शुक्रवार, 8 जून 2012

डीजल,पैट्रोल और राशन प्रणाली

डीजल,पैट्रोल और राशन प्रणाली

हमारे देश की अर्थ व्यवस्था डीजल तथा पैट्रोल की बढती दरों के कारण डगमगा जाती है .हमारे देश में
पेट्रोलियम पदार्थों की खोज पर अभी तक गंभीरता से किसी भी सरकार ने काम नहीं किया है .हमें
अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए विदेशो पर निर्भर रहना पड़ रहा है .दिन -प्रतिदिन खपत बढ़ती
जा रही है और आपूर्ति के लिए बहुमूल्य विदेशी धन के कोष को खर्च करना पड़ता है .सरकार इस सेवा
को धीरे -धीरे सब्सिडी मुक्त करना चाहती है और इस कारण डीजल तथा पेट्रोल महंगा होता जा रहा है .
सरकार पेट्रोलियम पदार्थो को सब्सिडी मुक्त कर दे मगर इन सभी पेट्रोलियम पदार्थो को राशन प्रणाली
के अन्तर्गत वितरण भी सुचारुरूप से करना शुरू करे ताकि आम गरीब भारतीय पर पेट्रोलियम पदार्थों
की बढती दरो का दुष्प्रभाव कम से कम पड़े .
   वर्तमान में डीजल तथा पेट्रोल खुल्ले बाजार में सबको समान भाव में उपलब्ध है ,अगर इनकी दरे
बढती है तो उच्च वर्ग पर इसका कुछ भी दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है .उच्च वर्ग बिना कोर कसर के इन
पदार्थो का भरपूर उपयोग करता है .उच्च वर्ग के पास क्रयशक्ति है मगर आम भारतीय की क्रयशक्ति
कम होती जा रही है ऐसे में सरकार जो वर्तमान में पेट्रोलियम पदार्थो पर सब्सिडी दे रही है उसका
फायदा आम भारतीय को नहीं मिल रहा है क्योंकि ना तो आम भारतीय के पास कारे हैं और ना ही
टू व्हिलर .इन पदार्थों की सब्सिडी का उपयोग धनी भारतीय ही कर रहा है जबकि बोझ समान रूप
से सब भारतीयों पर पड़ रहा है .
   अगर सरकार वास्तव में आम भारतीयों का हित चाहती है तो पैट्रोल और डीजल पर राशन प्रणाली
लागू कर देनी चाहिए .टू व्हिलर, ट्रेक्टर,ऑटो तथा टेक्सी को एक निश्चित मात्रा में सस्ती दर पर पैट्रोल
तथा डीजल मिले तथा  सरकारी परिवहन के साधनों को पूरी जरुरत का पेट्रोल -डीजल सस्ता उपलब्ध
हो बाकी सब साधनों को बाजार भाव से पेट्रोलियम पदार्थ उपलब्ध हो ,इससे आम भारतीयों पर बढती
दरो का कम प्रभाव पडेगा .जितना पेट्रोल डीजल इन लोगो को सस्ती दरो पर उपलब्ध कराया गया है
उसका भार भी मुक्त रूप से उपलब्ध पेट्रोलियम पदार्थो पर जोड़ दिया जाए ताकि बढ़ी दरो का प्रभाव
उसी वर्ग पर पड़े जो उसे उठाने में सक्षम है .       

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