शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

अब चोर जमात है खतरे में

अब चोर जमात है खतरे में


ये इन्कलाब के नारे ,
ये बगावत के नारे, 
अब सहन नहीं होंगे;
क्योंकि-
यह जेहाद फैलाते है, 
सोये हुए को जगाते है, 
कायरों में जान फूंकते है. 
इसी इन्कलाब ने- 
फिरंगियों को खदेड़ा था, 
भारतीयों को जोड़ा था, 
आपातकाल को मरोड़ा था,
आज यही इन्कलाब- 
बच्चे,बुड्ढे,युवा,सब के खून में उबल रहा है; 
सच्चाई का गरमागरम लावा उगल रहा है; 
अधिकारों को पाने का संग्राम सिखा रहा है; 
चुने हुए शातिरों पर सीधी अंगुली तान रहा है.
यह बुझने वाला दीया-
पल-पल नयी मशाल जला रहा है.
यह बुझने वाला दीया 
पल-पल नयी जोत फैला रहा है.
टिमटिमाते दीये पर, 
आंधी बन कर टूट पड़ो.
मुट्ठी बनते हाथों पर, 
 कहर बन कर फूट पड़ो.
अभिव्यक्ति की आजादी पर, 
सीधा-सीधा वार करो .
अधिकार मांगनेवालो पर, 
मुक्का बन कर बरस पड़ो.   
सख्त लोकपाल के आने पर, 
हर दल का पग है दलदल में .      
भूलो अपने मतभेदों को 
अब चोर जमात है खतरे में






कोई टिप्पणी नहीं: