बुधवार, 28 मार्च 2012

पवित्रात्मा नेता और नास्तिक जनता !

 पवित्रात्मा नेता और नास्तिक जनता !

संसद एक मंदिर है ठीक वैसे ही जैसे मथुरा में श्री कृष्ण का और अवध में श्री राम का. अरे! जब
आपश्री राम और कृष्ण का आदर करते हो ,उनके श्री चरणों में शीश झुकाते हो ,बड़े ही ध्यान से
उनका नाम जप करते हो ,और उनके हर फैसले को करनी का फल मानकर स्वीकार कर लेते हो
तो फिर संसद के अन्दर विराजमान पवित्रात्मा का सम्मान क्यों नहीं करते हो ? इन पवित्रात्माओ
की लीला पर टीका टिप्पणी करना अक्षम्य अपराध है ! इनका हर फैसला उचित ही होता है उसे
सहर्ष स्वीकार कर लेना चाहिये क्योंकि विधि की रचना विधाता करता है या फिर ये साक्षात
पवित्रात्मा .

    जैसे पवित्र तीर्थो का सेवन करने से आत्मा प्रसन्न हो जाती है .तीर्थो की भूमि की रज मात्र से पाप
धुल जाते हैं ठीक वैसे ही इन साक्षात पवित्रात्मा के दर्शन का भी असीम फल है ,इन पवित्रात्मा की
जिस पर भी ठंडी नजर पड़ जाती है उसके वारे न्यारे हो जाते हैं ,पैदल चलने वाला फटीचर इनकी
कृपा से मोटर कार में घुमने वाला बन जाता है .कंगले भी इनकी कृपा से लक्ष्मीवान हो जाते हैं .

   भगवान् और इनके चरित्र में भी विशेष समानता है .जिस तरह भगवान् को भी अपना नाम जपने
वाला अतिप्रिय है उसी प्रकार इन्हें भी चापलूस पसंद है ,जिस प्रकार भगवान् को हरिजस गाने वाले
प्रिय हैं उसी प्रकार इन्हें भी अपना चालीसा -पुराण ,कीर्ति गाथा गाने वाला पसंद है ,जिस प्रकार प्रभु
को कानून थोपना पसंद है उसी प्रकार इन्हें भी यही पसंद है ,जिस प्रकार भगवान् नास्तिकों पर
क्रूरता दिखाते हैं उसी प्रकार ये भी इनके खिलाफ आवाज उठाने वाले बन्दों  पर क्रूरता बरसाते हैं .

     जब हम माखन चुराने वाले चोर को आदर दे सकते हैं , पल-पल छल करने वाले छलिया का
 गुणगान गा सकते हैं ,दौ भाईयो के युद्ध को रोकने की बजाय अवश्यम्भावी बना देने वाले को हम
पूज्य कह सकते हैं ,हजारो रानियों के साथ रहने वाले को मायापति कह सकते हैं तो फिर इन
पवित्रात्माओ को आदर क्यों नहीं दे सकते हैं?
चोर कन्हेया भी थे और ये भी ,छल वो भी करते थे और ये भी ,महाभारत चक्रधारी ने भी होने दिया
और ये भी हिन्दू-मुस्लिम सिक्ख इसाई में छ्मकले करवाते रहते हैं ,वो महारसिक था तो ये भी
रसिकहैं मंदिर के आसन पर बैठकर लीला देखते हैं किसी  भी कोण से बाँके से कम नहीं है दो अंगुल
बढ़कर ही हैं उस कालिया से, मगर फिर भी इनको आदर नहीं देना इनके साथ न्याय नहीं है.

     भगवान् के समकक्ष इन पवित्रात्मा के खिलाफ करोडो सिरफिरे पैदा हो गये इनके इन्द्रासन को
चुनोती देने लग गये .इनकी रासलीला के चटकारे लेने लग गये .इन पवित्रात्मा की बैचेनी जायज है
अगर देश की जनता का इनसे मोहभंग तेजी से इसी तरह होता रहा तो इनकी अर्चना और पूजा का
स्वरूप बदल कर रोद्र ना बन जाए ,महा आरती ना उतार दे बागी भगत !

   स्तुति और वन्दना के समकक्ष ये पवित्रात्मा जो भी लीला करते हैं उस लीला में अचानक अवरोध
 उत्पन्न करने वाले विद्रोही भगतो का टोकना इन्हें बुरा लगता है.कन्हेया की लीला में सुदर्शन का
कमाल था तो इन पवित्रात्मा की लीला में वोट का कमाल है .

    जिस तरह पापी अपने को गंगा स्नान से पवित्र करता है ,चोर उचक्का प्रभु मंदिर में जाकर दोष
मार्जन करता है ,धूर्त ठग दान दक्षिणा करके धन को शुद्ध करता है ठीक उसी प्रकार ये भी अपने को
शुद्धोत्तम मान चुके हैं क्योंकि ये भी चुनावी वेतरनी पार करके  मंदिर में बैठे हैं .इन्हें अपराधी
मानने और कहने से गरिमा भंग होती है .जैसे तुलसी अपने जीवन में काम लोलुप रहे थे मगर राम 
चरित्र लिखने के बाद आदरणीय बन गये ,परम साधू हो गये .जब तुलसी को आदर से याद किया 
जाता है तो इन पवित्रात्मा को भी पवित्र मान लेना चाहिए,आखिर ये भी जनता से चुनकर भेजे
गये हैं .

