सोमवार, 30 जुलाई 2012

अन्ना की हार के मायने

अन्ना की हार के मायने 


मर्यादा पुरषोत्तम-
यदि हार जाते रावण से ,
तो ,
उस हार के मायने क्या होते ?
लीला पुरषोत्तम-
यदि हार जाते कंस से ,
तो,
 उस हार के मायने क्या होते ?
हार जाते गोरों से टकराते यदि भारत के सपूत -
तो,
उस हार के मायने क्या होते ?
शायद ,
मर्यादाएं तार-तार हो जाती ,
छद्म और फरेब अमर हो जाते ,
अन्याय की सर्वत्र पूजा होती ,
हठी और कामी के जयकारे होते .
मगर -
प्रकृति को कब मंजूर होता है घिनोना खेल ,
समय ने कब किया आततायियों से मेल,
सत्य ने कब सहा झूठ और फरेब .
कर्म की गति विचित्र हो सकती है -
कुछ काल के लिए राहू सूर्य को ग्रस सकता है ,
अमावस की रात चाँद को छिपा सकती है ,
मगर -
क्या काल का डंडा कभी रुका है ?
पाप का घट कभी साबूत बचा है?
कोई असुर पृथ्वी पर जिन्दा बचा है?
क्या सत  कभी असत से हारा है?
यदि ,नहीं ,तो फिर 
अब -
सत्य की हार के मायने- क्या? 
अन्ना की हार के मायने - क्या?
है ये  प्रश्न निश्चय ही डरावने ,
अन्ना की हार ,असुरों की जीत है.
अन्ना की हार ,असत्य की जीत है .
अन्ना की हार ,अनीति की जीत है .
अन्ना की हार ,समय की हार है .
मगर -
समय कभी हारा नहीं है .
समय से कोई बचा नहीं है. 
समय कभी ठहरा नहीं है .
समय घूमता है निरंतर लट्ठ लिये,
इसीलिए ,
पापी के पाप  का घट निश्चय ही  फूटता है। 







शनिवार, 28 जुलाई 2012

पक्ष में भी ताली - विरोध में भी ताली

 पक्ष में भी ताली - विरोध में भी ताली 


यार ,भीड़ नहीं जुट रही है जंतर-मंतर पर .क्या अन्ना का जादू उतर गया या फिर भ्रष्टाचार
से  जनता ने तालमेल स्वीकार कर लिया .

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इस देश में और भी समस्याएं हैं फिर एक ही मुद्दे पर बार-बार अनशन क्यों ?लगता है इन्हें
और मुद्दे सूझ ही नहीं रहे हैं.

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दोस्त ,इस देश में राजनीती से अच्छे लोग दूर रहना चाहते हैं ,अब जो राजनीती में हैं उनसे
आम की आशा करना व्यर्थ नहीं है ?

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यार,अन्ना ये सब दखल अन्दाजी क्यों कर रहे हैं जब वे जानते हैं की इस देश में जनता नहीं
संसद ही सर्वोपरि है,जैसा बोया है वैसा ही पाना है .

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दोस्त,गप्पले और घोटाले ,अनाचार और दुराचार,सत्ता का मद और सत्ता से अत्याचार  ये सब
पहली बार तो नहीं हो रहा है ,युगों से चला आ रहा है फिर इस प्रश्न को बार-बार उठाना कितना
प्रासंगिक है?

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यार,मेने कितने सवाल किये मगर तुम एक का भी जबाब नहीं दे रहे हो ,क्यों

.........क्योंकि मैं एक जिन्दा लाश हूँ ,मुझे ना अपनी फिक्र है ना आने वाली पीढ़ियों की .मैं तो
बस ताली बजाना चाहता हूँ कभी अन्ना के पक्ष में तो कभी अन्ना के विरोध में .कभी भ्रष्टाचार
के विरोध में तो कभी भ्रष्ट लोगो के पक्ष में.  काम निकलना चाहिये,क्या अन्ना क्या नेता   .




