रविवार, 11 सितंबर 2011

जड़ की गहराई

जड़ की गहराई 

 दौ किसान के खेत पास पास में थे .खेत पास में होने के कारण दोस्ती भी हो गयी थी  .एक दिन पहला किसान कुछ पेड़ की रोप लेकर आया और खेत की बाड़ के पास रोपने लगा .दुसरे किसान ने देखा कि उसका मित्र कुछ रोप रहा है तो वह भी कौतुहल वश देखने के पहले मित्र के पास चला आया.उसने अपने मित्र से पूछा -"मित्र क्या रोप रहे हो?"

पहले मित्र ने कहा -"बाड़ के पास कुछ पेड़ रोपण कर देता हूँ ताकि गर्मी के मौसम में पेड़ों के निचे आराम से सुस्ता सकूँ औरपेड़ों के बड़े होने पर इनकी लकड़ी बेचकर आय भी अर्जित कर सकूँ .

दुसरे किसान को उसकी बात जँच गयी और अगले दिन वह भी पेड़ों की रोप ले आया और खुद के खेत की बाड़ के पास रोप दी .

समय -समय पर दोनों किसान मित्र अपने अपने पेड़ो की देखभाल करते रहे.कोई जानवर उन्हें नुकसान ना पहुंचाए इसलिए काँटों की बाड़ भी कर दी.साल भर बाद पहले किसान ने अपने पेड़ों की बाड़ हटा दी.अपने मित्र
को बाड़ हटाते देख दुसरे मित्र ने सलाह दी,"तुम्हे इन पेड़ों की बाड़ नहीं हटानी चाहिये,इस बाड़ के सुरक्षा कवच 
के हट जाने से कोई भी जानवर इन्हें क्षति पहुंचा सकता है."

पहला मित्र बोला -तुम्हारी बात सही है परन्तु अब ये इतने ऊँचे उठ गये हैं कि छोटे जानवर  से इन्हें कोई खतरा 
नहीं है इनके तने के विकास के लिए खुला छोड़ने पर ये हवा के दबाव ,अंधड़ और तपती गर्मी को सहने की शक्ति 
पाकर खड़े रहना सीख जायेंगे "
दूसरा किसान अपने मित्र के तर्क से असहमत था उसने अपने पेड़ों की बाड़ ज्यों की त्यों रहने दी.

कुछ दिनों बाद पहले किसान ने अपने पेड़ों को नियमित पानी देने की जगह पखवाड़े का अंतराल देना शुरू कर
दिया इस कारण से उसके पेड़ के पत्ते कुम्हलाने लगते ,जबकि दूसरा किसान मित्र अपने पेड़ों के सुरक्षा बाड़ के
साथ नियमित पानी देता रहा और इस कारण उसके पेड़ हरे-भरे दीखते थे.जब भी दोनों मित्र मिलते ,अपने
अपने पेड़ों की बात करते तो दूसरा मित्र पहले को टोकता -"मेरे पेड़ कितने हरे-भरे हैं ,तुम आलसी और लापरवाह हो.तुमने पेड़ तो लगा दिये परन्तु समय पर पानी भी नहीं देते हो.जब तुम्हारे पेड़ मुरझाने लगते हैं
तब तुम्हारी नींद उड़ती है और १५-२० दिन बाद इन्हें पानी नसीब होता है"

पहला किसान अपने मित्र की बात पर मुस्करा देता और कहता , अब मैं महीने में एक बार ही पानी दूंगा मेरे
पेड़ो में शक्ति होगी तो जीवित रहेंगे और मुरझा  के जल गये तो उखाड़ फेकुंगा ."

दूसरा किसान उसकी मुर्खता पर खिल्ली उड़ाता और अपने पेड़ों की रोज देखरेख रखता .समय अंतराल बारिस 
का मौसम आया,खूब अच्छी बरसात हुयी ,खेत पानी से भर गये.दोनों किसान बीज और हल के साथ अपने
अपने खेत पर पहुंचे . नयी फसल की बुवाई की.रोज खेत आने लगे .

पहले किसान के पेड़ भरपूर पानी पाकर हरे हो गये,उनका तना मोटा और मजबूत हो गया और दुसरे किसान 
के पेड़ भारी बारिस से सड़ गये .दूसरा किसान अपने लगाये पेड़ों की बाड़ हटा कर सड़े पेड़ो को उखाड़ कर फ़ेंक 
रहा था.पहला किसान दुसरे किसान के पास आया और बोला,- तेरी समझ में अब तो आ गया होगा की तेरे 
पेड़ क्यों नष्ट हो गये?

दूसरा किसान चुप था .अपने मित्र को चुप देख पहला किसान बोला, "तुम्हारी इन पेड़ों के प्रति अनावश्यक देखरेख से यह परिणाम हुआ .अगर तुमने इनके थोड़े ऊँचे होने पर सुरक्षा बाड़ हटा दी होती तो इनमे आंधी , तूफान सर्दी और गर्मी सहन करने की ताकत आ जाती . तेज हवा के थपेड़ों से संघर्ष कर इनका तना सुदृढ़ हो जाता .यदि  इनके बड़े होने के बाद नियमित पानी नहीं देकर कुछ अंतराल बाद देते तो ये पेड़ जिन्दा रहने के लिए संघर्ष करते ये अपनी जड़ों को जमीन की गहराई तक जाने देते और जिन्दा रहने के लिए भोजन जुटा लेते बिना संघर्ष के इन्हें भोजन और ख़ुराक देने से जड़ों ने गहराई में उतरना ही नहीं सिखा .इसका नतीजा यह 
हुआ की अनुकूल परिस्थिति में भी ये अपने को नहीं बचा पाये."

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