मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

केजरीवाल ! चुप भी करो भाई.....क्योंकि यह सच्चाई नग्न है !!

केजरीवाल ! चुप भी करो भाई.....क्योंकि यह सच्चाई नग्न है  !!

संविधान ने  भारत के हर नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी दी यह सही है मगर आम नागरिक
यदि चुने हुए नेता के खिलाफ कडवा सत्य बोलता है और उनकी  पाप की गठरी को बीच सड़क पर
खुला करता है तो उसके विरुद्ध  विशेषाधिकार हनन का मामला ठोक-पीट कर बनाना ही चाहिये .

आप कडवा सच कहने के अपराधी हैं केजरीवाल सा'ब ! आप जानते हैं की चुनाव जीतना भारत में
बाहुबलियों के लिए कठिन काम नहीं है .इस देश में वोट झूठे वादों के नाम पर ,संविधान के विरुद्ध
नया कानून बनाने की बात कह कर ,अल्पसंख्यको की कुहनी पर गु ड़ लगाकर,विकास की परछाई
दिखा कर ,बूथ केप्चर करके,बाहुबल पर भी चुनाव जीता जाता है और ये आपराधिक प्रवृति के लोग
जनता द्वारा चुनकर आये हैं ,चुने हुए लोगों के पास खुद की ताकत और बहुमत पर नाचते शक्तिशाली
झूठ की भी ताकत है और आप तो कमल से कोमल हैं, अरविन्द हैं ,आपके मुंह से कडवी सच्ची बातें
अच्छी नहीं लगती है और सा'ब ये सतयुग भी नहीं है .इस युग में झूठ बोलना पुण्य हो गया है .अगर
आपने थोड़ी चमचागिरी सीख ली होती तो आप भी संसद के अन्दर होते मगर अफसोस...  !

आपकी जबान प्रेक्टिकल नहीं है .अरे.. !क्या जरुरत है ढोल पीट पीट कर सच  बोलने की .अन्दर ही
अन्दर नस पकड़ कर मरोड़ते तो आप रुआब से रहते मगर ये सच बोलने वाली जबान का क्या किया
जाए ...संसद के अन्दर बैठकर "काम" की ब्लू फ़िल्म देखने पर भी आपको एतराज है ...संसद में
बैठकर विधेयक की प्रतियां फाड़ने पर भी आपको एतराज है ...संसद के माइक और कुर्सियां तोड़ने
पर भी आपको एतराज है .आखिर आपका चिंतन ही कहीं नेगेटिव तो नहीं हो गया है .ये चुने हुए लोग
हैं इनकी अपनी भी गरिमा है और उसके अनुरूप ये कुछ मनोरंजन कर लेते हैं तो क्या बिगड़ जाता
है करोडो लोगों का .जब भगवान्  के मंदिर में औरतों के साथ धक्का मुक्की की जा सकती है तो फिर
संसद के मंदिर में शांति से बैठकर मस्त कैबरे डांस क्यों नहीं देखा जा सकता .आप किस युग के
प्राणी हैं ?अरे सा'ब ,युग परिवर्तन का समय है ,कुछ जोड़ तोड़ को समझो ,झूठ बोलना एक आर्ट है
इस कला से और मक्खन लगाने से आप भी बड़े ओहदे पर जा सकते थे मगर आप ठहरे फिस्सडी
जब भी उगलते हैं सच ही उगलते हैं और कोलावरी फेलाते हैं .