गुरुवार, 26 जुलाई 2012

चोर से वार्ता

चोर से वार्ता 

रात में अनजाने व्यक्ति को अपने घर में देख हम हडबडा गये फिर धीरे धीरे  आदर
के साथ उससे कुटनीतिक वार्ता करने लगे .

क्या आप चोर हैं जी ?

क्या आप अपने साथी चोरो का नाम बताने की मेहरबानी करेंगे ?

क्या आप हमें यह बताएँगे की आपने चोरी का माल कहाँ छिपाया है?

क्या आपने आज तक की हुयी सभी चोरियों का विवरण प्रदान करेंगे ?

क्या आप जानते हैं कि जो धन आपने चुराया है वह हमारी मेहनत  की कमाई का है?

क्या आप चुराया हुआ धन हमें वापिस करेंगे ?

क्या आप सामने चल कर पुलिस की पकड़ में आयेंगे ?

क्या आप पुलिस को कह कर अपने लिए कड़ी सजा की माँग करेंगे?

क्या आप अपनी कड़ी से कड़ी सजा खुद तय करेंगे?

क्या हम आपके साथ इस बात पर मीटिंग रख सकते हैं कि आपको कैसे जेल
       में डाला जाए ?

क्या आपकी चोर बिरादरी को सबक सिखाने में आप हमारी मदद करेंगे?

क्या आप चोरी के आजमाये और संभावित तरीके हमें बताने की कृपा करेंगे?

आप चोरी करना बंद नहीं करेंगे तो हम अनशन करेंगे ?

आप चोरी करके जेल की हवा खाने की तैयारी खुद नहीं करेंगे तो हम अनशन करेंगे?

आप झूठे, धूर्त, चालाक, फरेबी, अनैतिक और धोखेबाज हैं इसलिए हम अनशन करेंगे?

चोर बोला - हम आपका सहयोग पूरी निष्ठा,तत्परता के साथ करने का वादा करते हैं
हम जब तक चोरी का दुसरा उपाय नहीं ढूढ़ लेते तब तक आप धीरज रखिये .हम अपने
शातिर चोर से परामर्श कर रहे हैं ,रास्ता निकाल रहे हैं ताकि चोरी को नया नाम दे सके
और नए नामकरण के पश्चात चोरी को अपराध घोषित कर देंगे ताकि आप भी संतुष्ट हो
सके और हम भी संतुष्ट होते रहे .आप नए नामकरण तक हमारा सहयोग करे और हमे चोरी
करने दे .   


शनिवार, 21 जुलाई 2012

सोते रहिये ................जागने का दिखावा कीजिये .......

सोते रहिये ................जागने का दिखावा कीजिये .......

हम पापियों के शमन की बात करते हैं ,मगर सोते रहते हैं
हम भ्रष्टाचार के विरुद्ध खड़े होने का साहस नहीं करते क्योंकि हम सोते हैं
हम भ्रष्टाचार  के विरुद्ध लड़ने वालो का साथ नहीं दे पाते क्योंकि हम सोते हैं
हम राक्षशी प्रवृति को फलने फूलने देते हैं क्योंकि हम सोते हैं
हम सच का साथ देने का साहस नहीं करते क्योंकि हम सोते हैं
हम अत्याचारियों की अधीनता स्वीकार कर लेते हैं क्योंकि हम सोते हैं
हम रावन नीति को स्वीकार कर जी लेना चाहते हैं क्योंकि हम सोते हैं
हम सोते हैं क्योंकि अत्याचारी दुसरे को सता रहा हैं ,हमको नहीं।
हम सोते हैं क्योंकि भ्रष्टाचार लोकिक रिवाज के रूप में स्वीकार कर चुके हैं
हम सोते हैं क्योंकि हम अन्याय को सहने में समर्थ हो चुके हैं
हम सोते हैं क्योंकि हम मान बैठे हैं की भ्रष्ट्र शासको के खिलाफ कहने का मतलब
परेशानी मौल लेना है
हम सोते हैं क्योंकि हम सत्य को स्थापित करने का माद्दा खो चुके हैं
हम सोते हैं क्योंकि हम  संघर्ष में खुद को अकेले मानने के भ्रम में जीते हैं
हम सोते हैं क्योंकि परिवर्तन की आशा हम में नहीं है
हम सोते हैं क्योंकि देश में फेल चुकी भ्रष्ट व्यवस्था के परोक्ष रूप से पोषक बनते जा रहे हैं
हम सोते हैं क्योंकि हम पद लोलुप सत्ता से तालमेल बैठाकर जीना सीख चुके हैं
हम सोते हैं क्योंकि हम जागे ही  ही कब थे ,जागने  का दिखावा करते हैं
  

