रविवार, 11 सितंबर 2011

सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक: मनसूबे क्या हैं सरकार के ?


 . सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक  के कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं
कानून-व्यवस्था का मामला राज्य सरकार का है, लेकिन इस बिल के अनुसार यदि केंद्र को ‘महसूस’ होता है तो वह सांप्रदायिक दंगों की तीव्रता के अनुसार राज्य सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप कर सकता है और उसे बर्खास्त कर सकता है.
इस प्रस्तावित विधेयक के अनुसार दंगा हमेशा ‘बहुसंख्यकों’ द्वारा ही फ़ैलाया जाता है, जबकि ‘अल्पसंख्यक’ हमेशा हिंसा का लक्ष्य होते हैं.
यदि दंगों के दौरान किसी ‘अल्पसंख्यक’ महिला से बलात्कार होता है तो इस बिल में कड़े प्रावधान हैं.
किसी विशेष समुदाय ( यानी अल्पसंख्यकों ) के खिलाफ़ ‘घृणा अभियान’ चलाना भी दंडनीय अपराध है.इसमें ( फ़ेसबुक, ट्वीटर और ब्लॉग भी शामिल है ) .
अल्पसंख्यक समुदाय के किसी सदस्य को इस कानून के तहत सजा नहीं दी जा सकती यदि उसने बहुसंख्यक समुदाय के व्यक्ति के खिलाफ़ दंगा अपराध किया है.
प्रस्तावित विधेयक में कहा गया है कि दंगा हमेशा ‘बहुसंख्यकों’ द्वारा ही फ़ैलाया जाता है, जबकि ‘अल्पसंख्यक’ हमेशा हिंसा का लक्ष्य होते हैं. ये अल्पसंख्यक किसी भी जाति-संप्रदाय के हो सकते हैं. इसे हिंदू-मुसलिम से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. अगर गुजरात में हिंदू तो कश्मीर में मुसलमान बहुसंख्यक हैं.
इसी तरह फ़ेसबुक, ट्वीटर और ब्लॉग समेत किसी भी माध्यम से ‘घृणा अभियान’ चलाने वालों को दंडित करने की बात कही गयी है. 
हां बलात्कार के मामले में संशोधन की जरूरत है.

इस देश का बहुसंख्यक दंगा फेलाता है ? कितना बड़ा झूठ है यह ? हिन्दू हमेशा वसुधेव कुटुम्बकम के सिद्धांत पर जिया है. हिन्दुस्थान और हिन्दुओ ने कभी किसी देश को जीतने और पराधीन बनाने के लिए आक्रमण नहीं किया है. विश्व इतिहास यवनों के काले कारनामों से भरा है मगर ये आर्य भूमि हमेशा शांति और मानवता के साथ रही है.यदि ये विधेयक मूल रूप में पारित होता है सबसे पहले वो लोग अपराधी होंगे जो भारतीयों को बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक में बँटा देखना चाहते हैं 
.ये छद्म धर्म निरपेक्षी मानवता का पाठ सिखाने की जगह धर्म ,जाती ,संख्या बल के नाम पर आपस में भारतीयों को लड़ाना कब छोड़ेंगे ?क्या हमारे पूर्वजों ने जबरदस्ती अपना हिन्दू धर्म दुसरे धर्मों पर थोपा है. हमने हमारी तरह इस भारत माँ के आँचल में सब धर्मों को जगह दी और अब वो लोग कुछ हिन्दू जयचंदों के साथ मिलकर बहुसंख्यक लोगों के खिलाफ उनकी संस्कृति ,हस्ती पर षड्यंत्र बना रहे हैं.
सावधान .........हमें भारतीय बनना है ना कि बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक. हम मानव बने रहना चाहते हैं ? हम एक ही परमात्मा की संताने हैं? भगवान ने हमें हिन्दू, मुस्लिम ,इसाई बना कर जन्म नहीं दिया ,उसने सिर्फ मानव बनाकर भेजा है.
चंद स्वार्थी लोगों ने हमें आपस में बांटा है. 
अगर ये राजनेता समय -कुसमय जातिगत आधार पर निवेदन न करके भारतीयों के हित के निवेदन करने लगे तो काफी हद तक साम्प्रदायिकता ख़त्म हो जायेगी . जब हमारे राष्ट्रिय राजनीती के लोग वोट बैंक का चस्मा उतार कर सभी भारतीयों को समान निगाह से देखेंगे तो सोहार्द तथा भाईचारा  स्वयमेव बनने लगेगा . 
आज देश के विकास में हर कोम लगी है. इस भारतीय बिरादरी को अलग -अलग नाम से परिभाषित मत करो . आने वाले विकसित भारत के लिए सुधर जाओ क्योंकि आप हिन्दू मुस्लिम,सिख ,पारसी ,इसाई नहीं है ,आप भी भारतीय हैं और हम सब भी भारतीय हैं.

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