   संसद में विराजमान पवित्रात्मा आज सच के अदने से व्यक्ति से, हर उस आदमी से परेशान है
जो अंधे को अँधा कहता है ,काणे को काणा कहता है .देश में नास्तिक बढ़ते जा रहे हैं जो इनमे
अश्रद्धा रखते हैं . इन सब पवित्रात्मा को संगठित होकर देश के नास्तिको पर वार करना चाहिये.


                   
           

रविवार, 25 मार्च 2012

क्या दैवीय विचारों की हार होगी ?

क्या दैवीय विचारों की हार होगी ?
अन्ना के अनुभव यथार्थ के नजदीक रहते हैं ,वो जो कहते हैं वह जमीनी हकीकत है ,आम
आदमी अन्ना में अपना अक्श ढूंढ़ता है क्योंकि उसे भी मालुम है कि उसका नेता चोर है ,
कपटी है,झूठा है ,मायावी है,फरेबी है ,धूर्त है.

हमें दैवीय और आसुरी शक्तियों के संघर्ष के बारे में मालुम है .हम पाखंडी साधू वेशधारी
रावण कि कुटिल नीतियों से अनजान नहीं हैं ना ही हम दुर्योधन और शकुनी को भूले हैं
हमें जयचंद भी याद है .सभी काल में दैवीय शक्तियां हमें पिछड़ती हुई महसूस होती है
मगर सत्य यही है कि विजय हमेशा दैवीय शक्तियों कि ही हुई है.

अन्ना और उसकी टीम भी हमारी तरह इंसान ही तो है ,इंसान होने के कारण लालसायें
भी पनप सकती है .हम सिर्फ अंगुली उठा सकते हैं मगर अपने गिरेबान में झाँक कर
देखने से परहेज करते हैं .अन्ना का किस दल से क्या ताल्लुक है या कौन किससे क्या
चाहता है ,यह मुख्य बात नहीं है .अन्ना या अन्ना टीम ही धर्मराज है ,यह भी मुख्य बात
नहीं है .मुख्य बात है आम भारतीय कि हो रही दुर्दशा  ,अन्ना और उसकी टीम इस
बात पर आम भारतीय के साथ है और आम भारतीय के अधिकारों के लिए लडती हुई
दिखती है .

यदि आम लोगों कि भलाई के लिए ,उनके अधिकारों के लिए एक साधारण व्यक्ति
संघर्ष कर रहा हो तो हमारा भी कर्तव्य बनता है कि हम अपने भले के लिए उस व्यक्ति
का साथ दे .

हम अन्ना कि आलोचना करे या उनकी योजना पर तर्क कुतर्क करे उससे क्या हम
अपने अधिकार पा जायेंगे ?अन्ना के आन्दोलन को कमजोर करने का मतलब आम
गरीब भारतीय को कमजोर करना है क्योंकि यह आन्दोलन हर भ्रष्ट अधिकारी ,भ्रष्ट
नेता ,भ्रष्ट सरकारी कर्मचारी के खिलाफ है .

आज कोई सा भी राजनीतिक दल जन लोकपाल से सहमत नहीं है ,जन लोकपाल से
सहमत है समाज के कुचले हुए वो लोग जो इन भ्रष्ट तत्वों का शिकार बन चुके हैं .


यह देश भी अन्ना के साथ तब तक ही खडा रहने वाला है जब तक यह आन्दोलन राजनीती 
के कीचड़ से दूर दैवीय भाव से आसुरी शक्तियों के खिलाफ लड़ा जाएगा .यदि अन्ना या 
अन्ना टीम दैवीय गुणों से हटकर स्वार्थ के पथ पर चली जायेगी तो इस आन्दोलन कि 
लौ स्वत: ही मिट जायेगी .

अन्ना के विचार यदि सरल लगे ,शुद्ध लगे ,आम लोगों के हित वाले लगे और उनके
विचारों से यदि दबे कुचले वर्ग को अपना अधिकार मिल सकने कि मध्यम सी भी
संभावना दिखती हो तो हमें अन्ना के विचारों का समर्थन करना ही चाहिए ,यह
वक्त कि पुकार भी है .

अगर हम दैवीय विचारों का साथ नहीं देकर उनकी खिल्ली उड़ायेंगे तो दुर्योधन कि
सभा में भीष्म  जैसे ही होंगे ,अन्याय को अन्याय नहीं कहने और आसुरी शक्तियों
का साथ देने के कारण भीष्म का अंत भी सुखद नहीं रहा .हम भी यदि इस समय
दैवीय विचारों के खिलाफ लामबंद हो जायेंगे तो  हमारी आने वाली पीढियां चुपचाप
असुरों का अन्याय सहन करती रहेगी और हमें नपुंसक समझेगी .

दैवीय विचार भले ही अभी कमजोर लग रहे हो मगर आखिर में आसुरी विचारों
का दमन होगा ही, यह भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ लंबा लड़ा जाने वाला वैचारिक और
 क्रान्ति का युद्ध है भले ही अभी शैशव अवस्था में होने के कारण कमजोर लग रहा
 हो मगर समय पाकर विजय पथ कि और बढ़ जाएगा,इसमें तनिक भी संदेह नहीं है  .              