रविवार, 15 जुलाई 2012

स्मरण शक्ति को कैसे प्रखर किया जाए भाग -2

स्मरण शक्ति को कैसे प्रखर किया जाए  भाग -2


जब हम पढ़ते हैं तब लगातार पढ़ना चाहते हैं लेकिन यह पढने का सही तरीका नहीं है क्योंकि
मस्तिष्क को हमने जो पढ़ा है उसे सुरक्षित (save )करने के लिए कुछ समय चाहिए जो लगातार
पढने के कारण नहीं मिल पाता है इसलिए पढ़ते समय 45 से 50मिनट के बाद 10 मिनट का खाली
समय (break ) दे ताकि हमने जो पढ़ा है उसे मस्तिष्क save कर सके

रंग और इन्द्रियाँ

हमारी आँख रंग को पकडती है .पेंटिग रंगों का मिश्रण है ,सही रंग का चुनाव और संयोजन याद शक्ति
को बहुत प्रभावित करता है .यदि एक ही रंग की पेंटिग होगी तो हमे बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं कर
पाती हम उसे शीघ्र भुला देते हैं लेकिन अच्छे रंगों के संयोजन से बनी पेंटिग हमें लम्बे समय तक
याद रहती है ,ठीक इसी तरह पढ़ते समय भी हमें विभिन्न रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए .
        पढ़ते समय हमें तीन तरह की स्याही इस्तेमाल करनी चाहिए ,मुख्य पॉइंट का रंग अलग होना
चाहिए .विवरण लिखने के लिए अलग स्याही का इस्तेमाल होना चाहिए और अंडर लाइनिंग के
लिए अलग रंग की स्याही का प्रयोग करे .स्याही के रंग बार-बार बदले नहीं ,ताकि मस्तिष्क आसानी
से काम कर सके .

माइंड मेप बनाना

जब हम किसी पुरे चेप्टर को पहली बार पढ़ते हैं तो हमें तेज गति से पढना चाहिए और जिन शब्दों
को नहीं समझ पा रहे हैं उन पर undar line करते रहना चाहिए .जब हम चेप्टर को पूरा पढ़ लेते हैं तब
उन शब्दों पर ध्यान दे जिनका आशय हम समझ नहीं पाए हैं .कठिन शब्दों को समझने के बाद हमें
उस चेप्टर के मुख्य अंशो पर विभिन्न स्याही या पेन्सिल से high light  करना चाहिए जैसे-सीधी रेखा
कोण ,घुमावदार रेखा ,star या sign
माइंड मेप के लिए हमें सबसे पहले चेप्टर का  सारांश तैयार करना होता है उसके बाद सारांश को
अलग-अलग भागो में बाँट देना है जैसे
रामचरित -
बालकाण्ड -राम का जन्म सम्बन्धी जानकारी

अयोध्याकाण्ड -राम के विवाह और राजतिलक तथा वनवास

अरण्यकाण्ड - राम का वनवास

किष्किन्धाकाण्ड -सुग्रीव से मित्रता

सुन्दरकाण्ड -सीता की खोज

लंकाकाण्ड-रावण वध

उत्तरकाण्ड -राम का अयोध्या में राजतिलक

इसी तरह हमे भी हर चेप्टर के अलग-अलग link को क्रमबद्ध रूप से जोड़ते जाना है ..जैसे पूरा राम
चरित सात खंडो में सम्पूर्ण हो जाता है उसी तरह हमारा चेप्टर भी 8-10 भाग में पूरा हो जाना चाहिए .
सारांश इस तरह तैयार किया जाना चाहिए जिसे आप सहज रूप से याद रख सके ,वह शब्द ,कविता
गीत किसी भी रूप में लिखा जा सकता है ,रेखा चित्र बनाकर चित्रित किया जा सकता है.

