गुरुवार, 22 मार्च 2012

अपनी डफली अपना राग

अपनी डफली अपना राग 


हमारे देश में गरीब मिटाया जा रहा है .योजना आयोग ने गरीबी रेखा में बदलाव 
करते हुए कहा है कि अब शहर में 28 रुपए 65 पैसे प्रतिदिन और गांवों में 22रुपये42पैसे
खर्च करने वाले को गरीब नहीं कहा जा सकता.योजना आयोग ने सोमवार को जो आंकड़ें 
जारी किए थे उसके अनुसार साल 2009-2010 के गरीबी आंकड़े कहते हैं कि पिछले पांच
साल के दौरान देश में गरीबी 37.2 फीसदी से घटकर 29.8 फीसदी पर आ गई है.  

भारत में प्रतिव्यक्ति आय २०१०-११ में ५४८३५/- के करीब हो गयी है और २०११-१२ में बढ़कर
६०९७३/-हो जायेगी . 

(Per capita income is calculated by evenly dividing the national income among the country's population.)
विश्व बैंक के अनुसार -----
 Indian official estimates of the extent of poverty have been subject to 
debate, with concerns being raised about the methodology for the 
determination of the poverty line.[139][140] As of 2005, according to 
World Bank statistics, 75.6% of the population lived on less than $2 
a day (PPP), while 27.5% of the population was  living below the new 
international poverty line of $1.25 (PPP) per day.[141][142][143]
However, data released in 2009 by the Government of India estimated 
that 37% of the population lived below the poverty line.[144] The इंडियन
economy continues to face the problem of an underground economy 
with a 2006 estimate by the Swiss Banking Association suggesting ठाट
India topped the worldwide list for black money with almost $1,456 billion
stashed in Swiss banks. This amounts to 13 times the country's total external debt.[181][182] 
प्रतिव्यक्ति कर्ज का भार --
India's external debt increased by $36.9 billion to $261.4 billion by end-March 2010. This works out to 18.9% of the nation's GDP.

The Reserve Bank of India says that India is Asia's fifth most indebted 
वित्त मंत्री के अनुसार २लाख रूपये सालाना कमाने वाला आदमी आयकर देने के घेरे में नहीं है 
और आयकर उससे ही नहीं लिया जाता जो गरीब है 
नए टैक्स स्लैब के बिंदु-

दो लाख रुपए सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं।
दो लाख रुपए से ज्यादा से पांच लाख तक टैक्स 10 प्रतिशत।
पांच लाख से ज्यादा सालाना आय से लेकर आठ लाख रुपए तक टैक्स 20प्रतिशत।
दस लाख से ज्यादा सालाना आय पर टैक्स 30 प्रतिशत। 

अब आप ही बताईये की योजना आयोग झूठा है या देश की सरकार 

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