शनिवार, 24 मार्च 2012

चिंता से बचना ही सफलता

चिंता से बचना ही सफलता 

चिंता क्या है 

मन में उठने वाले विचार जब नकारात्मक दिशा में बढ़ने लगते हैं और मस्तिष्क की ऊर्जा भी 
नकारात्मक विचारों के अति-विश्लेषण पर व्यय होने लगती है तब हम उसे चिंता कहते हैं 

चिंता की उत्पति कैसे होती है 

चिंता भय की कल्पनाओं से उत्पन्न होती है

चिंता का स्वरूप 

हम चिंता को चार भागों में बाँट सकते हैं 

(१) स्वास्थ्य या  मृत्यु की चिंता - हम या हमारे प्रिय स्वजन असमय में गंभीर बिमारी से ग्रस्त 
     ना हो जाए या असमय काल कलवित ना हो जाए यह चिंता हर प्राणी के मन में रहती है .कोई 
     गंभीर रोग ना लग जाए इस नकारात्मक कल्पना का स्मरण कर मन इस कल्पना पर गहन 
    विश्लेषण करने लग जाता है तब हम तनावग्रस्त हो जाते हैं  

(२) धन सम्पत्ति या आजीविका की चिंता - मेरी आजीविका का साधन यदि संकट में पड़ गया
     तो क्या होगा या किसी आर्थिक नुकसान में फँस गया तो क्या होगा ,ऐसी कल्पनाओं पर विचार 
     करके व्यक्ति अपने आत्मबल को कम कर लेता है और खुद को दीन-हीन मानकर भयभीत 
     हो जाता है 
 
(३) सामाजिक अपकीर्ति या अपयश की चिंता- समाज,शहर या देश में मेरा अच्छा नाम है, मैं 
      जो कुछ कर रहा हूँ उस पर समाज क्या प्रतिक्रिया देगा ,कहीं  मेरे कुल के गौरव पर दुनिया 
     अंगुली ना उठा दे,कहीं मेरे कुकृत्य या दोष समाज के सामने ना आ जाए .
 
(४) प्रतिकूल परिस्थिति या असफलता की चिंता - आज का दिन तो ठीक बीत गया मगर आने 
      वाला कल कैसा बीतेगा,कहीं मुझे असफलता का आने वाले समय में सामना ना करना पड़ जाए 
     इस प्रकार के भय की कल्पनाएँ हमें तनावग्रस्त कर देती है.  

चिंता का कुप्रभाव 
(१) मानसिक और शारीरिक बीमारियाँ मन तथा शरीर को घेर लेती है 
(२) स्वभाव में नीरसता ,चिडचिडापन और अनुत्साह छा जाता है 
(३) गलत चिंतन से नकारात्मक विचारों का दिमाग में एक चक्र निर्मित हो जाता है जो शंका ,
     असंतोष,इर्ष्या ,कुढ़न और बैचेनी का जाल फेला देता है 
(४) आत्मविश्वास टूटने लगता है,एकाग्रता भंग हो जाती है 
(५) मतिभ्रम ,सोचने की शक्ति पर दुष्प्रभाव ,स्मरण शक्ति में कमी आ जाती है 
(६) निर्णय शक्ति कुंठित हो जाती है ,सुअवसर भी कुअवसर में बदल जाते हैं 

चिंता से मुक्ति कैसे    
(१)सकारात्मक सोच रखे 
(२)प्रतिकूल परिस्थितियों में चित्त को शांत रखे ,अटूट धेर्य रखे 
(३)आज को सफल जीने का लक्ष्य बनाएं 
(४)चिंता के कारणों पर पूर्ण और तटस्थ होकर चिंतन करे 
(५)योग्य ,वृद्ध, विशेषज्ञों तथा पूज्य लोगों से सलाह ले और उनके द्वारा प्राप्त सलाह पर अमल करे 
(६) आस्तिक बने ,परिवर्तन के चक्र पर श्रद्धा रखे 
(७)अंतर्मन से  बार-बार सुखद परिणाम की प्राप्ति का मार्ग पूछे 
(८) कार्य को पूजा समझ कर निष्ठां से करते रहे   
     

गुरुवार, 22 मार्च 2012

अपनी डफली अपना राग

अपनी डफली अपना राग 


हमारे देश में गरीब मिटाया जा रहा है .योजना आयोग ने गरीबी रेखा में बदलाव 
करते हुए कहा है कि अब शहर में 28 रुपए 65 पैसे प्रतिदिन और गांवों में 22रुपये42पैसे
खर्च करने वाले को गरीब नहीं कहा जा सकता.योजना आयोग ने सोमवार को जो आंकड़ें 
जारी किए थे उसके अनुसार साल 2009-2010 के गरीबी आंकड़े कहते हैं कि पिछले पांच
साल के दौरान देश में गरीबी 37.2 फीसदी से घटकर 29.8 फीसदी पर आ गई है.  

भारत में प्रतिव्यक्ति आय २०१०-११ में ५४८३५/- के करीब हो गयी है और २०११-१२ में बढ़कर
६०९७३/-हो जायेगी . 

