शनिवार, 11 फ़रवरी 2012

व्यथा पत्र-


व्यथा पत्र-
शहीद इन्स्पेक्टर मोहन शर्मा.., 
आपके जज्बे को हम करोडो देशप्रेमी भारतीय सलाम करते हैं .
आपने २००८ में इन्डियन मुजाहिदीन के आतंकवादियों से मुठभेड़ की और वीरगति को प्राप्त हो गये.
आप जैसे जाबांजो के कारण माँ भारती अपनी शान बनाए रख पाती है .............लेकिन माँ भारती की
शान को कम करते हैं हमारे ही देश के कु-नेता. वो भी रोते हैं उनकी नेता भी फुट-फुटकर रोती है मगर 
आपके लिए नहीं शहीद मोहन चंद शर्मा, क्योंकि आपके लिए रोने से उन्हें सत्ता नहीं मिल पाती वो तो
देश के दुश्मनोंके लिए रोते हैं, माँ भारती की अस्मिता से खिलवाड़ करने वाले गद्दारों की मौत पर मातम
मनाते हैं.ये तथाकथित सेक्युलर दरिन्दे जो बड़ी शान से कहते हैं की आतंकवादी तो आतंवादी होता है
उसकी कोई जाती नहीं होती,उसका कोई धर्म नहीं होता, मगर.........ये सब कहने के लिए है असलियत
में ये लोग ही सबसे बड़े सांप्रदायिक हैं.ये लोग मानवता की पूजा नहीं करते,ये लोग आतंक फैलाने वालो 
का पक्ष लेते हैं, इस देश में आप जैसे बहादुर इन्स्पेक्टर के लिए सिर्फ जांच आयोग बनाया जाता है की
आपने वोट बैंक पर हाथ क्यों डाला? राष्ट्र रक्षा की बातें इनके लिए कोई मायने नहीं रखती.  
..........आतंकवादी को मुस्लिम ,हिन्दू या इसाई मानने वाले नेता हम सभी को बरगलाते हैं.मजहब नहीं 
सिखाता आपस में बैर करना. मगर संकीर्ण सोच के नेता सिखाते हैं की अमन चैन को नष्ट करने वाला 
भी जाती रखता है. देश की शांति को नष्ट करने वालो की पूजा करते हैं वोट के लालची नेता .देश में 
निर्दोष लोगो का खून बहाने वाले की लाश के पास बैठकर मातम मनाने वाले दरिन्दे पुरे अवाम को गलत
सन्देश देते हैं, उनके हाथों में फूल हैं मगर वे फूल तेरे लिए नहीं है शहीद ! वे फूल लेकर उन कब्रों की
और जा रहे हैं जहाँ देश के दुश्मनों को आपने चिर निद्रा में सुलाया था.
इनके होसले भी देखो शहीद ! दिन दहाड़े गर्व से खड़े होकर देश द्रोह की बाते कह जाते हैं और आप जैसे 
शहीदों पर कीचड़ उछाल जाते हैं क्योंकि ये जो कुछ भी बयान करते हैं उसे कानून सम्मत ही मानते हैं.
इन्हें आप जैसे बहादुर सपूतों की विधवाओं पर दया नहीं है ,रहम नहीं है इन्हें रहम है देश द्रोहियों की 
लाशो से .इनके पास आपकी वीरता को बखान करने के लिए शब्द नहीं है मगर इनके पास दुआओं का 
अम्बार है देश में आतंक मचाने वाले दरिंदो के लिए .
मगर व्यथित मत होना शहीद ये सब सुनकर क्योंकि इन ढोंगी लोगो के पाप का घड़ा भी एक दिन 
फूटेगा .हम भारतीय तुम्हारे बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे. तुम करोडो भारतीयों के गर्व का कारण 
हो ,आपका बलिदान हमें सदैव यह सन्देश देता रहेगा की हम जागरूक रहकर ,अपने मत का प्रयोग 
करके गिरगिट नेताओ को उनकी सही जगह बता देंगे .
                                     जय-हिंद        
                      शहीद इन्स्पेक्टर मोहन शर्मा (परिचय)
वर्ष 2008 में दिल्ली के जामिया नगर इलाक़े में दिल्ली पुलिस के साथ मुठभेड़ में आतिफ़ अमीन और
मोहम्मद साजिद मारे गए थे, जबकि मोहम्मद सैफ़ और जीशान को गिरफ़्तार कर लिया गयाथा.
दिल्ली पुलिस इन्हें इंडियन मुजाहिदीन का सदस्य मानती है. आतिफ़ अमीन और मोहम्मद साजिद 
आज़मगढ़ के रहने वाले थे. इस मुठभेड़ में दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा भी मारे
गए थे.

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