शनिवार, 17 सितंबर 2011

गुजराती प्रजा ,मोदी या वागेला !! 

मोदी भारतीय जनता पार्टी के साथ साथ विश्व स्तर पर गुजरात को भी मजबूत कर रहे हैं ,यह देश की प्रजा जानती है .मुझे याद है इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी का निवेदन था की जब एक बड़ा पेड़ गिरता है तो आसपास के पेड़ चपेट में आ ही जाते हैं .निर्दोष सिक्खों की निर्मम हत्याए हुयी थी उस समय .

गुजरात के २००२ के दंगे क्यों फेले ? यदि  अल्पसंख्यक आततायी रेल की बोगी को नहीं जलाते ,बहुसंख्यक हिन्दुओ को जिन्दा  नहीं जलाते तो क्या गुजरात में दंगे होते ? इस तथ्य पर सच्चे मन से चिंतन करने की हर भारतीय को आवश्यकता है 

क्या हम अपने हिन्दू होने पर गर्व महसूस करे तो इसका मतलब यह कदापि नहीं हो सकता है की हम साम्प्रदायिकता में विशवास करते हैं .इस देश के हर नागरिक को अपने अपने मजहब पर गर्व करने का हक़ है 

राम के नाम को कटघरे में खड़ा करने वाले सियासी दल के लोग किसी दल की प्रतिक्रिया में अनशन का नाटक करे ,रघुपति राघव राजाराम .....करे या कच्चे सूत की माला पहने ,गुजराती प्रजा सही और गलत का फैसला 
करने में पहले भी सक्षम थी और अब भी है .

अल्पसंख्यको के हितेषी मानने वाले सियासी दल कभी बताएँगे की अल्पसंख्यक वर्ग आज देश की मुख्यधारा 
से  क्यों नहीं झुड पाया है ?आज भी यह वर्ग शिक्षा ,रोजगार ,व्यापार,राष्ट्रीयता में पिछड़ा हुआ क्यों है ? इस वर्ग के साथ ,इस वर्ग की भावनाओं के साथ किसने खिलवाड़ किया है ? एक भारतीय वर्ग के निर्माण की जगह इस वर्ग को अल्पसंख्यक वर्ग ही क्यों बना रहने दिया गया है? 

बार -बार दंगों को याद दिलाने की राजनीती करके हम गुजराती /भारतीयों  में  कटुता मत फेलाईये .हम गुजराती विकास और अमन के साथ हैं .कोई भी सियासी दल गुजरात की प्रजा के अमन या विकास की बात करता है तो गुजरात उसके साथ है हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है की उसका नाम मोदी है या वागेला 

हमें सच्चा सद्भाव चाहिए ,गुजरात के विकास में मोदी के साथ हर कौम लगी है ,गुजरात के  विकास को अपनी प्रेरणा बनाईये . 

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