मंगलवार, 18 सितंबर 2012

तालाब में मगरमच्छ छोड़ने के फायदे

तालाब में मगरमच्छ छोड़ने के फायदे 

इस देश के तालाब में विदेशी मगरमच्छ बसाने बहुत जरूरी हो गया है। विदेश  का मगरमच्छ
आपके तालाब में लाना इसलिए जरूरी है ताकि  तालाब  में सालो से  जन्मी  मछलियों  का
सफाया हो सके।

   तालाब में बहुत सी मछलियों के कारण पानी शुद्ध भी रह सकता है और छिछला भी हो जाता
है। अर्थशास्त्र  के नजरिये से तालाब का पानी छिछला हो रहा है इसलिए पानी का शुद्ध होना जरूरी
है और पानी की शुद्धता में मछलियाँ एक बड़ी बाधा है इसलिए हर बड़े  तालाब  में  कुछेक  मगर-
मच्छ का होना भी जरूरी है।

     मगरमच्छ के आने से मछलियों के जीवन पर अचानक संकट आ जाएगा ऐसा कुछ नही होगा।
कारण  कि जो भी मगरमच्छ आपके तालाबों में छोड़े जाने वाले हैं वे बहुत ही अनुभवी हैं।शिकार
कैसे करना है, वे उत्तम तरीके से जानते हैं। विदेश  के  मगरमच्छ  गणितज्ञ हैं   और  तालाब  की
मछलियों की गिनती करके उचित मात्रा में खायेंगे।ऐसा नहीं है कि ये  सारी  मछलियों  को डकार
जायेंगे।जो मछलियाँ इनके इशारे पर थिरकेंगी उन्हें दास बना लिया जाएगा और जीवन दान बख्श
 दिया जाएगा।जो उधम मचाने वाली और डटकर स्वाभिमान की रक्षा के लिए आक्रमण करेंगी ये
मगर सिर्फ उनका भोजन ही आरोगेंगे।

  नेताओं का तर्क है कि तालाब में मगर आने से तालाब की शोभा बढ़ जायेगी।ये मगर इतने विशाल-
काय होंगे कि जैसे ही नगर के तालाब में कूदेंगे वैसे ही देशी मछलियाँ पानी के बाहर गिरकर तड़फेंगी।
तड़फती मछलियों का नजारा आपके जीवन में 1947 के बाद पहली बार देखने को मिलेगा।

      विदेशी मगरमच्छो के कारण मगरमच्छो के आका जो देश के बाहर बैठे हैं वे सब बहुत खुश होंगे
और देश के सांडो की प्रसंशा करेंगे। विदेशी गीद्ध हमारी प्रसंशा करे ,यह हमारा सौभाग्य होगा।जब
हमारे सांड बाहर जायेंगे तब इनको चारा डाला जाएगा जो अक्षय होगा,इन सांडो की 14 पुश्ते पेट
भरकर खाने पर भी चारा खत्म नही होगा।

    मगरमच्छ तालाब में होंगे और वे देशी मछलियों का शिकार करेंगे और उससे जो लोमहर्षक दृश्य
उत्पन्न होगा उसे हमारे देशी मगरमच्छ लुफ्त उठाकर देखेंगे। विदेशी  मगरमच्छ  का  जो  भोजन
बचेगा उसका जायका देशी मगरमच्छ लेंगे। इस  तरह  से  देशी  मगरमच्छो  के  लिए  नया पर्यटन
स्थल का भी निर्माण होगा।

      मछलियों का जीवन भी कोई जीवन है ?हजारो नगरो में अरबो मछलियाँ जीवन भुगत रही है।
उनकी नियति में तो मरना ही लिखा है।देशी मछलियाँ देशी मगरमच्छो का निवाला बने या बगुलों
या गिद्धों का,इससे देशी मछली पर क्या फर्क पड़ता है।मछली का तो शिकार होना ही है,उसे बगुला
खाए,गिद्ध खाए या विदेशी मगरमच्छ ,क्या फर्क पड़ेगा देशी मछली को जो इतनी चिल्ला रही है।

     मगरमच्छो के आने से हमारी ताकत बढ़ेंगी।ये मगर जब मछलियों को डकारेंगे जो उनके पेट
से जो अवशिष्ट बाहर निकलेगा उसको हम देश के लोगो को बेचेंगे,यह आय हमे मुफ्त में मिलेगी।
मगर का अवशिष्ट खेतों में जाएगा उससे पैदावार बढ़ेंगी,उससे जो दाना पैदा होगा उसे तालाबो में
डालेंगे उससे छोटी मछलियाँ खुराक बनाएंगी।जब वो बड़ी हो जायेगी तो फिर से मगर का शिकार
बनेगी ,फिर लोमहर्षक दृश्य होगा फिर से देशी गिद्ध और देशी मगर की दावत होगी।      

                        

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