बुधवार, 20 जून 2012

साम्प्रदायिकता को पहला पत्थर कोई धर्म निरपेक्ष ही मारे !

साम्प्रदायिकता को पहला पत्थर कोई धर्म निरपेक्ष ही मारे !

क्या कोई वास्तव में निरपेक्ष हो सका है ? क्या पृथ्वी पर जितने भी धर्म हैं उनमे से कोई निरपेक्ष है
क्या विश्व का कोई भी नेता निरपेक्ष था या है ?क्या कोई समाज,जाती ,वर्ण ,वर्ग या व्यक्ति धर्म
निरपेक्ष हो सकता है ? नहीं ...नहीं ...नहीं.........

          विश्व के सभी धर्म सांप्रदायिक ही होते हैं ,विश्व की सभी जातियां साम्प्रदायिक ही होती है
विश्व के कोई भी एक धर्म का नाम बता सकते हैं जो निरपेक्ष है सापेक्ष नहीं है .विश्व की एक भी जाती
ऐसी नहीं है जो साम्प्रदायिक नहीं है .

        मनुष्य समूह में रहता है और जो समूह में रहता है उसने अपने समूह के कुछ सिद्धांत बना रखे
हैं ,उन सिद्धांतो पर चलने वाले अपने सम्प्रदाय से प्यार करते हैं .सभी मनुष्य बुद्धिजीवी हैं ,सभी ने
अपने-अपने सिद्धांत समूह के अनुकूल बनाए हैं, हो सकता है एक  समूह विशेष को दुसरे के सिद्धांत 
परस्पर प्रतिकूल लगे मगर एक बात पक्की है की व्यक्ति जिस वर्ण ,जाती,धर्म या देश में 
रहता है तथा जिस समूह के सिद्धांतो को मान्यता देता है वह सांप्रदायिक होता ही है .

          मेरे देश के राजनैतिक दलों में संप्रदाय वाद कूट-कूट कर भरा है .कोई पूंजीपति का सम्प्रदाय
है ,कोई दल समाजवाद का सम्प्रदाय है ,कोई दल दलित सम्प्रदाय है,कोई दल हिन्दू सम्प्रदाय है
तो कोई दल मुस्लिम सम्प्रदाय . सभी दल मनुष्य ने बनाए है जो अपने अपने सम्प्रदाय को अच्छा 
मानते हैं मगर वास्तव में देखा जाए तो सब के सब साम्प्रदायिक ही हैं क्योंकि सब निश्चित सिद्धांतो 
से बंधे व्यक्तियों का समूह जो हैं .

          अब प्रश्न यह उठता है कि इस देश का प्रधान धर्म निरपेक्ष होना चाहिए ! इस देश में कोई भी
ऐसा नेता है जो धर्म निरपेक्ष है .यदि एक भी नेता अपने को निरपेक्ष सिद्ध कर सके तो फिर हमें
साम्प्रदायिकता को पत्थर मारना चाहिए .पहला पत्थर साम्प्रदायिकता को वो दल का नेता मारे जो
अपने को निरपेक्ष समझता है .क्या किसी भी सम्प्रदाय में रहने वाला कोई भी निरपेक्ष व्यक्ति है ?

       इस विश्व को किसी न किसी सम्प्रदाय में रहना है ,इसलिए साम्प्रदायिक होना बुरा नहीं है .यदि
बुरा है तो हर समूह में पाए जाने वाले निंदनीय आपराधिक कृत्य . आपराधिक कृत्य /दुर्गुण /पाप ही
बुरा है ,कोई भी सम्प्रदाय बुरा कैसे हो सकता है.  

कोई टिप्पणी नहीं: