रविवार, 4 सितंबर 2011

कडवा सत्य

कडवा सत्य

 फरवरी १९३० गांधीजी ने नमक सत्याग्रह आन्दोलन छेड़ा था ,लगभग ६०००० भारतीय 
गिरफ्तार किये गये थे .कहते हैं इतिहास अपने को पुनरावर्तन करता है .क्या इतिहास के
 बदलने या करवट लेने का समय आ गया है.

टीम अन्ना के साथ जो घटना क्रम चल रहा है यदि इसमें लाखो भारतीय भ्रष्ट राजनैतिक
  लोगो को खरी और कडवी सच्चाई कडवे शब्दों में कह दे तो क्या सभी लोगो को सजा होगी .
अगर मेरी कल्पना सच हुई तो वह दिन बहुत गौरवशाली होगा करोडो भारतीयों के लिये ,
जब लाखो भारतीय देश हित का मर्म समझ खरा सत्य दहाड़ कर बोलेंगे . 

काश ......ऐसा हो ताकि जनसेवक  अभद्रता  और  देश हित में कडवे प्रवचन के मध्य फर्क 
करना समझे 

यह सही है की झूठ बोलना पाप है,लेकिन किसी की आन मान और प्राण रक्षा के लिये झूठ
बोला जाए तो वह भी धर्म है.

यह सही है की किसी की हत्या करना जुर्म है लेकिन अगर देश के दुश्मनों का लहू जब देश का
 सपूत सेना में बहाता है तो वह हत्या भी वीरता ,शोर्य ,गौरव में बदल जाती है.

यह सही है की पूजनीय जन का आदर होना चाहिए लेकिन वह पूजनीय दुराचारी बन जाए या
 दुराचार का साथ दे तो उस पूजनीय का घोर अपमान भी नैतिक है. (श्री कृष्ण ) 
  

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