(Per capita income is calculated by evenly dividing the national income among the country's population.)
विश्व बैंक के अनुसार -----
 Indian official estimates of the extent of poverty have been subject to 
debate, with concerns being raised about the methodology for the 
determination of the poverty line.[139][140] As of 2005, according to 
World Bank statistics, 75.6% of the population lived on less than $2 
a day (PPP), while 27.5% of the population was  living below the new 
international poverty line of $1.25 (PPP) per day.[141][142][143]
However, data released in 2009 by the Government of India estimated 
that 37% of the population lived below the poverty line.[144] The इंडियन
economy continues to face the problem of an underground economy 
with a 2006 estimate by the Swiss Banking Association suggesting ठाट
India topped the worldwide list for black money with almost $1,456 billion
stashed in Swiss banks. This amounts to 13 times the country's total external debt.[181][182] 
प्रतिव्यक्ति कर्ज का भार --
India's external debt increased by $36.9 billion to $261.4 billion by end-March 2010. This works out to 18.9% of the nation's GDP.

The Reserve Bank of India says that India is Asia's fifth most indebted 
वित्त मंत्री के अनुसार २लाख रूपये सालाना कमाने वाला आदमी आयकर देने के घेरे में नहीं है 
और आयकर उससे ही नहीं लिया जाता जो गरीब है 
नए टैक्स स्लैब के बिंदु-

दो लाख रुपए सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं।
दो लाख रुपए से ज्यादा से पांच लाख तक टैक्स 10 प्रतिशत।
पांच लाख से ज्यादा सालाना आय से लेकर आठ लाख रुपए तक टैक्स 20प्रतिशत।
दस लाख से ज्यादा सालाना आय पर टैक्स 30 प्रतिशत। 

अब आप ही बताईये की योजना आयोग झूठा है या देश की सरकार 

मंगलवार, 20 मार्च 2012

मक्खी और मधुमक्खी

मक्खी और मधुमक्खी 


मैं अपने घर के लॉन में सुबह -सुबह टहल रहा था .गमले में लगे गुलाब के फूल पर एक
मधुमक्खी आकर बैठ गयी थी .गुलाब मधुमक्खी के आगमन पर ख़ुशी से मुस्करा रहा था
गुलाब मधुमक्खी का आतिथ्य पराग लुटाकर कर रहा था .मधुमक्खी  भी उसे किंचित
मात्र तकलीफ दिए बिना ही पराग का आस्वादन कर रही थी .कुछ  देर बाद वह मधुमक्खी
उड़कर दुसरे फूल पर बैठ गयी थी .थोड़ी ही देर में एक काली मक्खी आई और उस फूल
पर बैठ गयी .फूल इस मक्खी की आवभगत में भी पराग और खुश्बू बाँट रहा था .काली
मक्खी भी पराग का आस्वादन करती गयी और जाते जाते उस फूल पर अपना मैला भी
छोड़ कर उड़ गयी .

 यह देख मेरे मन में हलचल मच गयी ,इस फूल ने इन दोनों मक्खियों को अपनी खुश्बू
और पराग दिया मगर बदले में मधुमक्खी ने उसे दिया कुछ नहीं और पराग का आतिथ्य
ग्रहण कर बिना नुकसान पहुंचाए उड़ गयी तथा दूसरी मक्खी ने उससे आतिथ्य भी ग्रहण
किया और जाते -जाते उस फूल पर अपना गन्दा मैला भी छोड़ गयी.

मेरे देश के जनसेवक जो व्यवहार मधुमक्खी ने गुलाब के साथ किया वह यदि देश के साथ
करे तो इतना दुःख नहीं होगा परन्तु काली मक्खी ने जो व्यवहार फूल के साथ किया वह तो
किसी भी कीमत पर माफी  के योग्य नहीं होता है.  


छवि गूगल से साभार      

रविवार, 18 मार्च 2012

बजट और आम आदमी

बजट और आम आदमी


आम भारतीय को बजट से क्या मिला ? इस प्रश्न का उत्तर एक लाइन में देना हो तो यह कह देना
चाहिए की आम बजट से नागरिको का जीना दूभर हो जाएगा.

ऐसा क्यों होगा ?


आम बजट में हर प्रोडक्ट पर कर बढ़ा दिया गया है.

सेवाकर के दायरे को विस्तृत कर दिया है और कर भी बढ़ा दिया है.

आम आदमी को महंगाई से लड़ने के लिए सब्सिडी का जो शस्त्र दिया गया था उसे धीरे -धीरे वापिस
लेने का इरादा जता दिया है.

पेट्रोल और पेट्रोलियम पदार्थ की दर बढ़नी तय है मगर इन पर कर कम करके सरकार आम आदमी
को राहत नहीं देना चाहती है.

मनरेगा जैसे अनुत्पादक खर्च को बढाते जा रहे हैं ताकि कर के पैसे की बंदरबांट होती रहे.

ब्याज दर का कम होना मुश्किल नजर आता है .

