रविवार, 9 अक्तूबर 2011

अन्ना सौ टंच पागल !!

 अन्ना सौ टंच पागल !!

अन्ना के पागलपन को सिद्ध करने से पहले कुछ उन भारतीय पागलो को भी याद कर लेना सामयिक रहेगा

एक पागल ने बंगाल की धरती पर अवतरण लिया और रामकृष्ण परम हंस कहलाये .उनके जीवन चरित्र 
को पढने से उनका माँ काली के प्रति अटूट भाव उनके गाढ़ पागलपन को दर्शाता है .एक ऐसा पागल  देव 
पुरुष जिससे माँ काली का अरस परस था ,इस पागल भक्त को नमन .

एक पागल मरुधरा की धरती पर पैदा हुआ था जो अपने पागलपन के कारण पत्नी पुत्र के साथ वन -वन
में भटकता रहा ,घास की रोटी भी उसके बच्चो को नसीब नहीं हो पायी थी .मेवाड़ की स्वाधीनता का वह 
पागल दीवाना था महाराणा प्रताप . अपनी जन्म भूमि से पागलपन की हद तक प्रेम करने वाले वीर के 
पागलपन को नमन .

एक पागल था पंजाब का पुत्र - जो इस देश की मिटटी का इतना बड़ा दीवाना था की उसे दिन रात इस 
मिटटी की चिंता ही सताती रहती थी .अपने देश की मिटटी से पागल यह युवा अपने जांबाज साथियों के 
साथ मौत को भी हँसते हँसते गले लगा लिया था .उस शहीद भगत सिंह के पागलपन को सलाम .

एक पागल हुआ था गुजरात में ,अधनंगा फकीर ,जिसके पागलपन ने  देशवासियों को आंदोलित कर दिया 
जिसके पागलपन का मन्त्र था - अंग्रेजों ,भारत छोडो . फिरंगी उसके पागलपन से भाग खड़े हुए थे .वो 
थे मोहन दास करम चंद गांधी .पूरा विश्व उसके पागलपन को नमन करता है आज .

अब आते हैं अन्ना के पागल पन पर .अन्ना को पागलपन की यह बिमारी १९७९ से ही लग गयी थी मगर 
इस देश के स्वार्थी नेता इसे उस समय पहचान नहीं पाए थे .सबसे पहले भारत सरकार ने इस पागल को 
 १९८६ में "वृक्ष मित्र" के रूप में पहचाना . दूसरी बार १९८९ में इस पागल को महाराष्ट्र सरकार ने चिन्हित 
किया " कृषि भूषण" देकर . मगर इस पागल बन्दे की यह बिमारी बढती ही गयी और १९९० में यह पागल 
"पदम् श्री" और १९९२ में "पदम् भूषण" से नवाजा गया मगर इस बिमारी को इन पांच सालो में हर देश 
प्रेमी ने बढ़ता पाया .अन्ना का यह पागलपन पिछले दिनों पुरे भारत में फैल गया और करोड़ों भारतीयों
ने अन्ना के पागलपन को अपने दिल में बसा लिया .यह एक पागलपन ही कहा जाएगा की ७० वर्ष का 
भारतीय कंठी माला जपने की जगह व्यवस्था परिवर्तन के जंग में कूद गया है .यह अन्ना का पागलपन 
ही है की इस अवस्था में भी १२ दिन तक महाभारत के जंग का नायक बन लड़ता रहता है .यह अन्ना का 
पागलपन ही है की हिसार की जनता  से सारहीन सिद्धांतो को तर्पण करने को कहता है .कांग्रेसी लोगो 
का आकलन सौ टंच सही है की अन्ना पागल है . अन्ना को पागलखाना जाना चाहिए .अन्ना भी कह 
चुके हैं ,निर्णय कर चुके हैं की वे पागल खाने में जायेंगे ,अन्ना का पागल खाना पूरा भारत वर्ष है और 
वे इस पागलखाने को  स्वदेश प्रेम ,सदाचरण , स्वच्छ तंत्र और सद्भाव की दवा देंगे ताकि भारत वासी 
देशप्रेम के पागलपन में बेसुध हो जाए .अन्ना के पागलपन को प्रणाम .        
      

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