आप नेताओ की नाक में दम कर देते हैं ,क्या जरुरत है सा'ब ये सब करने की .आप और अन्ना
जगे हुए लोगों को जगाना चाहते हैं! हम जबान वाले गूंगे भारतीय हैं ,हम सुई की आवाज को भी
सुनने वाले बहरे हैं .हम सत्य को देख कर आँखे बंद कर लेते हैं .हम सहन करने वाले लोग हैं
हम अत्याचार ,अनाचार ,दुराचार सब सहन कर लेते हैं और जिन्दगी जी लेते हैं मगर आप हैं कि
रुकने का नाम नहीं लेते ....कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ तो कभी कालेधन के खिलाफ कभी अन्याय
के खिलाफ तो कभी लुटरे लोगों के खिलाफ कुछ ना कुछ खुरापात चालु रखते हैं .आप बागी हैं
और बागी लोग इस स्व + तंत्र  वाले भारत में मसल कर रख दिए जाते हैं .देखना आपकी ये जबान
आपको विशेषाधिकार हनन में ना फंसा दे या आप पर राष्ट्र द्रोह का मामला ना चलवा दे .

 'इस संसद में ऐसे 15 सांसद हैं जिन पर हत्या करने के आरोप हैं, 23 ऐसे सांसद हैं जिन
पर हत्याके प्रयास के आरोप है, 11 सांसदों के खिलाफ धारा 420 के तहत धोखाधड़ी करने 
और 13 के विरुद्ध अपहरण के मामले दर्ज हैं.'' ये सब विशेषण हैं सा'ब .विशेष योग्यता रखने वाले
सांसद हैं हमारे .आपको इनकी लिस्ट बनाने की कहाँ जरुरत थी .अरे !सा'ब ये सब तो अब आदरणीय
हैं इनके पदचिन्हों पर चलकर देश की राजधानी के कुछ युवा जेल रूपी सुसराल में पहुँच गए हैं .

हमें संसद और इन सांसदों पर भरोसा होना चाहिए .हम लोकतंत्र में जीते हैं .हमें अपने पूज्य सांसदों
पर गर्व होना चाहिए .इनके कर्म कैसे भी हो हमें चुप बेठना चाहिए .इनका अपमान भारत के संविधान
का अपमान है .इनका चरित्र राष्ट्र के निर्माण में सहायक बनेगा ,देश उन्नति करेगा चाहे दिशा कोई सी
भी हो .इसलिए केजरीवाल सा'ब आप भी पवित्र संसद की गरिमा के लिए अपवित्र सांसदों के कर्मो
पर अंगुली मत उठाईये .

अगर अब भी आप अपनी बात पर डटे रहेंगे तो हम आपको अड़ियल कहेंगे और आपके 
अड़ियलपन पर गर्व करेंगें .               

सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

चोर सांसद को चोर कहने से लोकतंत्र कमजोर होता है तो ऐसा कमजोर लोकतंत्र मंजूर है

चोर सांसद को चोर कहने से लोकतंत्र कमजोर होता है तो ऐसा कमजोर लोकतंत्र मंजूर है 


टीम अन्ना के सदस्य अरविन्द केजरीवाल ने गाजियाबाद में शनिवार को जो बयान दिया था उसमें खरी
सच्चाई है .पूरा देश जानता है की वर्तमान में संसद के मंदिर में १६३ सांसदों के खिलाफ जघन्य अपराध
 के मामले चल रहे हैं.

       नेताजी को अपना गुनाह भी पुण्य लगता है !जो नेता खुद के गुनाह को गुनाह कबूल करते हैं वे तो
वास्तव में वे जनसेवक हैं क्योंकि उनमे छोटी सी उम्मीद की किरण दिखाई देती है की वे खुद को सुधारने
के लिए प्रयत्न करेंगे और उनको तो टीम अन्ना के सदस्य केजरीवाल या देशवासी गाली नहीं दे रहे हैं
मगर यदि स्वच्छ छवि के जनसेवक को गुनाहगार सांसदों को दी हुई कडवी सच्ची बात बुरी लगती है तो
फिर वो लोग भी स्वच्छ जनसेवक कैसे हुए ? हमारे लोकतंत्र की यह कमजोरी है की हमारा कानून  चुनाव
में उम्मीदवार के रूप में नामांकन पत्र भरने की अनुमति आपराधिक लोगों को  दे देता है.