आम आदमी की आय और आयकर के मापदंड 


आम आदमी की आय जिसमे देश की ८०%जनसँख्या को सम्मिलित किया जा सकता है ,150000
वार्षिक आय से कम है .यह वर्ग आयकर मापदंड के अनुसार कर देने के घेरे में नहीं आता है .
इसका मतलब ८०% जनता को आयकर के अनुसार कोई भी लाभ प्राप्त नहीं कर पायी है मगर इस
वर्ग को ही सबसे ज्यादा नुकसान इस बजट में झेलना है .बढे हुए अप्रत्यक्ष कर की मार इसी वर्ग पर
पड़नी है.इस वर्ग को बढ़ी हुई महंगाई और बढ़ने वाली महंगाई का बोझ उठाना है .बढे हुए अप्रत्यक्ष
कर कुल मिलाकर उसके खर्च को १०% या इससे ज्यादा बढा देगा इसका मतलब यह हुआ की उसकी
बचत को नुकसान होगा या बचत नहीं हो पा रही थी तो जिन्दगी जीने में कोरकसर करनी पड़ेगी .
इस वर्ग की खुशहाली में कमी आने का सीधा प्रभाव उद्योग धंधो पर पडेगा क्योंकि जिस देश की ८०%
जनता की खरीद शक्ति कम हो जायेगी तो वस्तुओं की मांग गिर जायेगी .जनता की क्रयशक्ति का
कम होने से  देश की GDP को प्रभावित करेगा.


देश की गरीब जनता को दी जाने सब्सिडी में कटौती का मतलब देश की जनता को ७५००० करोड़
रूपये का भार उठाना होगा ,देश के उत्पाद का सबसे बड़ा ग्राहक यही ८०% वर्ग है और सब्सिडी
घटाने पर इस वर्ग की हालत ही पतली होनी तय है .

मनरेगा सरकारी कागजों पर रोजगार पैदा  करने वाली स्कीम है इसके बजट को और ज्यादा बढा
दिया गया है जबकि वास्तव में मनरेगा में हो रही गड़बडिया जनता के कर के धन का दुरूपयोग है
यह खर्च अनुत्पादक है इसमें काम का कोई लक्ष्य नहीं है .एक ही गढ़े को कितना ,किसने कब खोदा
है या कच्ची सड़क पर कितनी मिटटी कब डाली गयी है इसका कोई लेखा जोखा रहने वाला नहीं है
कितने मजदुर वास्तव में कितना काम कर पाए हैं ?क्या उन मजदूरो के द्वारा किया गया काम गाँव
के विकास में सहायक हुआ ?इन प्रश्नों का कोई उत्तर नहीं है .देश के लोग देश के कितने कार्य दिवस
मनरेगा के कामों में खर्च कर रहे हैं और उन कार्य दिवसों से गाँवों का क्या विकास हुआ ,अगर देश के
लोग जो मनरेगा में अपने श्रम और कार्य के घंटों को खर्च कर रहे हैं वे लोग उसी श्रम को देश के
ओद्योगिक विकास में खर्च करता तो सकल घेरुलू उत्पाद बेहतर हो जाता .ग्रामीण युवा शक्ति को अपनी
सत्ता चलाने में हत्था बनाने की नीति,उन्हें अकुशल  श्रमिक बनाए रखने की नीति,उन्हें कम काम
करने देने की नीति उनके विकास में तो बाधक है ही परन्तु देश के विकास में भी बाधक है क्योंकि
यह अकुशल श्रमिक चन्द रूपये की आय गाँव में ही पाकर बड़े सपने देखने से वंचित रह रहा है या
यह श्रमिक वर्ग आलसी बन रहा है जिसके घातक परिणाम अभी से देश के हर उद्योग पर पड़ना
शुरू हो गया है .यह पैसा जो मनरेगा के तहत खर्च हो रहा है यह अनुत्पादक व्यय है जिससे महंगाई
बढती है.

बढ़ता हुआ भ्रष्टाचार देश के विकास में अवरोध पैदा कर रहा है .सरकारी बाबुओ ,अफसरों ,नेताओ में
यदि इमानदारी से काम करने की नीति रहती है तो ये भी सताए जाते हैं ,भ्रष्ट व्यापारी और उद्योगपति
इनकी कर्तव्य निष्ठां को सहन नहीं कर पाता है और यह वर्ग यदि भ्रष्ट हो जाता है तो देश की जड़ों को
खोखली कर देता है .

सरकार को ईमानदार नागरिक पैदा करने की नीति रखनी चाहिए लेकिन वह तो टेक्स बढ़ा कर उन्हें
चोर बना रही है ,अनैतिक बना रही है ,यदि टेक्स कम होते तो सरकार को ज्यादा धन मिलता .

सरकारी खर्चो में इस बजट में कहीं भी कमी नहीं की गयी है .विधायको ,सांसदों या बड़े आफिसर वर्ग
भारी भरकम पगार लेते हैं और सुविधाएं भोगते हैं ,आज तक किसी भी मंत्री ने यह कहने का साहस नहीं
किया की देश पर कर्ज का बौझ बढ़ रहा है इसलिए हमारी सुविधाओं और वेतन में कमी की जाए .
ये लोग तो जनसेवक कहलाते हैं ,इनके हाथ में देश की बागडोर है .यदि यह वर्ग भी आम आदमी की
तरह कम खर्च में गुजारा कर सके तो इस वर्ग पर खर्च होने वाले धन को देश के विकास में खर्च किया
जाता तो पुरे देश की जनता में सकारात्मक प्रभाव पड़ता लेकिन यह वर्ग भी जनता से प्राप्त कर के
पैसे को बेफाम खर्च कर रहा है.

अब प्रश्न यही है की आम आदमी के लिए बजट के क्या मायने बचे हैं ? इस विषय पर 
आपकी टिप्पणी चाहूंगा.  
           
