपके पास आया था लेकिन आप तो बात को घुमाने लगे .
वो बोले -बेअक्ल !मैं बात घुमा नहीं रहा हूँ .तथ्य परक सत्य समझा रहा हूँ .तुम यदि आम आदमी के हित की बात के लिए ज़रा बत्तीसी हिला दोगे ,सेवा का ढोंग रच दोगे ,आसमानी सपने बुन दोगे तो तुम पर कोई पहाड़ नहीं टूट पडेगा .ये भावुक भारतीय तुम्हे  सर आँखों पर बिठा लेंगे और विधायक या सांसद बना देंगे ....
मैं उनकी बात काट कर बोला -मैं आपके पास सांसद बनने के गुर सीखने नहीं आया .सांसद बनने के गुर तो  "राजकुमार" को किसान के घर प्याज रोटी खाते देखकर ,खुली छत के निचे  खटिया पर सोते देखकर खुद ही सीख लूंगा मेरा मकसद तो योजना आयोग के हलफनामे के गूढ़ अर्थ को समझने का था लेकिन शायद
 आप पहेली का अर्थ नहीं बता पायेंगे .........
वो बोले -बच्चा ,तुम्हारे में धीरज की कमी है ,मेरी बात समझने के पहले ही अपनी बात धुनना चालु कर
 देते हो ये मेरी अंतिम चेतावनी है .ठन्डे दिमाग से बात को समझो.यदि आम भारतीय ने तुम्हे सांसद बना
दिया तो तुम संसद में पहुँच जाओगे .......
मैं बोला -चलो ,मैं आपकी बात की कल्पना कर लेता हूँ की मैं सांसद बन गया हूँ अब मुख्य बात ३२/-में 
अमीरी के साथ दिन गुजारने पर आ जाईये .
वो बोले -मैं तुझे तेरी बात का सही उत्तर देने के लिए ही समझा रहा हूँ ,तुम जब सांसद बन जाओगे तो संसद जाओगे और देश सेवा का मेवा जेब के हवाले करना मगर खाना संसद की केन्टीन में ही खाना .संसद की केन्टीन में चाय मलाई मार के ०१/-में, रोटी पर घी लगा के १/- में ,दाल १.५०/-में ,बढ़िया चावल २/-में,
डोसा ४/-में,बिरयानी ८/- में मिलती है .तु ज्यादा से ज्यादा चार रोटी ,एक प्लेट दाल,एक प्लेट चावल खा 
लेगा .अब बता कितने का बिल बना ?
मैं होंठो को जीभ से चाटते हुए बोला -७.५०/ - 
वो मुस्कराते हुए बोले -दोनों समय का कितना हुआ ?
मैं मिमयाते हुआ बोला -पंद्रह रूपये .
वो बोले -योजना आयोग ने  तेरे एक दिन में कितना खर्च दिखाया ?
मैं बोला -जी, ३२/-
वो बोले -फिर भी तुम योजना आयोग को कौस रहे हो ?अरे! सरकारी केन्टीन में खाया होता तो 
तेरे को ३२/-की कीमत मालुम होती .जा ,फुट ले अब .या तो सांसद बन जा या योजना आयोग में काम कर ,
तभी तेरे कु रूपये की कीमत समझ आएगी .आम आदमी बनने की जरुरत की तो ३२/- का तीन गुणा भी
 कम पडेगा .              
  

शनिवार, 24 सितंबर 2011

शिखर पर ध्वज फहराता हूँ .



मैं सपने बेचता नहीं हूँ .
मैं सपने दिखाता नहीं हूँ .
मैं खुद सपने देखता हूँ ,
मैं बड़े सपने देखता हूँ ,
और सपनो को 
सत्य में रूपांतरित करता हूँ  .
 मैं प्रेरित करता हूँ उनको -
जो सपने नहीं देखते हैं.
जो सपनो को मूल्य हीन समझते हैं . 

मैं तो आम पंछी हूँ ,
भरता हूँ उड़ान,
कबीले के संग .
थकता नहीं हूँ , 
रुकता नहीं हूँ ,
मेरी गति पर ,
है विश्व आफरान.

पाता हूँ गीता से ,
कर्म पथ पर चलना .
छद्म राज धर्म निभाना ,
मुझे नहीं आता है .
क्या होते हैं सापेक्ष के मायने,
क्या निरपेक्ष होता है,
मुझे तो हर युग में,
 बाली वध ही उचित लगता है .

मेरी आलोचना ,
मुझे प्रेरणा देती है .
मुझ पर मिथ्या कलंक ,
मुझे नयी  राह दिखाते हैं .
मुझ पर झूठे आरोप ,
मुझे योद्धा बनाते हैं .
मैं तो पथिक हूँ उस पगडण्डी का ,
जिस पर कभी लौह पुरुष चले थे .

सफलता के भार तले कब दबा हूँ ?
गीत अपने ही गौरव के कब गाता हूँ ?
अपनों की पीड़ा से कब दूर हुआ हूँ ?
गहन अंधेरों से कब डरा हूँ  ?
हर मुश्किलों को ठुकराता हूँ ,
पेरो तले मसल चट्टानों को ,
शिखर पर ध्वज फहराता हूँ .

मेरी सफलता के  गीत ,
जब गाती है दुनिया ,
खिल जाते हैं तब ,
साबरमती में करोडो  कमल ,
ठहर कर देखता हूँ ,
मुस्कराते उपवन को ,
और- चल पड़ता हूँ फिर,
 जीतने नये शिखर को .




शुक्रवार, 23 सितंबर 2011

अथ थू 2 जी घोटाला गाथा ........


कैग रिपोर्ट
 .......... 2007-08 में 122 कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटन तथा 35 दोहरी प्रौद्योगिकी वाली सेवाएं परिचालित करने के लाइसेंस जारी करने के जो मनमाने तरीके अपनाए गए उससे सरकार को अनुमानित 1,76,645 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ।
............... ऑडिटर ने यह अनुमान हाल में सरकार द्वारा की गई 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के मूल्य के आधार पर लगाया है। 
कैग ने कहा............
 ........ 2008 में 122 में से 85 लाइसेंस ऐसी 13 कंपनियों को जारी किए गए, जो इसके पात्र नहीं थीं। आवेदन के समय ये कंपनियां चुकता पूंजी की अनिवार्यता को पूरा नहीं करती थीं। सरकारी ऑडिटर के अनुसार, इन 85 लाइसेंस में से 45 लाइसेंस ऐसी कंपनियों को जारी किए गए जो मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (एमओए) के मुख्य उद्देश्यों को ही पूरा नहीं करती थीं।
      कैग ने रिलायंस टेलीकम्युनिकेशंस और टाटा टेलीसर्विसेज जैसी प्रमुख दूरसंचार कंपनियों को दिए गए दोहरी प्रौद्योगिकी लाइसेंस की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोहरी प्रौद्योगिकी के लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा ईमानदारी का अभाव था और इसी तरह के अन्य ऑपरेटरों को समान अवसर नहीं उपलब्ध कराए गए। ये ऑपरेटर सिर्फ नीति की औपचारिक घोषणा के बाद ही दोहरी प्रौद्योगिकी के लिए आवेदन कर सकते थे।

 2-जी स्पैक्ट्रम के भूत 

सुप्रीम कोर्ट ने  भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की उस रिपोर्ट पर आश्चर्य जताया जिसमें पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के समय हुए टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में कोई नुकसान नहीं होने की बात कही गई है। अदालत ने इस महाघोटाले के मामले में ट्राई की रिपोर्ट पर हैरानी जाहिर करते हुए उसकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया है।

  पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरिया, राजा के निजी सचिव आरके चंदोलिया और स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर शहीद उस्मान बलवा 2-जी मामले में जेल में बंद हैं

संसद की लोकलेखा समिति (पीएसी)ने टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में कथित भूमिका के सिलसिले में कारपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया और टाटा गु्रप के चेयरपर्सन रतन टाटा को 4 अप्रैल को पेश होने का समन जारी किया ।

रिलायंस के अनिल धीरुभाई अंबानी ग्रुप के समूह प्रबंध संचालक गौतम दोषी, साथ ही वरिष्ठ उपाध्यक्षों सुरेंद्र पिपारा, हरी नायर, यूनिटेक लिमिटेड और यूनिटेक वायरलेस के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा, डीबी रियल्टी और स्वान टेलिकॉम के प्रबंध निदेशक विनोद गोयनका की याचिका निरस्त कर दी, जिसके बाद इन्हें हिरासत में ले लिया गया 

कनिमोड़ी को स्वान टेलीकॉम के प्रचारक शाहिद बलवा के भाई आसिफ़ बलवा का सह-आरोपी क़रार दिया गया है. इसके अलावा 'कुसगांव फ्रूट्स एंड वेजिटेबल लिमिटेड' के निदेशक राजीव अग्रवाल का नाम भी पूरक चार्जशीट में शामिल कनिमोझी और शरद कुमार फिलहाल तिहाड जेल में बंद हैंहै.

वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने उच्चतम न्यायालय में शपथपत्र दाखिल करके आज कहा कि सीबीआई टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में पूर्व कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन की भूमिका की ईमानदारी से जांच नहीं कर रही है।

..पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा ने अदालत में कहा है कि 2 जी मामले में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम को भी गवाही के लिए बुलाया जाए. 

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस पी बी सावंत का कहना है कि प्रधामंत्री मनमोहन सिंह और 2-जी घोटाले के समय वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम को गवाह के तौर पर बुलाया जा सकता है.

सुब्रह्मण्यम स्वामी का आरोप है कि तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम स्पैक्ट्रम की क़ीमत तय करने के मामले में ए राजा की साज़िश में भागीदार थे.

आगे की गाथा पाठक महोदय पूरी करे ,मैं तो खबरों के माध्यम से इतना ही जान पाया हूँ .......

बुधवार, 21 सितंबर 2011

आन्नद ही आन्नद :- योजना आयोग ने करोडो भारतीयों को तत्काल अमीर बना दिया.

आन्नद ही आन्नद :- योजना आयोग ने करोडो भारतीयों को तत्काल अमीर बना दिया.  

आप और हम अब अमीर बन गए हैं .हम करोडो भारतीय जो रात को गरीब थे वे सुबह उठते ही अमीर बन गये. मेरी तरह आपको भी अपने ऊपर गर्व महसूस हुआ होगा की  हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्‍व वाली सुरेश तेंदुलकर कमेटी
की रिपोर्ट ने हमें अमीर बना दिया ,आम जन अब अमीर बन गया ,अब गरीबी सिर्फ प्रशासन चलाने वाले राज्य और केंद्र के 
कर्मचारियों या फिर विधान सभा और लोक सभा के सदस्यों में बची है जिसे हजारो के वेतन ,अनेक तरह के भत्ते ,फोकट की 
सुविधा देकर पूरा किये जाने के अथक प्रयास किये जा रहे हैं ,उनकी गरीबी और आम  भारतीयों की अमीरी  अलग -अलग है 
आम भारतीय के स्‍वस्‍थ्‍य रहने के लिए 39.70 रुपए पर्याप्‍त हैं। जबकि सरकारी महकमो के कर्मचारियों के स्वस्थ रहने के हजारो रूपये महीने का वेतन भी बहुत कम हैं इसीलिए वो बेचारे भ्रष्टाचार का सहारा लेकर जैसे तैसे नैया पार लगा रहे हैं , इतनी दयनीय परिस्थिति में नेता ,अफसर जी रहे हैं फिर भी अन्ना की आँखों में नेताओ की गरीबी क्यों खटक रही है ?

क्या अन्ना नहीं समझ पा रहे हैं की आम  भारतीय  व्‍यक्ति शहर में 32 रुपए और गांव में 26 रुपए प्रति दिन में खर्चा चला सकते हैं, वो गरीबी रेखा से ऊपर माने जायेंगे।आम  भारतीय  व्‍यक्ति  शिक्षा पर 99 पैसे प्रति दिन खर्च करने की ताकत रखता है क्योंकि स्कुल फीस ,किताबों ,नोटबुक ,पेन और स्याही की कीमत 99 पैसे प्रति दिन की नहीं है ,क्योंकि सरकार आगे से  स्कुल को ही खत्म कर देंगी  .पढ़ लिख कर आम भारतीयों नेताओ के लिए कुरापात (अड़चन ) ही तो पैदा कर रहे हैं  

हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्‍व वाली कमेटी सुरेश तेंदुलकर कमेटी द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि स्‍वस्‍थ्‍य रहने के लिए 39.70 रुपए पर्याप्‍त हैं। शिक्षा पर 99 पैसे प्रति दिन या 29.60 रुपए प्रति माह का खर्च, 61.30 रुपये प्रति माह में कपड़े, 9.60 रुपए जूते-चप्‍पल और 28.80 पैसे अन्‍य सामान पर खर्च करे तो वो गरीब नहीं कहलायेगा। खास बात यह है कि योजना आयोग ने यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को हलफनामे के तौर पर प्रस्‍तुत की है। इस रिपोर्ट पर खुद प्रधानमंत्री ने हस्‍ताक्षर किये हैं जो व्‍यक्ति शहर में 32 रुपए और गांव में 26 रुपए प्रति दिन में खर्चा चला सकते हैं, वो गरीबी रेखा से ऊपर माने जायेंगे। एक दिन में एक आदमी प्रति दिन अगर 5.50 रुपए दाल पर, 1.02 रुपए चावल, रोटी पर, 2.33 रुपए दूध, 1.55 रुपए तेल, 1.95 रुपए साग-सब्‍जी, 44 पैसे फल पर, 70 पैसे चीनी पर, 78 पैसे नमक व मसालों पर, 1.51 पैसे अन्‍य खाद्य पदार्थों पर, 3.75 पैसे ईंधन पर खर्च करे तो वह एक स्‍वस्‍थ्‍य जीवन यापन कर सकता है।

कितनी मेहनत से मेरे देश में बड़े बड़े नेता ,अफसर ,योजना आयोग ,प्रधानमंत्री और समुचित व्यवस्था आंकड़े तैयार करती है .अरबों रुपये खर्च करने से ,दिन रात लगे रहकर  ये लोग हमारी अमीरी के आंकड़े तैयार करने में लगे रहते हैं . ये जानते हैं की आम  भारतीय अब अन्ना बन कर उपवास कर रहे हैं और बारह दिन तो सिर्फ पानी से ही काम चला लेते हैं इन्हें बड़े उपवास की तैयारी के लिए शहर में 32 रुपए और गांव में 26 रुपए प्रति दिन प्रति व्यक्ति की जरुरत भी नहीं होगी ,वित्त मंत्री को चाहिये की आम अमीरों पर नया टैक्स लगाकर ये पैसा भी ले ले ताकि नेताओ के महंगाई भत्ते ,विमान भत्ते ,टेलीफोन भत्ते पर ढंग से खर्च हो सके .

 गरीबी रेखा की नई परिभाषा में सरकार ने कहा कि मुंबई, दिल्‍ली, बेंगलुरु या चेन्‍नई में चार लोगों के परिवार का खर्चा 3,860 रुपए में चल सकता है। बिलकुल सही रिपोर्ट है प्रधान मंत्री जी ,अरे हम आम अमीर शहरों में झुग्गी बस्तियों में,रेलवे स्टेशन पर ,सार्वजनिक पार्कों में ,फुटपाथ पर ही तो  रहते हैं ,हमें काम पर तो जाना नहीं है क्योंकि नौकरियों की योजना आपके पास है नहीं , हमारे बच्चों भी पढ़कर क्या तौड़ लेगे जब नौकरी मिलनी नहीं है ,हमारे बच्चे जीवन यापन के लिए छोटा मोटा उत्पात करके जेल चले जायेंगे और वहां पर रोटी मिल ही जायेगी .रहा सवाल स्वास्थ्य का तो हम गरीब नेता या सरकारी अफसर तो हैं नहीं जिनकी साधारण बिमारी पर करोडो खर्च आता है ,हम तो कीड़े मकोड़े हैं मर भी गये तो खर्च हम पर नहीं आयेगा क्योंकि लावारिश लाशें आपके सद्प्रयासों से प्रशासन के खर्च से जला दी जाती है . मेरे हिसाब से आम अमीरों पर जो नेता या सरकारी मातहत नहीं है उन पर टैक्स ५०००/- वार्षिक आय के बाद लगा ही देना चाहिये ताकि टैक्स की रकम में बढ़ोतरी हो जाए और देश की सेवा करने वाले गरीबों पर खर्च किया जा सके .


खास बात यह है कि योजना आयोग ने यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को हलफनामे के तौर पर प्रस्‍तुत की है। इस रिपोर्ट पर खुद प्रधानमंत्री ने हस्‍ताक्षर किये हैं। हमारे देश की प्रगति कितने गुना हुयी है ,आम भारतीय के अमीर हो जाने की गाथा सुप्रीम कोर्ट को मालुम होनी चाहिये जो बेवजह प्रशासन में काम करने वाले गरीबों ,गरीब नेताओ को, आदेश दे देती है की आम अमीर भारतीयों को फोकट में खाद्यान वितरण कर दिया जाए . 


यह मनमोहन सिंह का अर्थ शास्त्र है ,हमें उनके ज्ञान पर गर्व है ,हमें उनकी द्रष्टि पर गर्व है ,हमें उनके भारत निर्माण पर गर्व है ,हमें सुरेश तेंदुलकर कमेटी द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट पर गर्व है हमें सोनिया पर गर्व है ,आपने हमें अमीर कहा ,सुप्रीम कोर्ट में भी हमारी कंगाल हालत को अमीरी के जाल से पेश किया इसलिए हम आपके आभारी रहेंगे .आज हम आपके चश्मे पर गर्व  करते हैं जिसके कारण से आपने  आम भारतीयों को अमीरी के नजरिये से महसूस किया,


हम आम अमीर भारतीय प्रार्थना करते है की भारत भाग्य विधाता नेताओ और सरकारी अफसरों की  गरीबी को बरकरार रखे . 

सोमवार, 19 सितंबर 2011

इमाम ने किस मानसिकता का परिचय दिया ?

इमाम  ने किस मानसिकता का परिचय दिया ? 

नरेंद्र मोदी के सद्भावना मिशन में इमाम ने किस मानसिकता का परिचय दिया ? अगर इमाम अपने मजहब पर 
गर्व करते हैं तो क्या वे यह नहीं जानते थे की हिन्दू भी ठीक आप की तरह अपने धर्म पर ,धर्म के प्रतिक चिन्हों पर गर्व करता है .

नरेंद्र मोदी को अपने मजहब की टोपी पहना कर इमाम क्या सिद्ध करना चाहते थे ?एक हिन्दू के साथ यह ध्रष्टता क्यों करनी चाही थी उन्होंने ? क्या यह इमाम की सद्भावना थी? क्या किसी मुस्लिम मंत्री  को भगवान राम की मूर्ति माथे पर चढाने को सरे आम मंच से कहा जाता तो क्या वो इस प्रकार की प्रतिकूल बात पर मोदी जितने नम्र और सयंत खुद को रख पाता?

देश का बड़ा सियासी दल जो तथाकथित रूप से अपने को धर्म निरपेक्ष मानता है, और टोपी नहीं पहनने पर कटाक्ष करता है ,अल्पसंख्यक वर्ग के तुष्टिकरण के लिए ,उनके वोट के लिए वो दंभ से मुस्लिम टोपी तो क्या दरगाह में नमाज भी अदा कर सकता है लेकिन अगर कोई हिन्दू जाती का  नेता इस तरह से बहरूपिया नहीं बनना पसंद करते तो क्या इसका भावार्थ यही निकाला जाएगा की अमुक हिन्दू नेता ने मुस्लिम टोपी नहीं पहनी इसलिए वह सांप्रदायिक है अमुक हिन्दू नेता ने अजमेर जाकर भी दरगाह में चादर नहीं चढ़ायी इसलिए वह सांप्रदायिक है ,अमुक हिन्दू नेता हज करने नहीं गया इसलिए वह सांप्रदायिक है .अगर इस देश में सियासी लोग हिन्दू =सांप्रदायिक की परिभाषा में जीना चाहते हैं तो उनके लिए हिन्दुस्तान की भूमि सियासत करने के लिए अनुपयुक्त सिद्ध हो जाएगी 

इमाम में यदि सद्भावना होती तो उन्हें नरेंद्र मोदी के धर्म के अनुकूल प्रतिक चिन्ह भेंट में करना चाहिए था ,उन्हें 
चाहिए था कि वे भगवत गीता मोदी  को भेंट करते ,उन्हें चाहिए था कि वे भारत माता की फोटो उन्हें भेंट करते 
और उस समय मोदी स्वीकार करने से मना कर देते तो भारतवासी उन्हें कोमवादी नेता समझते लेकिन मेरे विचार से उन्होंने यह समझ कर मुस्लिम टोपी पहनानी चाही कि अगर मोदी ये टोपी पहन लेते हैं तो ही वे संतोष करेंगे की अब शायद वे अल्पसंख्यक वर्ग के हितेषी हैं .मेरी यह काल्पनिक  सोच अगर सही  है तो इस सोच में अल्पसंख्यक वर्ग का भला नहीं है ,यह तुष्टिकरण अल्पसंख्यक वर्ग को बरगलाने वाले लोग करते हैं ,जिसके चलते यह वर्ग ६० वर्ष बाद भी पिछड़ा है ,अशिक्षित है,आर्थिक रूप से कमजोर है ,मुख्यधारा से दूर अलग थलग है .

मुस्लिम टोपी नहीं पहन कर और विनम्र भाव से टोपी को  अस्वीकार कर मोदी ने छद्म धर्मनिरपेक्षता को पुरे देश के सामने  करारा चांटा मारा है !! मोदी ने इमाम के हाथो हरा दुपट्टा पहन कर यह संकेत दे दिया है की वे गुजरात और देश में मुस्लिम वर्ग को हराभरा ,खुश हाल देखना पसंद करते हैं .       

रविवार, 18 सितंबर 2011

मेरे सपनो का संविधान



सपने देखना और बड़े सपने देखना हमारी फितरत में होना ही चाहिये .आपका सपना आपको स्फूर्ति देता है आपके संघर्ष की धार को  तेज रखता है ,आपके जीवट को परवान चढ़ाता है ,सपने देखिये ,मंथन कीजिये परिणाम क्या और कब आयेगा उसकी चिंता छोडिये .

                                                 मेरे सपनो का संविधान 


मेरे सपनो के संविधान में अनुसूचित जाती ,जनजाति ,अल्पसंख्यक,अगड़ा ,पिछड़ा वर्ग का कोई उल्लेख नहीं ,इसकी जगह अति गरीब वर्ग,गरीब वर्ग ,गरीब मध्यम वर्ग ,मध्यम वर्ग ,उच्च वर्ग ,अति उच्च वर्ग जैसे शब्दों का प्रयोग होगा  .


 मेरे सपनो के संविधान में  हम सामाजिक जीवन में  किसी भी धर्म ,पंथ या उपासना पद्धति में विशवास और निष्ठां रखते हो लेकिन शिक्षा ,रोजगार ,वोटिंग कार्ड ,राशन कार्ड में जाती की जगह "भारतीय" ही लिखा जायेगा .


मेरे सपनो के संविधान में सब्सिडी ,राशन कार्ड सिर्फ गरीब मध्यम वर्ग तक सीमित रहेगा .

मेरे सपनो के संविधान में आरक्षण की सुविधा जातिगत आधार पर नहीं .आरक्षण अतिगरीब,गरीब और गरीब मध्यम वर्ग तक सीमित रहेगा बाकि सभी वर्ग आरक्षण से वंचित रहेंगे  .

मेरे सपनो के संविधान में कुटीर उद्योग को ही सब्सिडी ,कम ब्याज दर पर ऋण मिलेगा ,बड़े उद्योग को विशेष अनुदान नहीं मिलेगा  .

मेरे सपनो के संविधान में जीवन जरुरी वस्तुए टैक्स फ्री रहेगी जिसमे सभी पट्रोल उत्पाद ,खाद्यान, ओषधियाँ और हथकरघा से निर्मित कपडे शामिल होंगे .