     अपराधी लोग आज तो १६३ हैं यदि ये बहुमत में आ जाए तो संसद कैसी होगी ?कैसे कानून  बनेंगे?
क्या अपराधी लोग जनहित की बात सोचेंगे ?

     सवाल यह उठता है की ऐसे लोगों को चुनता कौन है और क्यों चुन कर भेजता है ?

हमारे देश में शिक्षा का अभाव ,जातिगत समीकरण,धन से वोटो की खरीद ,मतदान के प्रति अनुत्साह,
बाहुबल ,मतदान केन्द्रों पर कब्जा आदि कारण हैं जिनके कारण अपराधी तत्व सांसद और विधायक
बन जाते हैं .

किसी अपराधी के  सांसद या विधायक चुन लिए जाने मात्र से  क्या उसका अपराध ख़त्म हो जाता है ?
क्या कुकर्मी भगवा वस्त्र पहन लेने या हज कर आने से पवित्र हो जाता है ? क्या अपराधी सांसद
या विधायक संसद की गरिमा को बढाते हैं ? क्या किसी अपराधी ने साम ,दाम ,दंड या भेद किसी भी
कारण से चुनाव जीत लिया है तो जनता उसके दोषों को नजर अंदाज कर दे ?

केजरीवाल ने कोई गप्प नहीं लगाई है या किसी को भ्रमित नहीं किया है उन्होंने तो उस जनता को
जागरूक करने का प्रयास किया है कि यदि जनता सोच समझ कर फैसला नहीं करती है और मत
का सोच समझ कर उपयोग नहीं करती है तो लोकतंत्र के बुरे परिणाम भी भुगतने के लिए उसे तैयार
रहना पडेगा .

      करोडो -अरबों कि राशि का गबन करने वाले सांसदों कि जय जयकार या वाहवाही क्यों चाहते हैं
आज के जनसेवक ? क्यों बुरे सांसदों को बुरा कहने पर भड़कते हैं सफेद कॉलर नेता ? यदि वो लोग
देश और देश के संविधान के प्रति वफादार हैं तो बुरे को बुरा कहने मात्र से क्यों मिर्ची लग जाती है?
क्यों आपराधिक सांसदों के प्रति सहानुभूति रखते हैं स्वच्छ छवि रखने वाले सांसद?

   सभी दल के नेता क्यों टिकिट देते हैं आपराधिक छवि वाले लोगों को ? सभी दल बाहुबलियों को
टिकिट देते हैं ,सभी दलों के नेता उन अपराधियों को चुनने के लिए जनता के दरवाजे पर दस्तक देते
फिरते हैं और यही कारण है कि केजरीवाल जैसे देशवासीयों को गाली देने के लिए आज सभी दल
उतारू हैं.

   चोर सांसद को चोर कहने से ,हत्यारे सांसद को हत्यारा कहने से ,बलात्कारी सांसद को बलात्कारी
कहने से यदि लोकतंत्र कमजोर होता है तो ऐसा लोकतंत्र ही क्या काम का ? मीडिया को चाहिए कि
वो भी राष्ट्र धर्म का पालन करते हुए केजरीवाल जैसे लोगो के पक्ष में माहोल बनाए क्योंकि आज
मिडिया की ताकत से अनेको राज पर्दाफाश हुए हैं और अपराधी विधायक ,सांसद जेल कि हवा खा
रहे हैं .    
     

रविवार, 12 फ़रवरी 2012

आप क्या बोल रहे हैं

आप क्या बोल रहे हैं 
१.बाटला कांड के एंकाउन्टर पर सोनिया उत्पादियों के लिए रोई,देश के दुश्मनों के लिए रोई,
क्योंकि वो ......................

२.OBC कोटे से मुस्लिमों को ९% आरक्षण दिलाएंगे ..........

३.उत्तर प्रदेश के लोग भिखारी बन गए हैं जो दुसरे प्रदेशो में रोजी रोटी कमाने जाते हैं ...

४.भंवरी काण्ड में फंसे लोग अश्लील विडियो क्लिप पर नैतिकता के बयान दे रहे हैं 

५.संवेधानिक आयोग का चुनौती दे रहे हैं .......

