रविवार, 1 जनवरी 2012

सफल जीवन पद्धति का निर्माण- तुलसी की "मानस"से

सफल जीवन पद्धति का निर्माण- तुलसी की "मानस"से  


तुलसी की मानस में सिर्फ आध्यात्म ही नहीं है ,इसमें सफल जीवन पद्धति के सिद्धांत छिपे हैं.हम
अपने धर्म ग्रंथो के मर्म को समझे बिना टीका या आलोचना कर देते हैं,यह सही नहीं है.तुलसी की
मानस में शरुआत में ही सफल जीवन पर चर्चा आ जाती है .


"भवानीशंकरो वन्दे श्रद्धाविश्वासरुपिणौ"

श्रद्धा और विश्वास ये शब्द जीवन सिद्धांत हैं .हम जब भी समझने योग्य हो जाते हैं यानी पांच वर्ष से
ऊपर की आयु के हो जाते हैं तब से ये सिद्धांत हमारे जीवन पर प्रभाव छोड़ना शुरू कर देते हैंऔर
मृत्युपर्यंत हमारे जीवन पथ बने रहते हैं .

बचपन में हम KG क्लास से विद्या अध्ययन शुरू करते हैं तब हमें अंक या शब्द क्या होते हैं इसकी
समझ नहीं होती है ,माँ या गुरु के साथ रह कर हम अंक या शब्द सीखने की कोशिश करते हैं मगर
हम सीखते हैं अपने ऊपर विश्वास और अक्षर पर श्रद्धा रख कर ही .अपने कर्म के ऊपर प्रबल श्रद्धा हो
और खुद पर अडिग विश्वास हो तो नवसृजन संभव हो जाता है .दुनिया में आज तक जितने भी प्रयोग
हुए हैं चाहे वे सामाजिक परिवर्तन हो,आर्थिक ,राजनैतिक या वैज्ञानिक ;सभी परिवर्तन के लिये
परिवर्तन कर्ता में ये दोनों गुण अवश्यम्भावी होते ही हैं .इन गुणों के बिना कुछ भी संभव नहीं है .कथा
में राम को भगवान् नहीं मानकर समझने के लिए कुछ समय के लिए पात्र समझ ले तो तुलसी के इस
पात्र में ये दोनों गुण कूट-कूट कर भरे थे ,चाहे वे यज्ञ रक्षा का कर्म करते हैं या धनुष भंग का या रावण
वध का .कहने का तात्पर्य यही है की हमारे जीवन में ये गुण अति आवश्यक हैं इन गुणों के बिना
 हमारा जीवन कुछ महत्व का नहीं है .कोई भी महापुरुष की जीवनी पढ़िये  चाहे विश्व के किसी भी देश
से हो हमें उनके जीवन में ये दोनों गुण प्रबलता से काम करते दिखेंगे .

तुलसी अगले ही श्लोक में ज्ञान यानि बोध की वंदना करते हैं .हम जब तक अज्ञान में रहते हैं तब
 हमारी परख की क्षमता काफी कम होती है .हमारे में ज्ञान की कमी के कारण अपने पर विश्वास
 नहीं होता है और आत्मविश्वास की कमी को पूरा करना है तो जिस भी क्षेत्र में कार्यरत हैं मगर
 उसका पूरा ज्ञान होना ही चाहिए उसके बिना अधकचरा ज्ञान सब क्षेत्र में हमें असफलता देता है.

तुलसी का अगला श्लोक कहता है - वन्दे विशुद्धविज्ञानौ .................

जब हमें किसी भी विषय का ज्ञान हो जाता है तो उसे यूँ ही मान नहीं ले.हमारा ज्ञान विशुद्ध विज्ञान
सम्मत होना चाहिए .तुलसी चाहते हैं की व्यक्ति अपने ज्ञान को खूब जांचे,परखे और हर काल पर
उसका परिक्षण करे .कोई भी तथ्य सिद्धांत का रूप तभी धारण करता है जब वह हर काल में सही
हो .तुलसी के अनुसार विशुद्ध विज्ञान ही धर्म है बाकी सब आडम्बर .

जो लोग तुलसी की यह कह कर निंदा करते हैं की तुलसी नारी जीवन को हेय या ताड़ना के योग्य
समझते थे वे उसे गलत व्याख्या के रूप में लेते है .तुलसी फिर अगले श्लोक में कहते हैं कि नारी
उत्पति,स्थिति और संहार करने वाली शक्ति से संचित है ,सम्पूर्ण कल्याण उसके ही कारण से होते हैं.

तुलसी अगले सोरठे में मनुष्य जीवन में बुद्धि के महत्व को प्रणाम करते हैं ,हमारे में सुबुद्धि और
कुबुद्धि दोनों ही सदैव रहती है ,तुलसी कहते हैं कि सुबुद्धि से सभी कार्य सिद्ध हो जाते है इसीलिए
तुलसी ने बुद्धि को विनायक कहा है .हम जब भी किसी भी कार्य को शुरू करते हैं तब आम भाषा में
कहते हैं कि काम का श्री गणेश हो जाये.श्री गणेश से तात्पर्य जब भी काम कि शुरुआत करनी हो
उसके पहले श्रद्धा ,विश्वास,कार्य के होने कि प्रणाली का सम्पूर्ण ज्ञान ,उस ज्ञान को विशुद्ध रूप से
परख ले और फिर काम को बुद्धिमानी से शुरू करे .किसी भी काम कि सफलता के ये आवश्यक
तत्व हैं ,इनके बिना कार्य पूर्ण रूप से सफल नहीं होता है.

खुद तुलसी ने जब इस महाग्रंथ की रचना शुरू की तब उनके अन्दर खुद पर कितना विशवास रहा
होगा कितनी श्रद्धा रही होगी अपने कर्म पर .तुलसी ने ज्ञान को विज्ञान सम्मत करके ही इस ग्रन्थ
की रचना की होगी .क्या तुलसी को इस ग्रन्थ को लिखने से पहले यह आभास हो गया था की उनका
ग्रन्थ विश्व विख्यात महाकाव्य बनकर करोडो लोगो का उपकार करेगा .इसका उत्तर है "हाँ "
क्यों ? क्योंकि जिस व्यक्ति में अपने आप पर प्रबल आत्मविश्वास हो ,उसके कर्म पर उसे पूर्ण श्रद्धा हो ,
उसका ज्ञान सम्पूर्ण और तर्क तथा विज्ञान सम्मत हो :कार्य करने से पहले सुबुद्धि का उपयोग किया 
गया हो तो वह काम सफल ही होता है इसमें किंचित मात्र भी संदेह नहीं किया जा सकता है.


हम भी अपने कर्म के प्रति श्रद्धा रखे ,अपने पर प्रबल विश्वास रखे,विषय की तह तक अपने ज्ञान को
ले जाये,विज्ञान सम्मत तरीके से काम करे और काम का उद्देश्य खुद के भले के साथ लोक हित भी हो
कार्य स्वत:सिद्ध हो जाता है.

आइये हम मानस आधारित जीवन सिद्धांतो को अपनाए और नव वर्ष तथा जीवन को सफलता से
जिये और सफल बने .        
          

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