मेरे सपनो के संविधान में वस्तु के उत्पादन पर एक ही बार टैक्स लगेगा .आयकर की अधिकतम सीमा १५%रहेगी

मेरे सपनो के संविधान में लोकसभा तथा विधान सभा सदस्यों के साथ साथ  प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का चुनाव सीधे रूप से जनता करेगी

मेरे सपनो के संविधान में लोकसभा तथा विधान सभा सदस्यों के साथ साथ  प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के उम्मीदवार को उच्च शिक्षित होना होगा और न्याय पालिका से चरित्र  प्रमाण लाना होगा की अतीत में सम्बंधित उम्मीदवार ने कोई असंवेधानिक काम नहीं किया है तथा उम्मीदवार की अधिकतम उम्र ६० साल रहेगी

मेरे सपनो के संविधान में हर स्तर की शिक्षा में '' नैतिक और लोक व्यवहार की शिक्षा'' अनिवार्य रूप से उत्तीर्ण  करनी होगी .प्रशासनिक सेवा में आने वाले वर्ग को परीक्षा पास करने के बाद  दौ बर्ष तक प्रेक्टिकल रूप से
सेवा काम के लिए अस्पताल ,अनाथालय ,वृद्धाश्रम ,गरीब और पिछड़ी बस्तियों में सेवा देनी होगी उसके बाद ही
उसकी प्रशासनिक सेवा में नियुक्ति होगी

मेरे सपनो के संविधान में लोकसभा और विशेषज्ञ सभा रहेगी ,लोकसभा में जनता के चुने हुए प्रतिनिधि और विशेषज्ञ सभा में अलग -अलग विषयों में  उच्च विश्व विद्यालयो से  विशेष योग्यता से परीक्षा पास किये युवा
होंगे .किसी भी विषय पर चर्चा पहले विशेषज्ञ सभा में होगी और उनका निर्णय लोकसभा में भेजा जायेगा ,उस निर्णय  पर लोकसभा पुन: चर्चा करेगी और दोनों सदनों के बहुमत के बाद कानून पारित होगा

मेरे सपनो के संविधान में लोकसभा के सदस्य पांच वर्ष के लिए और विशेषज्ञ सभा के सदस्य १० वर्ष के लिए चुने जायेंगे

मेरे सपनो के संविधान में न्याय पालिका २४ घंटे काम करेगी .न्यायाधीश ६-६ घंटे की शिफ्ट में काम करेंगे .झूठे गवाह भी दोषी के समकक्ष दंडित होंगे . 
    

शनिवार, 17 सितंबर 2011

गुजराती प्रजा ,मोदी या वागेला !! 

मोदी भारतीय जनता पार्टी के साथ साथ विश्व स्तर पर गुजरात को भी मजबूत कर रहे हैं ,यह देश की प्रजा जानती है .मुझे याद है इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी का निवेदन था की जब एक बड़ा पेड़ गिरता है तो आसपास के पेड़ चपेट में आ ही जाते हैं .निर्दोष सिक्खों की निर्मम हत्याए हुयी थी उस समय .

गुजरात के २००२ के दंगे क्यों फेले ? यदि  अल्पसंख्यक आततायी रेल की बोगी को नहीं जलाते ,बहुसंख्यक हिन्दुओ को जिन्दा  नहीं जलाते तो क्या गुजरात में दंगे होते ? इस तथ्य पर सच्चे मन से चिंतन करने की हर भारतीय को आवश्यकता है 

क्या हम अपने हिन्दू होने पर गर्व महसूस करे तो इसका मतलब यह कदापि नहीं हो सकता है की हम साम्प्रदायिकता में विशवास करते हैं .इस देश के हर नागरिक को अपने अपने मजहब पर गर्व करने का हक़ है 

राम के नाम को कटघरे में खड़ा करने वाले सियासी दल के लोग किसी दल की प्रतिक्रिया में अनशन का नाटक करे ,रघुपति राघव राजाराम .....करे या कच्चे सूत की माला पहने ,गुजराती प्रजा सही और गलत का फैसला 
करने में पहले भी सक्षम थी और अब भी है .

अल्पसंख्यको के हितेषी मानने वाले सियासी दल कभी बताएँगे की अल्पसंख्यक वर्ग आज देश की मुख्यधारा 
से  क्यों नहीं झुड पाया है ?आज भी यह वर्ग शिक्षा ,रोजगार ,व्यापार,राष्ट्रीयता में पिछड़ा हुआ क्यों है ? इस वर्ग के साथ ,इस वर्ग की भावनाओं के साथ किसने खिलवाड़ किया है ? एक भारतीय वर्ग के निर्माण की जगह इस वर्ग को अल्पसंख्यक वर्ग ही क्यों बना रहने दिया गया है? 

बार -बार दंगों को याद दिलाने की राजनीती करके हम गुजराती /भारतीयों  में  कटुता मत फेलाईये .हम गुजराती विकास और अमन के साथ हैं .कोई भी सियासी दल गुजरात की प्रजा के अमन या विकास की बात करता है तो गुजरात उसके साथ है हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है की उसका नाम मोदी है या वागेला 

हमें सच्चा सद्भाव चाहिए ,गुजरात के विकास में मोदी के साथ हर कौम लगी है ,गुजरात के  विकास को अपनी प्रेरणा बनाईये . 

नारी को आद्या से भोग्या के रास्ते धकेलता आधुनिक भारत

नारी को आद्या से भोग्या के रास्ते धकेलता आधुनिक भारत   

नवरात्री के पर्व पर मेरा देश आद्या शक्ति की उपासना करता है मगर अफसोस है की बात है कि हम वास्तविक 
जीवन में कहाँ आकर खड़े हो गए हैं ,और यह रास्ता आगे जाकर किस विकट मोड़ पर देश कि नारी को ले जायेगा

१.हम विश्व के चोथे उस देश के रूप में गिने जा रहे हैं जहाँ कि नारी असुरक्षित है उसके साथ छेड़खानी ,बलात्कार ,मानसिक त्रास जैसी घटनाएं बढती जा रही है .

२.हम पिछले तीन दशक में अस्सी लाख से ज्यादा कन्या भ्रूण हत्या कर चुके है और शर्म कि बात यह है कि कन्या भ्रूण हत्या में अपने को पढ़ा लिखा सभ्य कहने वाला वर्ग जिसके घर पहली कन्या संतान है ,सबसे आगे रहा है .

३. हमने भारतीय नारी को वस्तु समझ कर ,माल समझ कर अधोगति के मार्ग पर धकेल दिया है 

४.आधुनिकता के नाम पर हमने उसके लज्जा रूपी वस्त्र का हरण किया है और भोगने का खिलौना बना दिया है 

५.पुरुष कि बराबरी करने कि मृग तृष्णा नारी के मन में जगाकर उसे दिन में घर के बाहर काम करने ,घर वापसी पर घर का काम करने और रात में हवस पूरी करने का साधन बना दिया है 

६.टी वी सीरियलों में हम नारी को करूणाहीन ,स्वार्थी ,भावनाहीन पेश करके घटिया मनोरंजन का पात्र बना दिया है 

७.हमने विज्ञापन में उसके अवयवों का बेजा इस्तेमाल किया है और पैसा बनाने तथा व्यापार वृद्धि का बेहूदा साधन बना लिया है 

८.हमने फिल्मो में उसके नग्न शरीर को दिखा कर देवी के स्वरूप को कलंकित कर दिया है 

९ हमने आर्थिक स्वावलंबन के नाम पर या उसकी आड़ में नारी  के शील का दफ्तरों में शोषण किया है 

१०.नव वधु रेंगिग कि नयी प्रथा चलाकर दुल्हे के दोस्त ,भाई और रिश्तेदार वगेरह के सामने गरम गोस्त के रूप 
में परोस दिया है 

११.आवारा धनाढ़य वर्ग ने पत्नी बदलने का खेल खेलकर  नारी को वेश्या बना दिया है 

१२.लिव इन रिलेशन के कारण नारी का जातीय शोषण करने का नया तरीका इजाद कर दिया है 

१३.हमने नारी को रुपयों कि चमक दिखाकर उसके शील को ठगा है 

१४.अपनी ही नारी को ,बहु को ,या  लड़की को मुन्नी बदनाम .........शीला कि  जवानी पर थिरकता देख कला के नाम पर उसके गदराये जिस्म का लुफ्त उठाया है 

१५.पुरुष खिलाड़ियों को जीत के जश्न में या हार के गम में हमने नारी को शिकार के रूप में परोस दिया है 

१६.गर्भपात को अंकुश हीन करके हमने जम कर नारी को भोगा है और अपने कलुषित आचरण को छिपाया है 

१७.आजादी के नाम पर हमने भारतीय नारी को उच्छ्खलन बना दिया है 

१८.विश्व सुंदरी के नाम पर ,भारत सुंदरी के नाम पर उसकी नग्न देह से अपनी आँखों को सेका है 

१९.नारी के सतीत्व को दकियासुनी बात बताकर उसे भ्रमित किया ताकि नारी आधुनिकता कि दौड़ में अंधी हो जाए और पथ हीन आचरण करने में गौरव महसूस करे

20 .सीता के शील ,सावित्री के पतिव्रता धर्म ,दुर्गा की शक्ति ,मीरां की भक्ति ,लक्ष्मीबाई के शोर्य,मदर टेरेसा की 
करूणा से हटाकर हमने आज की नारी को पतन के गर्त में धकेल दिया है 

हम नवरात्री पर्व को मनाने के कितने काबिल हैं ?क्या नारी को शक्ति का रूप मानकर पूजने वाला राम हमारे 
दिल में जिन्दा है ? क्या नारी के शील की रक्षा करने वाला कृष्ण बनने का जज्बा हमारे दिल में है ?शत्रु की नारी 
को इज्जत बख्सने वाला शिवाजी का दिल हमारे शरीर में धडकता है ?युवा विदेशी नारी का पुत्र बन कर जीने का साहस जो विवेकानंद में था वो हमारे में है ?

................अगर नहीं है तो फिर नारी कल्याण का आडम्बर क्यों ?

..................हे भारतीय नारी ! तेरा गौरव किस में है यह तुम्हे ही पहचानना है . तुम पश्चिमी देशो की भोग्या भी बन सकती हो या भारतीय दर्शन की अनसूया भी .  

माँ दुर्गा तुम्हे प्रणाम . माँ शक्ति तुम्हे नमन . सूर्पनखा तुम पर घृणा !!     

गुरुवार, 15 सितंबर 2011

क्या हिंदू राष्ट्रवादी देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के लिए ख़तरा है?

 क्या हिंदू राष्ट्रवादी देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के लिए ख़तरा है? 


अमरीकी संसद की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में स्वदेशी हिंदू चरमपंथ बढ़ता 
जा रहा है
रिपोर्ट कहती है कि इसका भारत की राष्ट्रीय मानसिकता पर गहरा असर पड़ा है और कई विश्लेषकों का
कहना है कि हिंदू राष्ट्रवादी देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के लिए ख़तरा साबित हो सकते हैं.
इस रिपोर्ट में गुजरात प्रशासन और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ों के पुल भी बांधे
 गए हैं
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कभी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को गुजरात दंगे के बाद वीजा देने से मना करने वाले
 अब तारीफ करते हैं .(बिना स्वार्थ के, शंका है)
अपने स्वार्थो की पूर्ति के लिए किसी भी देश को आतंक फेलाने के नाम पर कुचल डालने वाले
 लोग अब समस्त हिन्दू धर्म को धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के लिए ख़तरा मानने की शंका कर रहे हैं .
क्या इस संसार के किसी भी देश में इतनी संस्कृतियाँ फल फूल पाई है जितनी हिन्दुस्थान में पोषित हो रही है ?
क्या संसार का  कोई भी देश सभी धर्मों और मजहबों को साथ लेकर चल पाया है ,यह ताकत हिन्दुस्थान में है
और बहुसंख्यक हिन्दुओ की बदोलत है इस सत्य को संसार को स्वीकार करना पडेगा .

 देश के धर्म निरपेक्ष स्वरूप को बचाने के लिए धर्मांतरण को रोकना होगा,हिन्दू धर्म को पुष्ट करना होगा  .
हिन्दू एक पंथ नहीं है ,यह जीवन पद्धति है ,यह संस्कृति  है ,यह सनातन है,शत्रु पर भी दया इस धर्म में झलकती है ,
वसुधेव कुटुम्बकम का सिद्धांत विश्व सभ्यता को हिन्दू धर्म ने दिया है .
वे लोग शिकागो धर्म सम्मलेन के युवा भारतीय को भूले जा रहे हैं .
विडम्बना है की लोग अपने गिरेबान में नहीं झांकते हैं  
    



बुधवार, 14 सितंबर 2011

जो दरवाजा बंद करके बैठे थे वो लाल जाजम बिछा रहे हैं

ये अमेरिका और वहां के राजनेता अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए बिना पेंदे के लोटे की तरह लुढकते हैं .२००२ के गुजरात दंगे की प्रतिक्रिया में अमेरिका ने नरेन्द्र मोदी को अमेरिका में आने का वीजा नहीं दिया ,दरवाजे बंद कर दिये .उस समय यह देश और गुजरात का अपमान था लेकिन सच्चाई आखिर सामने आती है .हमारे देश की सर्वोच्च अदालत ने जब इस मामले को वापिस निचे की अदालत में भेज दिया तो अमेरिकन कमिटी के कान कड़े हो गए होंगे . इस फेसले के तुरंत बाद श्री मोदी के गुणगान करने शुरू कर दिये .हम गुजरातियों को अब अमेरिकन प्रमाणपत्र की जरुरत कहाँ है ? यदि अमेरिकन संसद कमिटी  नरेंद्र मोदी के विषय में राय बदलती है और खुद के देखने के नजरिये को बदलती है तो भी ज्यादा ख़ुशी नहीं है क्योंकि जिस सच को आम गुजराती १0वर्षों  से बहुमत से कह रहा है वह उन्हें अब समझ आया है ..खेर देर आये दुरस्त आये .    

रविवार, 11 सितंबर 2011

सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक: मनसूबे क्या हैं सरकार के ?


 . सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक  के कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं
कानून-व्यवस्था का मामला राज्य सरकार का है, लेकिन इस बिल के अनुसार यदि केंद्र को ‘महसूस’ होता है तो वह सांप्रदायिक दंगों की तीव्रता के अनुसार राज्य सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप कर सकता है और उसे बर्खास्त कर सकता है.
इस प्रस्तावित विधेयक के अनुसार दंगा हमेशा ‘बहुसंख्यकों’ द्वारा ही फ़ैलाया जाता है, जबकि ‘अल्पसंख्यक’ हमेशा हिंसा का लक्ष्य होते हैं.
यदि दंगों के दौरान किसी ‘अल्पसंख्यक’ महिला से बलात्कार होता है तो इस बिल में कड़े प्रावधान हैं.
किसी विशेष समुदाय ( यानी अल्पसंख्यकों ) के खिलाफ़ ‘घृणा अभियान’ चलाना भी दंडनीय अपराध है.इसमें ( फ़ेसबुक, ट्वीटर और ब्लॉग भी शामिल है ) .
अल्पसंख्यक समुदाय के किसी सदस्य को इस कानून के तहत सजा नहीं दी जा सकती यदि उसने बहुसंख्यक समुदाय के व्यक्ति के खिलाफ़ दंगा अपराध किया है.
प्रस्तावित विधेयक में कहा गया है कि दंगा हमेशा ‘बहुसंख्यकों’ द्वारा ही फ़ैलाया जाता है, जबकि ‘अल्पसंख्यक’ हमेशा हिंसा का लक्ष्य होते हैं. ये अल्पसंख्यक किसी भी जाति-संप्रदाय के हो सकते हैं. इसे हिंदू-मुसलिम से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. अगर गुजरात में हिंदू तो कश्मीर में मुसलमान बहुसंख्यक हैं.
इसी तरह फ़ेसबुक, ट्वीटर और ब्लॉग समेत किसी भी माध्यम से ‘घृणा अभियान’ चलाने वालों को दंडित करने की बात कही गयी है. 
हां बलात्कार के मामले में संशोधन की जरूरत है.

