शुक्रवार, 7 सितंबर 2012

सेवा और आडम्बर

सेवा और आडम्बर 

सोमवार के दिन एक सेठ शिवालय में शिव का दुग्धाभिषेक करने के लिए जा रहे थे .पांच सेर का 
बर्तन दूध से लबालब था .उनके पीछे-पीछे एक गरीब किसान  लोटे में दूध लिए शिवालय की ओर 
बढ़ रहा था .शिवालय के बाहर एक गरीब भिखारिन ने सेठ को बड़े बर्तन में दूध ले जाते देख उनके 
पास गयी और बोली- "मेरा बच्चा कल से भूखा और बीमार है ,आप थोडा दूध दे दीजिये" 
.
सेठ ने भिखारिन और उसके अबोध बच्चे को देखकर दुतकारते हुआ बोला - चल हट !सुबह-सुबह 
ही पीछे पड़ जाते हैं ,भगवान् के अभिषेक का दूध मांगते हुए भी शर्म  नहीं आती।

भिखारिन दुत्कार खा कर भी कातर स्वर से बोली -सेठजी ,थोडा सा दूध दे दीजिये ,सच कहती हूँ 
बच्चा कल से भूखा है।

सेठ चीखता हुआ बोला -बच्चा भूखा है तो पैदा ही क्यों किया ,जहाँ देखो भिखमंगे पहले से तैयार 
मिलते हैं ,ठीक से शिव अर्चना भी नहीं करने देते ...... मुझे दे दो की रट लगाये रहते हैं। 
 
सेठ बडबडाता मंदिर में चला गया भिखारिन  मंदिर की ड्योढ़ी पर बैठ गयी .थोड़ी देर में गरीब 
किसान भी मंदिर के पास पहुँच गया ,वह भिखारिन एक आस के साथ खड़ी हुयी और किसान से 
कातर स्वर से बोली- "यह अबोध बच्चा कल से बीमार है,कुछ भी नहीं खाया है ,थोडा सा दूध बच्चे 
को दे दो ,भगवान तेरा भला करेगा ..."

उस किसान ने एक नजर से उस भिखारिन को और उसके बच्चे को देखा ,फिर अपने हाथ में पकड़े 
दूध के लोटे को देखा .कुछ देर वह सोचता रहा ,मंदिर की तरफ बढ़ते कदम रुक गए ,नन्ही जान का 
रुदन सुनकर उसने उस लोटे का दूध भिखारिन के कटोरे में डाल दिया .भिखारिन दुआ करती हुयी 
चली गयी .

किसान ने अपना खाली लोटा जल से भरा और शिव को अर्पित कर दिया ,शिव के पास बैठा हुआ
सेठ विभिन्न मंत्रो का उच्चारण करता हुआ दूध शिवलिंग पर अर्पण कर रहा था जो छोटी नाली से 
बहता हुआ मंदिर के बाहर नाले में गिर रहा था .

सार - धर्म ढ़कोसला या आडम्बर नही है,धर्म मानवता की सेवा से महकता है।     

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