क्या ऐसे लोग भारतीयों पर शासन करने के योग्य हैं? 

शनिवार, 11 फ़रवरी 2012

व्यथा पत्र-


व्यथा पत्र-
शहीद इन्स्पेक्टर मोहन शर्मा.., 
आपके जज्बे को हम करोडो देशप्रेमी भारतीय सलाम करते हैं .
आपने २००८ में इन्डियन मुजाहिदीन के आतंकवादियों से मुठभेड़ की और वीरगति को प्राप्त हो गये.
आप जैसे जाबांजो के कारण माँ भारती अपनी शान बनाए रख पाती है .............लेकिन माँ भारती की
शान को कम करते हैं हमारे ही देश के कु-नेता. वो भी रोते हैं उनकी नेता भी फुट-फुटकर रोती है मगर 
आपके लिए नहीं शहीद मोहन चंद शर्मा, क्योंकि आपके लिए रोने से उन्हें सत्ता नहीं मिल पाती वो तो
देश के दुश्मनोंके लिए रोते हैं, माँ भारती की अस्मिता से खिलवाड़ करने वाले गद्दारों की मौत पर मातम
मनाते हैं.ये तथाकथित सेक्युलर दरिन्दे जो बड़ी शान से कहते हैं की आतंकवादी तो आतंवादी होता है
उसकी कोई जाती नहीं होती,उसका कोई धर्म नहीं होता, मगर.........ये सब कहने के लिए है असलियत
में ये लोग ही सबसे बड़े सांप्रदायिक हैं.ये लोग मानवता की पूजा नहीं करते,ये लोग आतंक फैलाने वालो 
का पक्ष लेते हैं, इस देश में आप जैसे बहादुर इन्स्पेक्टर के लिए सिर्फ जांच आयोग बनाया जाता है की
आपने वोट बैंक पर हाथ क्यों डाला? राष्ट्र रक्षा की बातें इनके लिए कोई मायने नहीं रखती.  
..........आतंकवादी को मुस्लिम ,हिन्दू या इसाई मानने वाले नेता हम सभी को बरगलाते हैं.मजहब नहीं 
सिखाता आपस में बैर करना. मगर संकीर्ण सोच के नेता सिखाते हैं की अमन चैन को नष्ट करने वाला 
भी जाती रखता है. देश की शांति को नष्ट करने वालो की पूजा करते हैं वोट के लालची नेता .देश में 
निर्दोष लोगो का खून बहाने वाले की लाश के पास बैठकर मातम मनाने वाले दरिन्दे पुरे अवाम को गलत
सन्देश देते हैं, उनके हाथों में फूल हैं मगर वे फूल तेरे लिए नहीं है शहीद ! वे फूल लेकर उन कब्रों की
और जा रहे हैं जहाँ देश के दुश्मनों को आपने चिर निद्रा में सुलाया था.
इनके होसले भी देखो शहीद ! दिन दहाड़े गर्व से खड़े होकर देश द्रोह की बाते कह जाते हैं और आप जैसे 
शहीदों पर कीचड़ उछाल जाते हैं क्योंकि ये जो कुछ भी बयान करते हैं उसे कानून सम्मत ही मानते हैं.
इन्हें आप जैसे बहादुर सपूतों की विधवाओं पर दया नहीं है ,रहम नहीं है इन्हें रहम है देश द्रोहियों की 
लाशो से .इनके पास आपकी वीरता को बखान करने के लिए शब्द नहीं है मगर इनके पास दुआओं का 
अम्बार है देश में आतंक मचाने वाले दरिंदो के लिए .
मगर व्यथित मत होना शहीद ये सब सुनकर क्योंकि इन ढोंगी लोगो के पाप का घड़ा भी एक दिन 
फूटेगा .हम भारतीय तुम्हारे बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे. तुम करोडो भारतीयों के गर्व का कारण 
हो ,आपका बलिदान हमें सदैव यह सन्देश देता रहेगा की हम जागरूक रहकर ,अपने मत का प्रयोग 
करके गिरगिट नेताओ को उनकी सही जगह बता देंगे .
                                     जय-हिंद        
                      शहीद इन्स्पेक्टर मोहन शर्मा (परिचय)
वर्ष 2008 में दिल्ली के जामिया नगर इलाक़े में दिल्ली पुलिस के साथ मुठभेड़ में आतिफ़ अमीन और
मोहम्मद साजिद मारे गए थे, जबकि मोहम्मद सैफ़ और जीशान को गिरफ़्तार कर लिया गयाथा.
दिल्ली पुलिस इन्हें इंडियन मुजाहिदीन का सदस्य मानती है. आतिफ़ अमीन और मोहम्मद साजिद 
आज़मगढ़ के रहने वाले थे. इस मुठभेड़ में दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा भी मारे
गए थे.