इस देश का बहुसंख्यक दंगा फेलाता है ? कितना बड़ा झूठ है यह ? हिन्दू हमेशा वसुधेव कुटुम्बकम के सिद्धांत पर जिया है. हिन्दुस्थान और हिन्दुओ ने कभी किसी देश को जीतने और पराधीन बनाने के लिए आक्रमण नहीं किया है. विश्व इतिहास यवनों के काले कारनामों से भरा है मगर ये आर्य भूमि हमेशा शांति और मानवता के साथ रही है.यदि ये विधेयक मूल रूप में पारित होता है सबसे पहले वो लोग अपराधी होंगे जो भारतीयों को बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक में बँटा देखना चाहते हैं 
.ये छद्म धर्म निरपेक्षी मानवता का पाठ सिखाने की जगह धर्म ,जाती ,संख्या बल के नाम पर आपस में भारतीयों को लड़ाना कब छोड़ेंगे ?क्या हमारे पूर्वजों ने जबरदस्ती अपना हिन्दू धर्म दुसरे धर्मों पर थोपा है. हमने हमारी तरह इस भारत माँ के आँचल में सब धर्मों को जगह दी और अब वो लोग कुछ हिन्दू जयचंदों के साथ मिलकर बहुसंख्यक लोगों के खिलाफ उनकी संस्कृति ,हस्ती पर षड्यंत्र बना रहे हैं.
सावधान .........हमें भारतीय बनना है ना कि बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक. हम मानव बने रहना चाहते हैं ? हम एक ही परमात्मा की संताने हैं? भगवान ने हमें हिन्दू, मुस्लिम ,इसाई बना कर जन्म नहीं दिया ,उसने सिर्फ मानव बनाकर भेजा है.
चंद स्वार्थी लोगों ने हमें आपस में बांटा है. 
अगर ये राजनेता समय -कुसमय जातिगत आधार पर निवेदन न करके भारतीयों के हित के निवेदन करने लगे तो काफी हद तक साम्प्रदायिकता ख़त्म हो जायेगी . जब हमारे राष्ट्रिय राजनीती के लोग वोट बैंक का चस्मा उतार कर सभी भारतीयों को समान निगाह से देखेंगे तो सोहार्द तथा भाईचारा  स्वयमेव बनने लगेगा . 
आज देश के विकास में हर कोम लगी है. इस भारतीय बिरादरी को अलग -अलग नाम से परिभाषित मत करो . आने वाले विकसित भारत के लिए सुधर जाओ क्योंकि आप हिन्दू मुस्लिम,सिख ,पारसी ,इसाई नहीं है ,आप भी भारतीय हैं और हम सब भी भारतीय हैं.

जड़ की गहराई

जड़ की गहराई 

 दौ किसान के खेत पास पास में थे .खेत पास में होने के कारण दोस्ती भी हो गयी थी  .एक दिन पहला किसान कुछ पेड़ की रोप लेकर आया और खेत की बाड़ के पास रोपने लगा .दुसरे किसान ने देखा कि उसका मित्र कुछ रोप रहा है तो वह भी कौतुहल वश देखने के पहले मित्र के पास चला आया.उसने अपने मित्र से पूछा -"मित्र क्या रोप रहे हो?"

पहले मित्र ने कहा -"बाड़ के पास कुछ पेड़ रोपण कर देता हूँ ताकि गर्मी के मौसम में पेड़ों के निचे आराम से सुस्ता सकूँ औरपेड़ों के बड़े होने पर इनकी लकड़ी बेचकर आय भी अर्जित कर सकूँ .

दुसरे किसान को उसकी बात जँच गयी और अगले दिन वह भी पेड़ों की रोप ले आया और खुद के खेत की बाड़ के पास रोप दी .

समय -समय पर दोनों किसान मित्र अपने अपने पेड़ो की देखभाल करते रहे.कोई जानवर उन्हें नुकसान ना पहुंचाए इसलिए काँटों की बाड़ भी कर दी.साल भर बाद पहले किसान ने अपने पेड़ों की बाड़ हटा दी.अपने मित्र
को बाड़ हटाते देख दुसरे मित्र ने सलाह दी,"तुम्हे इन पेड़ों की बाड़ नहीं हटानी चाहिये,इस बाड़ के सुरक्षा कवच 
के हट जाने से कोई भी जानवर इन्हें क्षति पहुंचा सकता है."

पहला मित्र बोला -तुम्हारी बात सही है परन्तु अब ये इतने ऊँचे उठ गये हैं कि छोटे जानवर  से इन्हें कोई खतरा 
नहीं है इनके तने के विकास के लिए खुला छोड़ने पर ये हवा के दबाव ,अंधड़ और तपती गर्मी को सहने की शक्ति 
पाकर खड़े रहना सीख जायेंगे "
दूसरा किसान अपने मित्र के तर्क से असहमत था उसने अपने पेड़ों की बाड़ ज्यों की त्यों रहने दी.

कुछ दिनों बाद पहले किसान ने अपने पेड़ों को नियमित पानी देने की जगह पखवाड़े का अंतराल देना शुरू कर
दिया इस कारण से उसके पेड़ के पत्ते कुम्हलाने लगते ,जबकि दूसरा किसान मित्र अपने पेड़ों के सुरक्षा बाड़ के
साथ नियमित पानी देता रहा और इस कारण उसके पेड़ हरे-भरे दीखते थे.जब भी दोनों मित्र मिलते ,अपने
अपने पेड़ों की बात करते तो दूसरा मित्र पहले को टोकता -"मेरे पेड़ कितने हरे-भरे हैं ,तुम आलसी और लापरवाह हो.तुमने पेड़ तो लगा दिये परन्तु समय पर पानी भी नहीं देते हो.जब तुम्हारे पेड़ मुरझाने लगते हैं
तब तुम्हारी नींद उड़ती है और १५-२० दिन बाद इन्हें पानी नसीब होता है"

पहला किसान अपने मित्र की बात पर मुस्करा देता और कहता , अब मैं महीने में एक बार ही पानी दूंगा मेरे
पेड़ो में शक्ति होगी तो जीवित रहेंगे और मुरझा  के जल गये तो उखाड़ फेकुंगा ."

दूसरा किसान उसकी मुर्खता पर खिल्ली उड़ाता और अपने पेड़ों की रोज देखरेख रखता .समय अंतराल बारिस 
का मौसम आया,खूब अच्छी बरसात हुयी ,खेत पानी से भर गये.दोनों किसान बीज और हल के साथ अपने
अपने खेत पर पहुंचे . नयी फसल की बुवाई की.रोज खेत आने लगे .

पहले किसान के पेड़ भरपूर पानी पाकर हरे हो गये,उनका तना मोटा और मजबूत हो गया और दुसरे किसान 
के पेड़ भारी बारिस से सड़ गये .दूसरा किसान अपने लगाये पेड़ों की बाड़ हटा कर सड़े पेड़ो को उखाड़ कर फ़ेंक 
रहा था.पहला किसान दुसरे किसान के पास आया और बोला,- तेरी समझ में अब तो आ गया होगा की तेरे 
पेड़ क्यों नष्ट हो गये?

दूसरा किसान चुप था .अपने मित्र को चुप देख पहला किसान बोला, "तुम्हारी इन पेड़ों के प्रति अनावश्यक देखरेख से यह परिणाम हुआ .अगर तुमने इनके थोड़े ऊँचे होने पर सुरक्षा बाड़ हटा दी होती तो इनमे आंधी , तूफान सर्दी और गर्मी सहन करने की ताकत आ जाती . तेज हवा के थपेड़ों से संघर्ष कर इनका तना सुदृढ़ हो जाता .यदि  इनके बड़े होने के बाद नियमित पानी नहीं देकर कुछ अंतराल बाद देते तो ये पेड़ जिन्दा रहने के लिए संघर्ष करते ये अपनी जड़ों को जमीन की गहराई तक जाने देते और जिन्दा रहने के लिए भोजन जुटा लेते बिना संघर्ष के इन्हें भोजन और ख़ुराक देने से जड़ों ने गहराई में उतरना ही नहीं सिखा .इसका नतीजा यह 
हुआ की अनुकूल परिस्थिति में भी ये अपने को नहीं बचा पाये."

शनिवार, 10 सितंबर 2011

आम आदमी

आम आदमी 

सुबह सवेरे,
पेट की भूख बुझाने,
टिमटिमाती मासूम आँखों 
और 
हाथ हिलाते बच्चों को छोड़ ,
घर से निकलता है आम आदमी.

पिसता,लटकता, बसों और ट्रेनों में ,
समय पर दफ्तर पहुँचने की आपाधापी में ,
निक्कमी सरकार और भ्रष्ट नेता को कोसता,
देर से पहुँचता है दफ्तर आम आदमी.

बॉस की फटकार से दिन की शरुआत ,
फिर फायलों से माथापच्ची ,
दोपहर के भोजन पर,
बिना तेल की सब्जी 
और
रुखी रोटी को चबा ,
कुछ गालियाँ दे महंगाई को,
कुछ सुस्ता , काम पर लगता है आम आदमी.

