गुरुवार, 19 जनवरी 2012

हाथी

हाथी 

एक भारतीय चीनी पर्यटक से पूछता है - आपको हमारा ताज और नबाबो की नगरी कैसी लगी ?
चीनी-    विस्मय जनक !
भारतीय- कैसे ?
चीनी -इस ठण्ड के मौसम में आम भारतीय बिना गरम कपडे के ठिठुर रहा है और मोटी मोटी
मूर्तियों को मोटे कपड़ो से ढक के रखा है .वाह !भारतीयों की विचित्र सोच .........


जंगल के बिल्ली कुत्ते खरगोश इकट्टे होकर हाथी दादा के पास गए और बोले -दादा इस बार 
ठण्ड ज्यादा है ,आप भाई बंधुओ समेत आगरा जाकर आ जाये ताकि वापिस आने पर हमारे 
लिए भी गरम कम्बल ले आये 
हाथी ने पूछा - क्या आगरा में गरम कम्बल मुफ्त मिलते हैं ?
जानवर बोले -नहीं दादा ,वहां आपकी मूर्तियों पर आयोग मेहरबान है .....
हाथी ने पूछा -वो कैसे ?
जानवर बोले -दादा,आपकी मूर्तियों को ठण्ड नहीं लगे इसलिए मोटे कपड़ो से ढका जा रहा है 
आप सब वहां जायेंगे तो आपको भी गरम कम्बल से ढक देंगे और वापिस जंगल में आने पर 
हम सबको गरम कम्बल दे देना ताकि सर्दी में आराम आ जाये  .

एक हिंदी के शिक्षक लखनऊ में घूम रहे थे .चोराहों- पार्को में लगी हाथियों की ढकी हुयी मूर्तियों 
को गौर से देख रहे थे .थोड़ी देर बाद वे एक स्कुल में पहुंचे और छात्रो से पूछा -'अ' और बड़ी "ई"की 
मात्रा में क्या अंतर है ?
एक छात्र बोला-गुरूजी ,"अ" की मात्रा नंगी है और "ई" की मात्रा ढकी हुयी है !
गुरूजी बोले -मतलब ...?
छात्र बोला -गुरूजी -"हाथ" में नंगापन है और हाथी में ढकापन है.


बहन चिल्लाई -हाथी को ढका पर हाथ को क्यों नहीं ?
भैया बोला - हाथ में लकीरे हैं और वो भी अल्पसंख्यक है,  कहीं लकीरे नाराज नहीं हो जाये.इसलिए 
हाथ को नहीं ढका.
बहन-.फिर हाथी को क्यों ढका ?
भैया - हाथी फिर से हाथ की लकीर ना मिटा दे ..........            

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