रविवार, 6 नवंबर 2011

सफलता क्या है ?कैसे मिलती है ?

सफलता क्या है ?कैसे मिलती है ?

सफलता क्या है? -लक्ष्य को कदम दर कदम नजदीक पाना ही सफलता है .

सफल कौन ?- जिसने जीवन को सभी आयामों से जीकर देखा है.जिसने विद्या ,अर्थ,काम,धर्म को हासिल
करने के बाद सही सदुपयोग किया हो.

सफलता कैसे ------?

१.आत्मविश्लेषण - यदि हम प्रतिदिन सोने से पहले स्वयं का विश्लेषण करे की आज के दिन को हमने कैसे 
बिताया .यदि इस आत्मविश्लेष्ण में हमें अपनी कमजोरियां दिखाई देने लग जाए और हम हो चुकी भूलो के 
दोहराव को रोकने का पूर्ण प्रयास करते हैं तो हम सफल हो सकते हैं ,शंका की कोई जगह नहीं है.

२.गलतियाँ करते रहे -हमें नयी भूल करने पर दुखी नहीं होना चाहिए ,क्योंकि नयी गलतियां हमारी मार्ग-
दर्शक होती है.जो हमें बहुआयामी व्यक्तित्व प्रदान करती है इसलिए नयी भूल करते रहना है परन्तु पुरानी 
भूलो का दोहराव रुकना चाहिए 

३.सोच समझ कर करे-हम अतिउत्साह में प्राय: बुद्धि का उपयोग करना भूल जाते हैं और जल्दबाजी में काम 
को अंजाम तक पहुचाना चाहते हैं परन्तु ऐसा प्रयास सफल नहीं होता है .किसी भी काम को हाथ में लेने से 
पहले विचार करे,अपना बल या ताकत को तौले, अगर सामर्थ्य में हो तो कार्य का शुभारम्भ करे .जल्दबाजी 
से बचे .

४.सकारात्मक सोच- जिस काम को  हम पूरा करने का संकल्प लेते है उस समय हमारा मन संशय में ना
 पड़ा हो ,हम आशावान रहे ,हमारे शब्द नकारात्मक नहीं होने पाए ,हमारे हाव-भाव से उत्साह छलकता रहे .

५.अवचेतन मन को आदेश करे -जब भी किसी काम को करने का हम संकल्प लेते हैं तब हमारा जाग्रत मन 
तो हमारे वश में रहता है परन्तु अवचेतन मन को यदि हम आदेश करना भूल जाते हैं तो हमें सफलता प्राप्ति 
में ज्यादा समय लगता है .ज्यादा अच्छा यह है की हम अपने अर्ध जाग्रत मन को कम से कम तीन बार अपने 
संकल्प को पूरा करने का आदेश दे ताकि संकल्प को सिद्ध करने में आपका अवचेतन मन भी पूर्ण सहयोग 
कर सके.

६.सर्वसम्मति बनाने का प्रयास करे- संकल्प को पूरा करने के लिए अकेले ही विचार कभी नहीं करे ,कम से 
कम एक साथी के साथ तो विचार विमर्श जरुर करे .यदि काम टीम वर्क का है तो हमें अपना संकल्प और 
योजना सुस्पष्ट और पारदर्शी रखनी चाहिए ताकि किसी को गलत संदेह ना हो.

.ढोल ना पीटे - जब तक आपका काम पूर्णता के करीब नहीं पहुंचता है तब तक आपकी योजना गुप्त रहे 
आपका संकल्प लोगो तक नहीं फेले .हमें काम शुरू करने से पहले अपनी बढ़ाई खुद के मुंह से नहीं करनी 
चाहिए या हम जो करने का संकल्प ले चुके हैं उसके बारे में शेखी नहीं मारनी चाहिए ताकि विपरीत परिणाम 
भी मिल जाए तो आप बेमतलब की आलोचना से बच सके.

८.आत्मानुशासन बनाए-हर सफलता के लिए जरुरी है हमारा कार्य की महत्ता के अनुसार हमारा आत्म अनुशासन .यदि लक्ष्य बड़ा है तो उसके लिए धीर गंभीरता भी उतनी ही बड़ी चाहिए .

९.समय की पाबंदी -लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समय की पाबंदी का बहुत महत्व रहता है ,हमारी टायमिंग 
सही होनी चाहिए और तय समय में हाथ में लिए काम को पूरा करने का भरपूर प्रयास करना चाहिए 

१०.लक्ष्य पर नजर- जिस भी संकल्प को हम पूरा करना चाहते हैं और जब तक काम की प्रोसेस चालू 
रहती है तब तक हमें अपने लक्ष्य को याद करते रहना चाहिए ,ऐसा नहीं हो की लोग हमें दूसरी बातों में 
उलझा दे और समय बीत जाए .

११.परमात्मा पर आस्था -आपके काम को परिणाम तक पहुचाने के लिए ईश्वर से प्राथना करे ,सृष्टि-कर्ता
पर पूर्ण विशवास रखे .यदि परिणाम विपरीत भी प्राप्त हो जाए तो भी ईश्वर का पुन:प्रयास करने का निर्णय 
मानकर फिर से लाश्य प्राप्ति के मार्ग पर खड़े हो जाए .

हम यदि इन साधारण नियमो का ईमानदारी से पालन करेगे तो मंजिल मिलती ही है.            

3 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।">चर्चा

चन्दन भारत ने कहा…

बहुत हि सुन्दर रचना!
आशा है सभी लोग इसे पढकर अपने जीवन में अवश्य सफलता को प्राप्त करेंगे|