    

शुक्रवार, 16 मार्च 2012

बजट:- मातम मनायेगा आम आदमी ?

 बजट:- मातम मनायेगा आम आदमी ?

बड़े उद्योगों के लिये मुफ्त के भाव सैंकड़ो एकड़ जमीन ,कम ब्याज दर पर भरपूर ऋण ,
ऋण का पैसा ना चुकाने पर भी डीफोल्टर सूची से बाहर देश के रईश,ओद्योगिक विकास
के नाम पर भरपूर सब्सिडी ,उद्योग असफल होने पर पुन:वित्तीय पैकेज .


रसोई गैस महंगी ,रेल किराया महंगा ,बिजली महंगी,खाने -पीने का सामान महँगा ,केरोसिन
महंगा ,पेट्रोल महंगा यानि इन पर छुट नहीं दी जायेगीऔर अगर छुट है तो धीरे धीरे वापिस
ले ली जायेगी क्योंकि इन मदों पर छुट देने से देश की प्रगति अवरुद्ध हो जाती है.

AC सस्ता ,मोटर कार सस्ती ,कंप्यूटर सस्ता ,वीडियोगेम सस्ते ,डायमंड के गहने सस्ते ,
हवाई यात्रा सस्ती ,माचिस महंगी ,साबुन महँगा ,कपडा महंगा ,पंखे महंगे ,सिलाई मशीन
महंगी ,साइकिल महंगी ,होमलोन महंगा .

शेयर बाजार के सटोरियों पर टेक्स कम ,मोटर कार पर टेक्स कम ,पांच सितारा होटलों पर
टेक्स कम,सेम्पू और क्रीम पर टेक्स कम ,सर्विस टेक्स का दायरा विस्तृत किया जाएगा इसमें
श्मशान भूमि के प्रयोग ,पेईंग गेस्ट सर्विस,न्यूज़ पेपर डिलेवरी सर्विस ,लंच बॉक्स डिलेवरी सर्विस
धर्मशाला में ठहरने ,ढाबे ,लॉरी जैसे क्षेत्रों को जोड़ा जायेगा.


रोजगार के अवसर नहीं बढ़ने पर भी युवाओं को फिक्र करने की जरुरत नहीं ,उनके बेरोजगारी
भत्ते को बढाया जायेगा .

महा नरेगा में निवेश को दुगुना करने की सिफारिश को सभी दल के प्रतिनिधि मेज बजाकर
थपथपाएंगे .जिला स्तर पर बीडियो ,पटवारी,सरपंच महानरेगा से पुण्य प्राप्त करेंगे .

छोटे और असंगठित दुकानदारों को FDI द्वारा प्रति घंटे की दर से काम करवाकर रोजगार मुहैया
करवाया जायेगा और वे अपनी दुकान में लगी पूंजी को ब्याज पर देकर दोहरा लाभ कमाएंगे .

सरकारी क्षेत्र के लाभदायक उद्योगों को निजी क्षेत्र की भागीदारी से चलाया जाएगा और जिन
सरकारी उद्योगों में हानि हो रही है उसे जनता के धन से चलाया जायेगा .

रक्षा के क्षेत्र पर विशेष खर्च किया जायेगा पुरानी टेक्नोलोजी के आयुध सस्ते में बड़ी मात्रा में
आयात किये जायेंगे.

बाढ़ और सुखा ग्रस्त क्षेत्रो का विशेष रूप से चयन किया जायेगा और हवाई सर्वेक्षण ,आपदा
निवारण आदि मदों पर विशेष कमिठी की सिफारिशे लागू की जायेगी और प्रयाप्त धन 
मुहैया कराया जाएगा 


शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन किया जायेगा .शिक्षकों के पद पर भर्ती चालु नहीं
होने तक ग्रेजुएट तक की कक्षाओ तक किसी को भी फेल नहीं किया जायेगा

महंगाई के आंकड़ो से खाने पीने की वस्तुओ को हटाकर लेपटोप ,मोबाइल फोन को स्थान
दिया जायेगा .  

   


         



    

गुरुवार, 15 मार्च 2012

यह शेर है कि बवंडर !

यह शेर है कि बवंडर !


मंज़िल अभी दूर और रास्ता जटिल है 

इस शेर की पहली पंक्ति ने ऐसा कहर ढाया कि अगली पंक्ति पढ़ना भी मुश्किल हो गया  

रेलमंत्री त्रिवेदी ने रेल के लिए कहा मगर उन पर ही सही फिट हो गया यह शेर .रेल किराया
बढ़ाना ममता को नागवार गुजरा और कुर्सी से हाथ धोने की नौबत आ गयी .

UP के साइकिल भूकंप से यह शेर राहुल गांधी पर भी सटीक लगा और सारे सपने तिनके
तिनके होकर बिखर गये.

UPA सरकार के ऊपर भी यह शेर तोप से निकले गोले जैसा है .जोड़ तोड़ की गणित को
समझने में जब अर्थशास्त्री की हवा निकल गयी तो बोल पड़े -सावधान ! हाथ को थामकर
नहीं चले तो सब के सब फिसलोगे ,हड्डियाँ भी टूट जायेगी .

बजट अभी आना बाकी है ,तीन सांधते हैं तो तेरह टूटते हैं .पुरे साल इसी माथापच्ची में 'दा'
ऐसे उलझे कि बजट के लिए समय ही नहीं मिल पाया , 'दा' ने जिस भयानक सपने को देखा
है अगर सच हो गया तो रास्ता जटिल ही है .