Note कैसे तेयार  करे?


पुस्तक की हर line को ध्यान से पढ़े।


पंक्ति से आवश्यक सूचना ढूंढे .


सुचना को नोट करे 


विषय से सम्बन्धित दूसरी पुस्तको का अध्ययन करे 


Final note तैयार करे 


नोट का मंद मेप बनाए 


विभिन्न चिन्हों का Note में उपयोग करे 


विभिन्न Colour तथा Ink का उपयोग करे 


Recall Map-- 


mind map  को बनाने के पश्चात पुरे पॉइंट को मन ही मन दोहराए 


हमारा मस्तिष्क इस mind map को अल्प काल के लिए save करता है इसलिए दुसरे दिन उस Mind 
map को पुन:देखे और पॉइंट को मन ही मन 5-10मिनट के लिए दोहराए .इस क्रिया से मस्तिष्क 
इस चेप्टर को 5-7दिन तक याद रख सकता है .सात दिन बाद उस mind map का पुन:अवलोकन करे 
अब मस्तिष्क इस चेप्टर को महीने भर तक याद रख सकता है .एक महीने बाद इस Mind map का 
पुन: अवलोकन करे अब आपका मस्तिष्क लम्बे समय तक इस चेप्टर को Save कर लेगा .
जब हमें इच्छित चेप्टर को Recall करना हो तब उसके mind map के मुख्य Heading को याद करे 
वह चेप्टर पूरा का पूरा याद आ जाएगा।
    

शनिवार, 14 जुलाई 2012

ढोल गँवार शुद्र पशु नारी .................

ढोल गँवार शुद्र पशु नारी .................