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2012

आतंकवादियों के लिए आंसू बहाते नेता


जो लोग देश के साथ गद्दारी करते हैं ,देश में उत्पात मचाते हैं ,आतंकवाद फैलाते हैं ,उनके लिए 
कांग्रेस अध्यक्ष रोती है ,जो जवान देश के दुश्मनों से अपनी जान की बाजी लगाकर संघर्ष करते 
हैं उनको लिए जांच बैठा दी जाती है ...कैसी राजनीती हो गयी है ...क्या करोडो हिन्दुस्थानियो 
में कोई देशप्रेमी  नेता ही नहीं बचा है ,क्या सब के सब वोटो के दीवाने हो गए हैं ?
हे देश वासियों ,क्या ऐसे लोगो के पक्ष में मतदान करके आप देश के साथ धोखा नहीं कर रहे हैं ?
देश का गृहमंत्री कहते हैं की बाटला काण्ड का एनकाउन्टर सही था मगर कानून मंत्री कहते हैं 
की वे तो आतंक फैलाने वाले नहीं थे ..!! उनको मारने से सोनिया रोई ...!!..कैसी सरकार ..!!!
किसकी बात सही माने हिंदुस्थानी !!!
अगर आतंकवादी को मारने के पर किसी जवान पर जांच बैठाई जाए तो कौन जवान देश के 
लिए शहीद होगा ?क्योंकि दुश्मनों को मारने से हमारे देश के नेता रो पड़ते हैं !!!देश को अस्थिर 
करने वाले लोग यदि किसी कौम विशेष के आतंकवादी हैं तो हमारे अभागे नेता उनके पक्ष में 
आ जाते हैं क्योंकि उसके पास भी एक वोट हैं और हमारे बेशर्म नेता उस एक वोट के लिए 
देश  को भारत माता के चीर को तार-तार होते देखते हैं    ..........  !!
यह देश का ख़राब समय है की इस देश पर वोटो के लालची ,झूठे,देश हित से परहेज करने वाले 
लोग शासन कर रहे हैं .क्या लोकतंत्र का अर्थ सिर्फ वोट ही रह गया है ?
जब तक देशवासी सोते रहेंगे तब तक ऐसा ही चलेगा .जवान गोलियों का शिकार होते रहेंगे 
उनकी औरतें विधवा रोती रहेगी ,उनके बच्चे बहादुर बाप की लाश पर बिलखते रहेंगे और 
हमारे शासक उनकी लाशो पर भी राजनीती करते रहेंगे. 
क्या अब भी सहन करते रहेंगे .....जिस बस्ती के लोग गूंगे और बहरे हो जाते हैं उस बस्ती का 
नामोनाशान मिट जाया करता है ......अपने देश प्रेम के जज्बे को जिन्दा रखिये .यह सुभाष ,
आजाद,भगत का देश है ,यह बिस्मिल का देश है ,यह विवेकानंद की भूमि है ,यह शिवाजी की 
आन है ,यह प्रताप की शान है .इस भूमि को नापाक इरादे वाले नापाक लोगों से बचाना हम 
सब का काम है इसे अकेले अन्ना पर मत छोड़ दीजिये,इसे अकेले स्वामी पर मत छोड़ 
दीजिये ...........