2 G के भंवर में फंसे गृह से गिरह! मंत्री जी , यह शेर तो उन पर भी निशाना सान्धता है .मगर
स्वामी की करुणा के आसार दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहे .

बाटला कांड पर आंसू बहाकर वोट झपटने कि फिराक में ओंधे मुंह गिरे नेताजी को भी यह
शेर दिन में तारे दिखा गया .सब कुछ स्वाहा ,सफाचट .सच में मंजिल अभी दूर और रास्ता जटिल .

शेर कि इस पंक्ति ने वकील साब को पील पील बना दिया और पिलपिला अंडा कि कीमत लगाना
भी सरल नहीं जटिल है .

बाबाजी भी इस शेर के लपेटे में आ गये थे ,लीला दिखाने चले थे मगर सांस ही रुक गया ,अटक गया
लगा बाबा लटक जायेंगे और राजनीती को प्रणाम बोल देंगे .

लोकपाल बिल पर भी यह शेर खरा उतर रहा है ,अन्ना का बेमिशाल अनसन भी राजनीती कि बिसात
पर सन्न रह गया .

बेचारे सिंह साब !जनाब ,बराबर टकरा गये इस शेर से .मगर इस शेर कि ताकत के आगे सिंह साब
बौने साबित हुये,पूरी अर्थव्यवस्था कि धुरी ही खिसक गयी ,सारा ज्ञान पुरे रास्ते को जटिल बना
चूका है ,कोई भी आंकड़ा सच नहीं हो रहा है

बेटे को साइकिल पर बैठा कर अब निकले नेताजी राजधानी कि ओर.नजर गाढ़ कर ,टकटकी
लगाकर बैठे हैं कि कब सिंघ का माथा झुके और ताज सिर से निचे टपके मगर हाय !रास्ता
जटिल है,ताज माथे से इस कदर चिपका है कि डगमगाता है पर गिर रहा नहीं .

मगर इस शेर कि खास बात यह है कि सब कुछ जटिल होने के बाद भी इसमें ममता है ,कोमलता
है ,बस समय पर प्रसाद चढ़ना चाहिए .प्रसाद मिला तो सब कुशल ,देर हुयी तो मामला जटिल !          
  
      

मंगलवार, 13 मार्च 2012

125 करोड़ की आबादी और करदाता 2 फीसदी ही क्यों ?

125 करोड़ की आबादी और करदाता 2 फीसदी ही क्यों ?


करदाता कम होने के कारण:-----  


कर के स्लेब कम आय पर शुरू हो जाते हैं.
कर के स्लेब पर कर की कटौती का प्रतिशत बहुत ज्यादा है .
कर भरने की प्रक्रिया जटिल है.
कर भरने में भूल रह जाने पर भारी दंड का विधान है  .
अलग-अलग धाराओं के तहत कर में मिलने वाली छुट से आम जनता अनजान है.


क्या यह संभव है :------
अलग-अलग धाराओ के तहत मिलने वाली छुट को समाप्त करके पांच लाख तक की आय 
कर मुक्त हो .
पांच से सात लाख की आय पर २% आय कर हो .
सात से दस लाख की आय पर ५% आय कर हो .
दस से पंद्रह लाख की आय पर १०% आय कर हो .
पन्द्रह लाख से ऊपर की आय पर १५% आय कर हो.

एक करोड़ के टर्नओवर तक लेखा बहियों रख पाने में असमर्थ  व्यवसायी को कुल बिक्री
की राशी पर १०% आय गणना कर टेक्स चुकाने की सहूलियत हो .

यदि ऐसा संभव होता है तो करदाता बढ़ जायेंगे .काला धन अंकुश में आ जाएगा .कम पढ़ा 
लिखा व्यक्ति स्वयं अपने टेक्स की रकम की गणना कर टेक्स भर पायेगा .सरकार की कर आय 
में वृद्धि हो जायेगी . 


शनिवार, 10 मार्च 2012

अनूठा लोकतंत्र


अनूठा लोकतंत्र 

अपने आप में अनूठा है,
विश्व का बड़ा लोकतंत्र .


यहाँ सियासत चलती है, 
परिवारवाद की बैसाखियों से .
विरासत के युवराज को ,
होता है सत्ता का हस्तांतरण .


यहाँ सियासत चलती है ,
जातिवाद के कंधो पर. 
वोट बैंक की वेतरनी से , 
होता है सत्ताधीश का आरोहण .


यहाँ सियासत चलती है 
धर्म सम्प्रदाय के तौल पर 
हरे,नीले,लाल, केसरी झंडे से 
होता है सत्ता का पदार्पण 


यहाँ सियासत चलती है, 
बाहुबल के जोर पर.
लगे हो लाख दाग चरित्र पर, 
होता है सत्ताधीश का अलंकरण .


यहाँ सियासत चलती है ,
नफे घाटे के व्यापार पर .
लेते हैं कसमें करते  हैं वादे,
होता है फिर कथनी का चीर हरण .    