"ढोल गँवार शुद्र पशु नारी ,सकल ताड़ना के अधिकारी" रामचरित मानस की ये चौपाई सुन्दरकाण्ड 
से है जब श्री राम को असहाय वेश में देख समुद्र को अपने ऊपर घमंड हो गया था और श्रीराम की
विनय को ठुकरा कर रास्ता नहीं दे रहा था तब बाबा तुलसी प्रसंगवश इस सत्य को लिखते हैं,इस
चौपाई पर बहुत सी आलोचनाए हमने पढ़ी हैं लेकिन आज का आदमी शाब्दिक अर्थ लेकर तुलसी
को नारी विरोधी करार दे देते हैं जबकि तुलसी तो पुरे रामचरित में नारी का गुणगान करते हैं .नारी
को रामचरित के प्रथम मंगलाचरण में श्रद्धा और जगजननी के रूप में मानने वाले तुलसी क्या कोई
भूल कर बैठे थे जो नारी को ताड़ना का अधिकारी कह दिया .नहीं ये तुलसी की भूल नहीं है ताड़ना के
विभिन्न अर्थ हैं सिर्फ मारना या प्रताड़ित करना नहीं है .
        मेने यह विषय सामयिक घटना के फलस्वरूप उठाने की कोशिश की है .घटना गौहाटी के
व्यस्त इलाके की है .एक मदिरालय में जन्मदिन की पार्टी में कुछ लड़के और लडकियां गए थे
और वहां दारू पी थी ,पब में उनका आपस में झगड़ा हो गया और उन्हें वहां से निकाल दिया गया था
पब के बाहर कुछ ढोल गंवार या शुद्र लोगो ने उस लड़की को अपमानित किया और वस्त्र फाड़ दिए .
           तुलसी ने ऐसे  ही लोगो को शुद्र कहा है क्या ऐसे लोग पुरस्कृत होने चाहिए?
           विडियो में इस घटना को कुछ लोग चुपचाप देख रहे हैं मगर प्रतिकार नहीं कर रहे हैं ,तुलसी
ऐसे लोगो को पशु के रूप में देखते हैं ,पशु में बुद्धि नहीं होती इसलिए उनसे काम लेना हो तो हाथ में
डंडा होना चाहिए ताकि उसे डराया जा सके या पशु हिंसक हो जाए तो उसे प्रताड़ित किया जा सके .
जो लोग इस घटना को देख रहे थे क्या वे पशु तुल्य नहीं है? क्या हम उन्हें मानव कह सकते हैं ?
जो दुसरो की भावना का सम्मान न कर सके जो किसी निरीह की वेदना को न समझ सके वो
धिक्कार के ही योग्य है ,ऐसे लोग को सभ्य समाज प्रताड़ित करे या धिक्कारे तो ही अच्छा है .ढोल
का स्वर पीटे जाने पर ही निकलता है तब ही वह सार्थक है .जो आततायी इस घटना को अंजाम दे
रहे थे वो पीटे जाने के योग्य हैं या फिर पूजे जाने के ?
      चोथे पात्र के रूप में नारी है ,नारी में माँ का स्वरूप होता है ,नारी में भगिनी का स्वरूप होता है
नारी श्रद्धा का रूप है नारी देवी का रूप है नारी करुणा  का रूप है नारी शक्ति है, नारी सहधर्मिणी है
मगर नारी जब विकृत राह पर बढ़ने लग जाए ,नारी जब लज्जा रूपी भूषण को त्यागने लग जाए
नारी जब कामुक प्रदर्शन की वस्तु बन जाए ,नारी जब स्वार्थ में अंधी हो जाए ,नारी जब अच्छे -
बुरे की पहचान भूल जाए ,नारी जब बेशर्म बन मदिरा पान में मस्त हो जाए क्या तब उसे सही
दिशा का भान कराने के लिए उसे कठोर वचन कहकर तिरस्कृत की जानी चाहिए या नारी होने
के कारण वह जो भी विकृति समाज में फैलाना चाहती है उसे सहर्ष सहमती दे देनी चाहिए ?
क्या शराब सेवन के लिए मदिरालय में जाने वाली नारी देवी के रूप में स्थापित हो पायी है?
                गौहाटी की घटना  के विडियो में जो भी दिख रहे थे वे सभी पात्र इस सभ्य समाज के
लिए भयावह है .     

गुरुवार, 12 जुलाई 2012

आइसक्रीम और मिनरल वाटर

आइसक्रीम और मिनरल वाटर 


देश के गृह मंत्री हैं वो ,देश की तस्वीर जनता से ज्यादा जानते हैं .वित्त मंत्री भी रह चुके हैं वो
इसलिए देश की जनता की क्रय शक्ति के बारे में काफी कुछ पता है इनको . शहर में रहने
वाला भारतीय 32/- प्रतिदिन कमाकर धनवान होता हैऔर गाँव में रहने वाला 26/- कमाकर।

          एक रुपया कीमत गेंहूँ की बढ़ने पर हाय तोबा मचाने वाला भारतीय 15/-में एक लीटर
पानी और 20/-में एक कप आइसक्रीम पर आसानी से खर्च कर देता है ! वाह ,गृहमंत्री! क्या
खूब गणित बीठाया है खर्च की राशि का .शहरी भारतीय कमाता 32/- और पलक झपकते ही
खर्च कर देता है 35/-.ये तीन रूपये का गेप .......साला जेब काटकर पूरा करता होगा ,मगर
फिर रोटी ,कपडे और रहने की छत ?इनकी पूर्ति नहीं होने पर चिल्लाने का नाटक करता है ,
सरकार को कोसता है ,नेताओ पर अंगुली उठाता है ,हाय तोबा मचाता है !!!

           लेकिन ग्रामीण भारतीय 26/- प्रतिदिन कमाकर 15/-का एक लीटर पानी और 20/- की
आइसक्रीम डकारता है तो गेप -9/- का पड़  जाता है और इस गेप को पूरा नहीं कर पाता है तो
कुपोषण से मर जाता है या भूख से बिलबिला कर तडफता है .