शाम को काम निबटा ,
बस ,ट्रेन पकड़ने की जल्दी में,
बहदहासा,भीड़ को चीरता ,
घर पहुँचने की आशा से
चहकता है आम आदमी.

उसे कहाँ मालुम की ये चहक अंतिम है,
उसे कहाँ मालूम बच्चे ने अंतिम हाथ हिलाये हैं,
उसे कहाँ मालुम टिमटिमाती आँखों ने अंतिम विदाई दी है,
वह तो छोटी सी आशा में खोया है;
तभी -
 एक तेज धमाके ने,
नकारा तंत्र को अंगूठा दिखा ,
सैंकड़ों खुशियाँ लील ली है ,
कटे फटे शव ,
रक्तरंजित अवयव ,
चीख -पुकार ,
रुदन -कोहराम में डूबता है आम आदमी.

इस बीच-
जगते हैं  कुछ घड़ियाल, 
गिद्ध,सियार और मगर के बच्चे,
कुछ फ़ेंक  कर, कुछ बटोरने की चाल ,
उस जाल में फंसता है आम आदमी.

कुछ भुत -पलीत, 
जलती लाशो पर सेकते हैं रोटियाँ ,
शह और मात की बिछाते कुटनीतिक घोटियाँ,
आरोप -प्रत्यारोप के बीच उठती है अर्थियां ,
कैसी पहेली बन जाता है आम आदमी.

स्वजनों की सिसकियों से,
दहल जाता है मरघट ,
सूख जाता है आँखों का पानी ,
आग की लपटों में स्वाहा ,
माँ का तारा ,बाप का सहारा ,मासूम की जिंदगानी ,
मरगट के पेड़ से ,
तब 
चीखते हैं उल्लू -
कब तक कुत्ते की मौत , मरेगा आम आदमी ........!!

  




शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

मेडम हो गयी स्वस्थ ....! पाइये अब चार सौ सहस्त्र...!!

मेडम हो गयी स्वस्थ ....! पाइये अब चार सौ सहस्त्र...!!

नियति का चक्र विचित्र  होता है इसकी चाल समझ के परे होती है. जैसे ही बाबा योग से रोग भगाने दिल्ली पहुँचे
तो रातोरात  अस्वस्थ बना दिए गये. उठाकर फेका जब उन्हें हरी के द्वार तो यमराज फिर से ठेल गये और उनकी जगह मेडम को ले जाने की तैयारी करने लगे .बेचारे द्वारपाल आनन- फानन में पाताल की और छिपा आये .

अब अस्वस्थ मेडम पाताल में स्वास्थ्य लाभ उठाये तभी छा गयी  पुरे देश में सुनामी . सुनामी में बची रही जनता, फँस गये मदारी और फँसते देख मदारी पाताल में लेटी रही  दुलारी . अभी न जाना .........टोपी के जाने पर आयेंगे ...! मगर टोपी को लेने जब यमराज उतरा , हुआ यूँ इस तरह उल्टा ,....की टोपी को उतार  छत्र पहना  गया काल का बन्दा  . रोये सब मदारी,क्यों अस्वस्थ है महारानी .

काल ने  छत्र का राज्याभिषेक  तय करवाया तब  मेडम की टोपी उतर गयी. उतरी भी ऐसे की वापस सर पर
पहन ना पाये.जैसे -तैसे जुगाड़ लगा नयी  पेबंद मारी  ,सर में फिर से फँसायी, आने की टिकिट बनवायी मगर हाय, रे किस्मत !हरामी, दिवाली से पहले खेल गये खून की होली .

मगर वो ठहरे चमच्चा के चमचा,बोले  - मेडम मुस्कराई ,हमारी जान में जान आई .अब आप दीवार पर फोटो लगवाइये  और  चार सौ सहस्त्र पाईये .





गुरुवार, 8 सितंबर 2011

देश की नाव किसके पाप से क्यों डूबी ?

देश की  नाव किसके पाप से क्यों डूबी ?

नाव क्यों और किसके पाप से डूबी यह बात कोई मंत्री नहीं कहता है बस हर बार नाव कैसे डूबी इसी बात को देश
के सामने रख दिया जाता है 

बड़ा आडम्बर है इस देश में .......जोड, बाकी ,गुना ,भाग वाला आदमी आतंक में भी यही फार्मूले आजमाता है और आतंक को भी भगवा आतंक बना देता है पर अपनी अक्षमता के बावजूद पद नहीं छोड़ता .सोये हुए भारतीयों को रातो रात खदेड़ता है परन्तु आतंक को नहीं खदेड़ता .

बड़ी विडम्बना है इस देश में...... बम्ब विस्फोट में मारे गये भारतीयों की मौत पर विपक्षी नेता दिन -रात संसद 
में आतंकवाद पर निर्णायक बहस की मांग करने  की जगह काम रोक देने का प्रस्ताव रखता है

बड़ी धर्ष्टता है इस देश में.....मरने वाले की बोली लगा दी जाती है. अरे ! ये पैसा तो हमने दिया था अपने जीने की
आजादी की रक्षा के लिए , आतंकवादियों की लाशो से भारत माँ का सिंदूर सजाने के लिये; लेकिन ये नेता हमारा पैसा हमारी लाश पर फ़ेंक कर क्या जनता को यह समझाना चाहते हैं की वे  भी संवेदनशील हैं

बड़ी कामचोरी है इस देश में.............सरकारी मशीनरी ,जिस पर खरबों का बजट खर्च किया जाता है; जिसे हर पल चौकस रहना होता है वह गाफिल रहती है और विपदा के समय में हाई एलर्ट का भोंपू बजा कर कुछ समय
के लिए जगाया जाता है,एक दो दिन बाद फिर गाफिल हो जाती है.

जबान पलटने की बड़ी समस्या है इस देश में ..... एक पल के लिए सरकारी सिस्टम में खामी देखता है और
अगले पल में सिस्टम सही होने का प्रमाण देता है

वोट बैंक के दलदल के कारण हिन्दुओ को हिन्दुस्थान में ही अल्प करने का ,कम बच्चे पैदा करने का हुक्म
दे दिया जाता है और दूसरी और बांगला देशियो को पनाह दे दी जाती है.

बड़ी त्रासदी है भारत में........समाजसेवको के सामने आस्तीन तानकर सरकार तनकर खड़ी हो मुकाबला करती
है और आतंकवादियों के सामने घुटने टेक देती है, कड़े कानून बनने नहीं देती है या बनाती नहीं है .शायद मोदी जैसे नेता भी बेबस हो जाते हैं पर आतंक से लड़ने के लिए केंद्र से कड़े कानून पास नहीं करवा  पाते हैं.

बड़ा दिखावा है इस देश में..... निरीह जनता पर डंडे बरसवाते हैं और घायल होने पर कुशक क्षेम पूछने अस्पताल भी चले आते हैं. एक तरफ देश के दुश्मनों को आँख भी दिखाते हैं दूसरी तरफ शांति वार्ता जारी रखते हैं

दूम हिलाने की बिमारी है इस देश में.......देश हित की जगह पार्टी के लिए दूम हिलाते हैं, दुसरे देश के आकाओ की धुन में धुन मिलाते हैं.

बड़ा पाखण्ड है इस देश में......अन्ना को "तू" और ओसामा को "जी"

हे ! युवा शक्ति , अब तो जाग .







मंगलवार, 6 सितंबर 2011

क्या सांसद के विशेष अधिकारों में "ये" भी आता है ?

क्या सांसद के विशेष अधिकारों में "ये" भी आता है  ?