बुधवार, 7 मार्च 2012

साम्प्रदायिकता

साम्प्रदायिकता 

लोकतंत्र के आँगन में-
फलती फूलती है साम्प्रदायिकता.
कोई बहुसंख्यक में साम्प्रदायिकता देखता है,
कोई अल्पसंख्यक में  साम्प्रदायिकता देखता है,
मगर सत्य यही है कि-
हर बार जीतती है साम्प्रदायिकता .
कोई बाटला काण्ड पर आंसू बहाता है,
कोई भिंडरावाले पर फूल चढ़ाता है,
कोई मालेगांव बम्ब कांड पर उकसाता है,
लक्ष्य इतना ही कि भड़कती रहे साम्प्रदायिकता.
कोई आरक्षण को धर्म  से जोड़ता है,
कोई राम को राजनीती से जोड़ता है,
कोई मोलवी से फतवे करवाता है,
कोई जाती को राजनीती में ढकेलता है,
सपना इतना ही,
कि,
सुलगती रहे साम्प्रदायिकता.
लोकतंत्र के आँगन में,
हम-
एक दूजे को सांप्रदायिक कहते हैं,
हिन्दू-मुस्लिम- सिक्ख- इसाई ,
सब आपस में झगड़ते हैं .
एक दूजे पर आरोप -प्रत्यारोप लगाते हैं,
कि -
सिर्फ तुम सांप्रदायिक हो .
मगर -
कहाँ फुरसत है किसी को,
अपने गिरेबान में झाँकने की,
खुद को टटोलने की,
आत्म अवलोकन करने की,
कि,
क्या मैं खुद साम्प्रदायिक हूँ?
हम सांप्रदायिक सियासत करते हैं,
क्योंकि-
यह आसान रास्ता है सत्ता के गलियारे का,
यह आसान रास्ता है जनता को भरमाने का,
यह आसान रास्ता है सत्ता सुख भोगने का ,
यही कारण है कि-
हम साम्प्रदायिकता को मरने नहीं देते,
येन  केन  प्रकारेण,
साम्प्रदायिकता को जिन्दा रखते हैं,
ताकि
सियासत कि दूकान चमकती  रहे .
मानवता रोती रहे सियासत चलती रहे .         

मंगलवार, 6 मार्च 2012

चुनावी गणित और अन्ना आन्दोलन का समीकरण !

चुनावी गणित और अन्ना आन्दोलन का समीकरण !


उत्तरप्रदेश का ताज किसके सिर पर ?


१.समाजवादी पार्टी 
२.बहुजन समाजवादी पार्टी 
३.भारतीय जनतापार्टी 
४.कांग्रेस पार्टी 


सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर भी समाजवादी पार्टी सत्ता से दूर रह जायेगी यदि 
अन्ना फेक्टर ने काम किया हो तो .


अन्ना फेक्टर चलने पर कांग्रेस भी फटेहाल रह जाने वाली है .


अन्ना फेक्टर से प्रभावित युवा बहुजन समाज पार्टी को भी पटकनी दे सकते हैं 


अन्ना फेक्टर का फायदा भारतीय जनता पार्टी को ही मिलने वाला है ,यह सत्य 
सिद्ध हो सकता है 


भारतीय जनता पार्टी ९५-१०२ और बहुजन समाज पार्टी ११०-११५ सीट जीत सकती है 
और यही दोनों सत्ता संभाल सकते हैं ,अगर ऐसा नतीजा आया तो भारतीय जनता पार्टी 
को बड़ा फायदा हो सकता है क्योंकि सत्ता की चाबी उसी के पास रहेगी .


देखिये कल क्या होता है     

रविवार, 4 मार्च 2012

कटाक्ष



कटाक्ष 

अमरीकी संसद में गुजरात दंगों पर प्रस्ताव.

........ नौ सौ चूहे खाय बिलाई अब चली हज करने को !!

2जी: फैसला न्यायिक दायरे के बाहर: सरकार

......वर्ना पूरी बारात ही फँस जायेगी 2 जी के प्रवाह में !

क्या महिलाओं के लिए सेक्सी शब्द आपत्तिजनक है?


.......महिला आयोग की अध्यक्षा के विचार से पुरुष खुलकर सुन्दर स्त्री को "हेल्लो - सेक्सी"
      कहकर उस महिला को सम्मान दे सकते हैं !

  चुनाव आयोग ने आचार संहिता के उल्लंघन मामले में केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश
 जायसवाल को क्लीन चिट दे दी है.

..... रीन सुपर की सफेदी .दाग धब्बा पल भर में गायब !

खुर्शीद ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अपने बयान पर खेद जताया.

..........त्वमेव माता पिता त्वमेव .........!!

जीडीपी में गिरावट: निजी आय और रोज़गार पर पड़ेगा असर

..........मनमोहक आंकड़े पूर्ण विराम के बाद ,तब तक पुकारो त्राहिमाम -त्राहिमाम !!

भारत में प्रति व्यक्ति आय सरकारी आंकड़ों के अनुसार साल 2010-11 में 15.6 फ़ीसदी
की उछाल के साथ 53,331/- 

.....१००बकरी +५०भेड़ +३०खच्चर +१० हाथी का वजन =१९० घोड़े का वजन 
.......यानि विकास का मायाजाल !!

भारतीय क्रिकेट टीम घर में खेलेगी होली

......काला रंग महंगा हो सकता है !

'सैटेनिक वर्सेज़' के अंश पढ़ने पर विवाद

......परदे में रहने दो ...!