गरीबी क्या होती है ये गृहमंत्री क्या जाने और क्या जाने योजना बनाने वाले अधिकारी ,उन्हें
तो शोचालय के लिए करोड़ो खर्चने को मिल जाते हैं ,वातानुकूलित कमरों में बैठकर देश की
जनता का भाग्य लिखने वाले , आलिशान होटलों में बैठकर नीति बनाने वालो के शरीर से
कब पसीना टपका है ?इन्हें क्या मालुम की एक रुपया कमाने के लिए आम भारतीय को 5से
7मिनट तक धुप में काम करना पड़ता है ,एक घंटे तक मनरेगा में काम करने पर 15/- मिलता
है और काम भी साल में 100 दिन ही मिलता है 265 दिन तो घर खाली हाथ बैठना है .

    क्या इस देश के नेता इस देश की जनता को कभी समझ पायेंगे ?कितने संवेदना रहित हो
गये हैं नेता ?गरीबो का मजाक उड़ाते हुए इन्हें शर्म नहीं है ,गरीब जनता के टेक्स के पैसे का
गप्पला करते हुए इन्हें शर्म  नहीं है, करोड़ो लोग जिस देश में कुपोषण के शिकार हो ,करोडो
लोगो को मिनरल वाटर तो क्या ,साफ मिट्ठा जल तक पिने को उपलब्ध नहीं है ,करोड़ो लोगो
के घर दोनों समय का अनाज नहीं है वो क्या जाने आइसक्रीम का स्वाद और मिनरल वाटर
का स्वाद .ये तो ठीक है कि मंत्री जी ने इतना ही कहा की हायतोबा मत मचाओ महँगाई के
नाम पर अगर ये यह कह देते कि 15/-की मिनरल वाटर और 20/-की आइस्क्रिम जब से
32/-ओर 26/- रूपये कमाने वाले धनवानों ने चट करनी शुरू कर दी है तब से महंगाई की
रफ्तार बढना तेज हो गयी है .  