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

सच को क्यों मारा जा रहा है




२७ फरवरी २००२ को गोधरा रेलवे स्टेशन पर अयोध्या से लौट रहे हिन्दू तीर्थयात्रियो से भरी
रेलगाड़ी के एक डिब्बे में आग लगाकर ५९ यात्रियों को मारने वाले किस धर्म के लोग थे और
उन्होंने बेकुसूर ५९ तीर्थयात्रियो को जिनमे २५ महिलाए और १५ बच्चे भी शामिल थे
उनको जिन्दा किस मजहब के लोगो ने और क्यों जलाया ?


इस बात पर न्याय अंधा हो जाता है ,क्यों ?


हिन्दू यात्रियों को जिन्दा जलाया गया इस बात पर  आततायियो को कोई दोषी क्यों नहीं मान
रहा है जिन्होंने यह अधम कृत्य किया था ,उनकी कहीं चर्चा नहीं होती ;

इस बात पर न्याय भी बहरा हो जाता है, क्यों ? 

क्या हिन्दू की जान गयी वह कीमती नहीं थी ,


इस बात पर न्याय पट्टी बाँध लेता है ,क्यों?


पूरा गुजरात इस सच को जानता है और बार बार मोदी को चुनकर भेजता आया है 
क्योंकि गुजरात छद्म धर्मनिरपेक्षता और धर्मनिरपेक्षता को अच्छी तरह समझता है  
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इन दंगों में कुल १०४४ लोग मारे गए, जिनमें ७९० मुस्लिम और २५४ हिन्दू थे.
२५४८ घायल, २२३ लापता, ९१९ महिलायें विधवा हुईं और ६०६ बच्चे अनाथ. 
सात साल बाद लापता लोगों को भी मृत मान लिया गया और मृतकों की संख्या 
१२६७ हो गयी.पुलिस ने दंगों को रोकने में लगभग १०००० राउण्ड गोलियां चलायीं,
जिनमें जिनमें ९३ मुसलमानों और ७७ हिन्दुओं की मौत हुई. दंगों के दौरान 

१७९४७ हिन्दुओं और ३६१६ मुस्लिमों को गिरफ्तार किया गया बाद में कुल

मिला कर २७९०१ हिन्दुओं को और ७६५१ मुस्लमों को गिरफ्तार किया गया.

ये आंकड़े http://en.wikipedia.org/wiki/2002_Gujarat_violence साईट से मिले हैं.

ये आंकड़े सरकारी हैं और गैरसरकारी आंकड़ों के हिसाब से २००० से ज्यादा लोग

इन दंगों में मारे गए, लेकिन हमेशा ही गैर सरकारी आकडे सरकारी आंकड़ों

से ज्यादा होते हैं……..पर महत्वपूर्ण विषय ये है यदि सरकार और पुलिस मूक 

दर्शक बनी थी या हिन्दुओं का साथ दे रही थी तो पुलिस की गोली से ७७ हिन्दुओं

की मौत कैसे हो गयी…….. पुलिस ने २७००० से अधिक हिन्दुओं को क्यों गिरफ्तार किया जबकि मुस्लिमों को कम ……?




मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

मैं तुम्हारा नेता हूँ .



