मंगलवार, 22 नवंबर 2011

...उम्मीदवार चाहिये (विज्ञापन )

....  उम्मीदवार  चाहिये (विज्ञापन )


चाहिये चुनावों के समय मतदारो से वोट दिला सकने वाले उम्मीदवार !! ना -ना चौंकिये मत !आजकल
हर चीज की मार्केटींग हो रही है ,यह काम भी अच्छी प्रोफेशनल एजेंसी को सौंप देने जैसा है .इस काम
का भविष्य भारत जैसे देश में चमकीला हो सकता है ,काफी संभावनाओं से भरा नया क्षेत्र है ,इसका
कारण भी है क्योंकि---------------

 इस देश में भ्रष्ट ,कामचोर नेताओं की बाढ़ आ रही है ,उनकी छवी बढ़िया क्रीम -मक्खन लगाने के बाद
 भी नाजुक होती जा रही है ,अब नाजुक दागदार छवी वाले उम्मीदवार वोट लेने में कारगार साबित नहीं
हो रहे हैं और नए मलाईदार उम्मीदवारों का भी राजनैतिक पार्टियों में टोटा है जो भी उम्मीदवार नए
मिलते हैं वे दांव पेच नहीं जानते और ऐसे अनाड़ी उम्मीदवार चुनाव जीत नहीं पायेंगे क्योंकि ज्यादातर (सज्जन) भोले किस्म के मिलते हैं.

     नए व्यक्ति  को झूठ बोलने में पारंगत करने के लिए भी काफी समय लग जाता है और मुश्किल
से ५-७% ही लोग सफल होते हैं क्योंकि झूठ भी सलीके से बोला जाता है और भोले नागरिक या तो झूठ
बोलते नहीं या फिर बोलना जानते ही नहीं ,ऐसे में बड़ी मुश्किल हो जाती है की चुनाव में किस व्यक्ति को
उम्मीदवार बनाया जाए.

   ज्यादातर पार्टियों ने दूरगामी परिणाम को ध्यान में रखे बिना ही भूतकाल में ऐसे  उम्मीदवारों का चयन
कर लिया था ,वे लोग अनाड़ी की तरह जनता के धन पर इस तरह उतावल में झपटे कि अब दागी हो गये.
धन को पचाना और वह भी जनता के धन को ,बहुत ही भेजाबाज शातिर का काम है .ऐसे काम किसी सेवा
 भावी इंसान के बूते के बाहर होता है

     हर व्यक्ति कि अपनी विशिष्टता होती है और चुनाव जीत सके ऐसा व्यक्ति भी विशिष्ट गुणों से युक्त होना
चाहिये .उसकी बोलने कि शैली में शहद सी मिठास हो ,उसकी आँखों में धूर्तता दिखाई ना दे ,नए नए
आश्वासन देने में माहिर हो ,रिश्वत लेने के तरीके में परिवर्तन शीलता हो ,नवीनता का सृजन कर नए
तरीके इजाद करने वाला हो

      नयी योजनाओं के उदघाटन ,शिलारोपण जैसे तरीके पुराने होते जा रहे हैं .लोग जानने लग गये हैं कि
ये सब बढ़िया ढकोसले के सिवाय कुछ नहीं है ,इन परम्परागत तरीको से मतदाता को गाफिल करना
मुश्किल होता जा रहा है .वोट लेने के नए नुस्खे पैदा करने वाले बाजीगर ही आज कि आवश्यकता बन
गये हैं .नए सपनो को जनता के मन में उतार देने वाले सृजक ही कुछ करामात दिखा सकते हैं .

     नए उम्मीदवार कि साख हो ,जैसे बगुला महाराज माला जपने का स्वांग बहुत निपुणता के साथ करते
हैं और मछली गटक कर पुन: शांत अवस्था में आ जाते हैं ,ठीक ऐसे ही साख वाले लोग मिल जाए जो
संत जैसे स्वांग में बिना चबाये माल गटक सके और मिलझुल कर बाँट खा सके .

       

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