१.संसद के माइक और फर्नीचर को फेंकना तथा तोड़ना 
२.संसद में कामकाज नहीं होने देना 
३.संसद के प्रांगण में जिंदाबाद -मुर्दाबाद के नारे लगाना 
४.पैसा लेकर प्रश्न पूछना 
५.सांसदों की खरीद फ़रोख्त करना 
६.नोट से बहुमत खरीदना 
७.संसद में अनुपस्थित रहना 
८.प्रश्नकाल के दौरान खर्राटे मारना
९. संसद भवन में बैठकर समाजसेवी महानुभावो के लिए मजाकिया शब्द प्रयोग करना
१०.शून्यकाल में प्रवचन पढ़ना 
११.जनहित के कामो में संवैधानिक पेच डालकर अनावश्यक देरी करना
१२.सांसदों के वेतन भत्ते के बिल बिना चर्चा के तुरंत पास करवाना 
१३.बिना पूर्व तैयारी के गलत भाषण पढ़ देना
१४.भारतीय संस्कृति के विपरीत पाठ्यक्रम बच्चो पर थोपने की तैयारी बताना 
१५.बकाया कर का भुगतान नहीं करना
१६.सरकारी भवनों  में डेरा डाले रहना और समय पर खाली न करना
१७.राष्ट्र गीत पर बैठे रहना या मनमर्जी की मुद्रा में खड़े रहना
१८.जनता के लिए ईद का चाँद बन जाना 
१९.सांसद निधि का भी क्षेत्र के विकास के लिए खर्च न कर पाना 
२०.दागदार रहकर भी पदभार संभाले रहना 
२१.सम्बंधित विभाग की लापरवाही के बावजूद खुद को जबाबदेही से बचाना 
२२.जनता के समक्ष बार बार निवेदन बदलना 

ये सब नज़ारे भारतीय प्रजा सहती है, देखती है मगर इन्हें कर्तव्य की जगह अधिकार ही सुहाने लगते हैं .
एक -एक करके तिहाड़ जा रहे हैं शायद भविष्य में यह जेल भी विशेषाधिकार की परिभाषा में ना आ जाये.

रविवार, 4 सितंबर 2011

कडवा सत्य

कडवा सत्य

 फरवरी १९३० गांधीजी ने नमक सत्याग्रह आन्दोलन छेड़ा था ,लगभग ६०००० भारतीय 
गिरफ्तार किये गये थे .कहते हैं इतिहास अपने को पुनरावर्तन करता है .क्या इतिहास के
 बदलने या करवट लेने का समय आ गया है.

टीम अन्ना के साथ जो घटना क्रम चल रहा है यदि इसमें लाखो भारतीय भ्रष्ट राजनैतिक
  लोगो को खरी और कडवी सच्चाई कडवे शब्दों में कह दे तो क्या सभी लोगो को सजा होगी .
अगर मेरी कल्पना सच हुई तो वह दिन बहुत गौरवशाली होगा करोडो भारतीयों के लिये ,
जब लाखो भारतीय देश हित का मर्म समझ खरा सत्य दहाड़ कर बोलेंगे . 

काश ......ऐसा हो ताकि जनसेवक  अभद्रता  और  देश हित में कडवे प्रवचन के मध्य फर्क 
करना समझे 

यह सही है की झूठ बोलना पाप है,लेकिन किसी की आन मान और प्राण रक्षा के लिये झूठ
बोला जाए तो वह भी धर्म है.

यह सही है की किसी की हत्या करना जुर्म है लेकिन अगर देश के दुश्मनों का लहू जब देश का
 सपूत सेना में बहाता है तो वह हत्या भी वीरता ,शोर्य ,गौरव में बदल जाती है.

यह सही है की पूजनीय जन का आदर होना चाहिए लेकिन वह पूजनीय दुराचारी बन जाए या
 दुराचार का साथ दे तो उस पूजनीय का घोर अपमान भी नैतिक है. (श्री कृष्ण ) 
  

शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

जो भ्रष्ट व्यवस्था से टकरायेगा..वो चूर चूर हो जायेगा

जो भ्रष्ट व्यवस्था से टकरायेगा..वो चूर चूर हो जायेगा 

जब लकड़ी का गट्ठर नहीं तोड़ पाये तो युक्ति से काम ले ,उस गट्ठर को खोले और आहिस्ता -आहिस्ताएक -एक लकड़ी तोड़ते जाये .........

यही युक्ति भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ लड़ने वालो के लिए उपयोग में लायी जा रही है ......... शाबाश देश के व्यवस्थापको . बाबा रामदेव .........बेचारा बनाने पर उतारू है . केजरीवाल .........कैसे भी फिट कर देना है, किरण बेदी ...........नक़ल उतारने का दंड . प्रशांत भूषण ...........नकली और असली ,सी डी की तरह घुमाना है .

जिसकी लाट्ठी उसकी भैंस ............... यही दस्तूर है जग में.

वो जानते हैं जनता बार -बार नहीं जागती है ...........

वो जानते हैं जनता पंगा नहीं लेगी ..............

वो जानते हैं सब कुछ  उनकी मुट्ठी में है........

आइये हम चुपचाप देखने का कर्तव्य पूरा करे की अलग -अलग करके लकड़ी के गट्ठर को कैसे तोडा 
जाने वाला है.........मगर चुप रहना .........नहीं तो अँधा तुम पर कौड़े बरसायेगा .

चुप......... मौन .......शांत ............... 

गिरते मानवीय मूल्य और हम

गिरते मानवीय मूल्य और हम 

जब भी पौराणिक कथाये पढता हूँ तब अपने पूर्वजों पर गर्व होता है लेकिन जब वर्तमान में
झांकता हूँ तो गिरते मानवीय मूल्यों पर मन आहत हो जाता है .

१.दिल रोता है तब जब समाचार पत्रों में, गाँव -शहर में, दूर- नजदीक के नाते रिश्तो में भ्रूण 
-हत्या के बारे में पढता हूँ ,सुनता हूँ . गर्भस्थ प्राणी की हत्या और वह भी उनके हाथों जो
उसके सर्जक हैं .

२.दिल तडफता है तब जब निरीह बाला पर कुकर्म किये जाने की खबर पढता हूँ, सुनता हूँ.

३.आँखे नम हो जाती है तब जब वृद्ध माँ- बाप को तिरस्कृत कर घर छोड़कर वृद्धाश्रम का
रास्ता खुद की संताने  ही दिखाती है या उनसे घृणित व्यवहार किया जाता है.

४.दिल आहत होता है तब जब धर्म के ठेकेदार धर्म की आड़ में वासना का खेल खेलते हैं 
और जाहिर में सत्कर्मों के उपदेश देते हैं.

५.दिल बैठ जाता है तब जब लेखनी के धनी पारिवारिक कहानी के नाम पर सामाजिक
व्यवस्था को चुनौती  देते हैं.

६.दिल को ठेस लगती है तब जब भारतीय नारी  को स्वतंत्रता के नाम पर कामुक प्रदर्शन
 के लिए संघर्ष करते सड़कों पर देखता हूँ .

७.दिल टूट जाता है तब जब क्षणिक आवेश में धीरज खोते भारतीय को आत्महत्या करके 
जीवन लीला समाप्त  करने की बात सुनता हूँ.

८.दिल दिशा शून्य हो जाता है तब जब तीन साल से भी कम उम्र  के मासूम किताबों का 
बौझ ढ़ोते सुबह-सुबह सडको पर दीखते हैं

९. दिल चिंतित होता है तब जब सुबह से दोपहर तक इन्वेस्टमेंट और व्यापार  के नाम पर
 युवाओ को वैधानिक सट्टे पर दांव लगाते देखता हूँ, हारते देखता हूँ.

१०. दिल फट जाता है तब जब मित्रता को कलंकित करते, भगवा परिधान के तार तार
बिखेरते ,दौमुहे सांप , अग्निवेश जैसे धूर्त मित्र के बारे में सोचता हूँ.

११.दिल निराश हो जाता है जब जनता के कर के पैसों की चोरी उसके रखवाले ही करते रहते
हैं और घपलों की सुविधा रखकर नीतियों का निर्माण करते हैं।

12.गहरी टीस होती है दिल में जब एक सरकारी नौकरी के पीछे सैंकड़ों पढ़े लिखे युवाओं
की फौज को उसके पीछे भागते देखता हूँ।

13.गहरा सदमा लगता है दिल को जब न्यायाधीशों को पैसे और सिफारिश से फैसले से
न्याय को तार -तार होते पढता हूँ।

14.दिल बैठ जाता है जब नदियों को प्रदुषण युक्त करते बड़ी मछलियों के कारनामे
पढता हूँ।

15.दिल गहरे अँधेरे में डूब जाता है जब हम भारतीय नहीं बनकर अपनी पहचान जाति के
नाम से करते हैं और तुच्छ नेता अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए उनका इस्तेमाल करते
हैं।