गुरुवार, 15 मार्च 2012

यह शेर है कि बवंडर !

यह शेर है कि बवंडर !


मंज़िल अभी दूर और रास्ता जटिल है 

इस शेर की पहली पंक्ति ने ऐसा कहर ढाया कि अगली पंक्ति पढ़ना भी मुश्किल हो गया  

रेलमंत्री त्रिवेदी ने रेल के लिए कहा मगर उन पर ही सही फिट हो गया यह शेर .रेल किराया
बढ़ाना ममता को नागवार गुजरा और कुर्सी से हाथ धोने की नौबत आ गयी .

UP के साइकिल भूकंप से यह शेर राहुल गांधी पर भी सटीक लगा और सारे सपने तिनके
तिनके होकर बिखर गये.

UPA सरकार के ऊपर भी यह शेर तोप से निकले गोले जैसा है .जोड़ तोड़ की गणित को
समझने में जब अर्थशास्त्री की हवा निकल गयी तो बोल पड़े -सावधान ! हाथ को थामकर
नहीं चले तो सब के सब फिसलोगे ,हड्डियाँ भी टूट जायेगी .

बजट अभी आना बाकी है ,तीन सांधते हैं तो तेरह टूटते हैं .पुरे साल इसी माथापच्ची में 'दा'
ऐसे उलझे कि बजट के लिए समय ही नहीं मिल पाया , 'दा' ने जिस भयानक सपने को देखा
है अगर सच हो गया तो रास्ता जटिल ही है .

2 G के भंवर में फंसे गृह से गिरह! मंत्री जी , यह शेर तो उन पर भी निशाना सान्धता है .मगर
स्वामी की करुणा के आसार दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहे .

बाटला कांड पर आंसू बहाकर वोट झपटने कि फिराक में ओंधे मुंह गिरे नेताजी को भी यह
शेर दिन में तारे दिखा गया .सब कुछ स्वाहा ,सफाचट .सच में मंजिल अभी दूर और रास्ता जटिल .

शेर कि इस पंक्ति ने वकील साब को पील पील बना दिया और पिलपिला अंडा कि कीमत लगाना
भी सरल नहीं जटिल है .

बाबाजी भी इस शेर के लपेटे में आ गये थे ,लीला दिखाने चले थे मगर सांस ही रुक गया ,अटक गया
लगा बाबा लटक जायेंगे और राजनीती को प्रणाम बोल देंगे .

लोकपाल बिल पर भी यह शेर खरा उतर रहा है ,अन्ना का बेमिशाल अनसन भी राजनीती कि बिसात
पर सन्न रह गया .

बेचारे सिंह साब !जनाब ,बराबर टकरा गये इस शेर से .मगर इस शेर कि ताकत के आगे सिंह साब
बौने साबित हुये,पूरी अर्थव्यवस्था कि धुरी ही खिसक गयी ,सारा ज्ञान पुरे रास्ते को जटिल बना
चूका है ,कोई भी आंकड़ा सच नहीं हो रहा है

बेटे को साइकिल पर बैठा कर अब निकले नेताजी राजधानी कि ओर.नजर गाढ़ कर ,टकटकी
लगाकर बैठे हैं कि कब सिंघ का माथा झुके और ताज सिर से निचे टपके मगर हाय !रास्ता
जटिल है,ताज माथे से इस कदर चिपका है कि डगमगाता है पर गिर रहा नहीं .

मगर इस शेर कि खास बात यह है कि सब कुछ जटिल होने के बाद भी इसमें ममता है ,कोमलता
है ,बस समय पर प्रसाद चढ़ना चाहिए .प्रसाद मिला तो सब कुशल ,देर हुयी तो मामला जटिल !          
  
      

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