मैं तुम्हारा नेता हूँ .
सच को छिपाता हूँ 
न्याय को मिटाता हूँ 
मानवता को बाँटता हूँ 
दंगे करवाता हूँ 
सपने दिखाता  हूँ
उन्मांद फैलाता हूँ 
धोखा देता हूँ 
छल करता हूँ 
आदर्श छोड़ता हूँ 
झूठ बोलता हूँ 
शराब बांटता हूँ 
शबाब बांटता हूँ
नोट बांटता हूँ 
झुग्गी में सोता हूँ 
कटोरे में खाता हूँ 
दरिन्दा बनता हूँ 
लुटेरा बनता हूँ 
हिंसक बनता हूँ 
चापलूस बनता हूँ
बहरूपिया बनता हूँ 
वतन बेच देता हूँ 
वचन बेच देता हूँ 
इज्जत बेच देता हूँ 
धर्म बेच देता हूँ 
कर्म बेच देता हूँ 
विश्वास बेच देता हूँ 




बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

क्या मुसलमानों के साथ नाइंसाफी के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिम्मेदार है?

क्या मुसलमानों के साथ नाइंसाफी के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिम्मेदार है?

यह सवाल खड़ा किया है भविष्य में भारत का प्रधानमंत्री बनने का सपना (दिवास्वप्न ) देखने वाले 
युवा ने .जो लोग इस बयान की तरफदारी करते हैं वो तथाकथित धर्म निरपेक्ष हो सकते हैं.

क्या हिन्दू हित की बात करना मुस्लिम विरोध करना है ?इस देश का हिन्दू यदि अपने देश में अपने 
हित की बात नहीं सोचेगा तो क्या पाक में जाकर सोचेगा .

कश्मीरी हिन्दू शरणार्थियों की कोई बात नहीं करता है?क्यों? क्या कश्मीर में पैदा होना ही उनका 
गुनाह है .१९९० से आज तक उन्हें अपने ही देश में शरणार्थी के रूप में दर-दर भटकना पड़ रहा है ?
क्या किया हमारी धर्म निरपेक्ष सरकार ने उनके लिए ?क्या मुस्लिम चाटुकारिता ही धर्म निरपेक्षता  
 है .ऐसी धर्मनिरपेक्षता से क्या भला होगा हमारे वतन का ?आज इस देश का नाम हिन्दुस्थान 
यदि सुनना है तो पाक चेनल या रेडियो सुनना पडेगा ,हमारे यहाँ तो "हिन्दुस्थान "नाम लेना  भी 
सांप्रदायिक हो सकता है .

करोडो हिन्दुओ पर शासन करने का सपना है उनका,किसकी बदोलत ?हिन्दुओ का जाती आधारित 
वर्गीकरण करके तथा अल्पसंख्यक वोट बैंक को मिला कर शासन करना क्या धर्म निरपेक्षता है?

इस देश में तथाकथित धर्म निरपेक्ष सरकारे रही है उन्होंने क्या किया अल्पसंख्यक समाज के लिए ?
सिर्फ सत्ता प्राप्ति के लिए किसी कौम को गुमराह करते रहना क्या धर्म निरपेक्षता है?क्या ऐसी धर्म 
निरपेक्षता स्वीकार की जानी चाहिये जो विभिन्न धर्मो में वैमनस्य फैलाये,किसी धर्म विशेष के लोगो 
में जातिगत भेदभाव फैलाये .

राष्ट्रिय स्वयसेवक संघ ने कब सत्ता के लिए चुनाव लड़ा ?संघ ने कब "फतवे" जारी किये ?संघ ने कब
मुस्लिम विरोध किया ?संघ ने राष्ट्र प्रेमी मुस्लिम  को स्वीकार किया है ,मानवता प्रेमी इसाई को
स्वीकारकिया है .इस देश की प्रगति के साथ जुड़े हुए हर कौम के लोगो के साथ संघ हर समय खड़ा
रहता है .

जो लोग इस देश में रहकर भी इस देश के होना नहीं चाहते ,जो लोग इस देश में रहकर भी हिन्दुओ 
का धर्म परिवर्तन करने की नापाक कोशिश करते हैं जो लोग धर्म और बहुसंख्यक समुदाय का खोटा
भय दिखाकर खुद का स्वार्थ साधना चाहते हैं वो लोग विकृत सोच के जीव हैं ऐसे लोग ना तो किसी 
कौम का भला करते हैं ना ही हिन्दुस्थान का भला करने वाले हैं .