शुक्रवार, 6 जुलाई 2012

विदेशी निवेशको के अनुकूल नीति निर्माण से भारत का विकास

विदेशी निवेशको के अनुकूल नीति निर्माण से भारत का विकास 


भारत की विकास दर कम हो रही है ,रुपया अपनी लाइन छोड़कर गिर रहा है ,देश में विदेशी भण्डार
घट रहा है,विदेशी निवेशक अपना पैसा निकाल रहे हैं ,ग्लोबल मंदी चल रही है .ऐसे में विकास की
जरुरत है इसलिए हमें विदेशी निवेशको के अनुकूल नीति निर्माण करना पडेगा!!!
       क्या खूब तर्क दिये जा रहे हैं .एक तरफ भारत को युवाओं का देश कहा जा रहा है जिनके नॉलेज
पावर की  विश्व में धाक है ,विश्व शक्तियां बौखला रही है .भारत का युवा वर्ग उर्जाशील है जिसमे अनंत
संभावनाए भरी पड़ी है .विश्व भारत की युवा शक्ति के आगे नतमस्तक है .आज विश्व अपने उद्धार के
लिये भारतीयों की ओर ताक रहा है और विडम्बना ही कही जायेगी  कि भारत अपने विकास के लिये
विदेशियों की ओर ताक रहा है.
       देश के रोजगार विदेशी लुटेरो के हाथ में सौपे जा रहे हैं,हर क्षेत्र में अपने विकास के लिये हमे
विदेशियों की आवश्यकता है ,विदेशी पूंजी की आवश्यकता है .क्या विदेशी निवेशक भारत में अपनी
पूंजी लुटाने के लिए आ रहे हैं?क्या विदेशी निवेशक हमे सहयोग करने आ रहे हैं?विदेशी निवेशक 
सिर्फ भारत में पैसा बनाने आ रहे हैं ताकि वे खुद और उनका देश समृद्ध हो सके .क्या ये बात हमारे
नीति नियन्ता नही समझते हैं? हमारे नीति नियन्ता को खुद अपने में ही विश्वास नहीं है और ना ही
देश की जनता पर .क्या हम 125 करोड़ लोग बुद्धिहीन हैं? देश की सरकार को भ्रम है कि उनकी 
उदारीकरण की नीति से ही देश आगे बढेगा .देश यदि विदेशियों के कारण ही आगे बढ़ सकता था तो
स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लेने वाले सभी भारतीयों को क्या समझा जाए जिन्होंने अपना सर्वस्व
मातृभूमि के लिए अर्पण कर दिया था .अगर विदेशी व्यापारी ही अच्छे थे तो उनको क्यों खदेड़ा गया ?
      देश का एक ऐसा भी प्रधानमंत्री था जिसने देश के दुश्मनों से लोहा लेने तथा अनाज की कमी के
चलते खुद दिन में एक समय ही भोजन लेने का निर्णय किया और उनके निर्णय को जान पूरा देश 
उनके साथ आ खड़ा हुआ और देश के हर नागरिक को भोजन मिले इसलिए सप्ताह में एक दिन व्रत 
रखने के निर्णय पर सारा देश पहुंच गया ,उस समय के प्रधान मंत्री भीख का कटोरा लेकर विश्व में 
नही निकले थे .देश की तकलीफ को देश में ही देशवासियों के साथ सुलझाया .
     अफसोस ...कि हमारे नीति नियन्ता अपनी ही प्रजा की ताकत को कम समझ कर देश को
कमजोर कर रहे हैं .पढ़े--लिखे युवा हैं मगर सरकार के पास कोई योजना नहीं की उनके ज्ञान का 
सदुपयोग कर सके ,युवा काम को तरस रहे हैं मगर बेरोजगार फिर रहे हैं .देश का किसान मेहनत  
करने के लिए तत्पर है मगर उसको अच्छे बीज ,खाद,पानी की उपलब्धता नहीं। देश का व्यापारी 
उद्यम को तैयार है मगर उसको उचित सुविधाए उपलब्ध नहीं .देश का मजदुर पसीना बहाने को तैयार
है मगर खाली हाथ बैठा है।
      इस देश में क्या नहीं है ,सब कुछ है यदि नहीं है तो दूरदर्शी सोच और देश प्रेम की भावना से
लबालब नेतृत्व .
      शेयर बाजार विदेशी निवेशको से चल रहा है,उद्योग में भी विदेशी निवेश ,सेवा के क्षेत्र में विदेशी
निवेश,अब तो गली-गली की खुदरा दुकाने भी विदेशी निवेश से चलेगी .यदि सब कुछ विदेशियों को 
ही करना है तो हम भारतीय क्या सपना देंखे ? अपने पुरुषार्थ के बल पर भाग्य के विधान को बदल
 देने की असीम क्षमता रखने वाले भारतीय विदेशी दुकानों के नौकर बन जिन्दगी गुजारेंगे .
     रुपया विश्व बाजार में गिरता है तो हमारी सरकार उसको उठाने के लिए विदेशी सहयोग मांगती
है।नयी टेक्नोलॉजी के लिये सरकार विदेशियों के मुंह ताकती है .उन्नत बीज और खाद के लिए
विदेशियों पर निर्भर रहना है, क्यों है आज मेरे महान हिन्दुस्थान की ये तस्वीर ?कौन बदलेगा इस
तस्वीर को ? ......क्या उदारीकरण के पक्षधर तथाकथित बुद्धिजीवी ? विदेशी निवेश पर आधारित 
वर्तमान आर्थिक नीति और उसके नियन्ता? पद लोलुप राजनेता ?भ्रष्ट और कामचोर बनता
जा रहा सरकारी कार्यकारी वर्ग ?
    इस देश का उद्धार कभी भी विदेशी निवेश से नहीं होगा ,इस देश की तक़दीर को बदलना है तो उसके
लिए देश के किसान का साथ लेना होगा,देश के मजदुर को  साथ लेना होगा,देश की युवा शक्ति का उपयोग
करना होगा ,देश के उद्योगपतियों के अनुकूल नीति  निर्माण करना होगा .......