बुधवार, 10 अक्तूबर 2012

जीने की कला

जीने की कला 

एक व्यक्ति बार-बार जीवन में आ रही विषम परिस्थितियों से तंग आकर निराश हो गया।
प्रतिकुल स्थितियों के कारण एक रात घर छोड़ कर जंगल की और चल दिया।जंगल में
एक संत का आश्रम था। उस व्यक्ति ने सोचा- जंगल में मारा-मारा फिरने की बजाय क्यों
नही संत का चेला बनकर वीतरागी बन शेष जीवन व्यतीत कर लिया जाये? ऐसा विचार
कर वह संत के आश्रम की ओर चल पड़ा।

          उस व्यक्ति ने संत को नमन किया और संत के समक्ष शेष जीवन वीतरागी बन कर
जीने की अपनी चाहना को भी रख दिया।

     संत ने पूछा- तुम वैराग्य क्यों धारण करना चाहते हो?

वह व्यक्ति बोला - इस संसार में कोई सार नजर नहीं आता,हर कोई दु:खी है,हर समय कोई
ना कोई संघर्ष और विषम परिस्थिति आती रहती है। मेरे जीवन में भी काफी मुश्किले आती
रही,मैं लड़ते-लड़ते तंग आ गया इस कारण संसार से मौह भी खत्म हो गया , अब शेष जीवन
प्रभु के नाम में व्यतीत करना चाहता हूँ।

  संत ने कहा - तुम आज की रात यहाँ आराम करो,कल मेरे साथ जल्दी उठ के जंगल में
चलना।

    दुसरे दिन भोर के समय वह व्यक्ति साधू के संग जंगल की ओर चल पड़ा। संत उसे
दलदल से भरे सरोवर के किनारे ले गया और बोला -इस सरोवर में उतर कर कुछ कमल के
फूल तोड़ लाओ ?

  वह व्यक्ति सरोवर की और कुछ कदम बढ़ा,उसके पैर कीचड़ में धँसने लगे।कदम दर कदम
वह गहरा धँसता जा रहा था कहीं और ज्यादा ना धंस जाए यह सोच कर वह रुक गया और
बाहर की और लौट आया।

संत ने पूछा- तुम वापिस क्यों लौट आये ?

उस व्यक्ति ने कहा - दलदल से डरकर।

 उसका उत्तर सुनकर संत बोले -तुम यहीं रुको मैं कमल पुष्प लेकर आता हूँ।

 संत ने उस सरोवर का निरिक्षण किया और एक लम्बा रास्ता तय कर कमल पुष्प ले आये
और उस व्यक्ति से कहा -तुम पुष्प लाने में असमर्थ क्यों रहे ?

उस व्यक्ति ने कहा -खुद को कदम दर कदम दलदल में फँसते देख कर।

तुम दलदल में क्यों फँसे ? संत ने पुन: प्रश्न किया।

वह व्यक्ति बोला - इसका कारण मैं नही जानता .........

संत ने कहा -तुमने सरोवर का पूरी तरह से निरिक्षण नहीं किया और नजदीक के रास्ते से
तुरंत पुष्प ले आने के चक्कर में दलदल में धँस गये।अब तुम वापिस अपने घर लौट जाओ
और आगे से जो भी काम करो उसके पहले पूरी तरह हर आने वाली परिस्थिति का अवलोकन
करो,रास्ता चाहे लम्बा हो उसे चुन लो मगर जल्दबाजी में दलदल से भरे छोटे रास्ते को मत
चुनो तब तुम्हें यह संसार सुन्दर लगेगा ।

सार- सफलता का कोई शोर्ट -कट नहीं होता है।हर कदम धीरे उठाओ मगर ऐसा एक भी
कदम मत उठाओ की चार कदम पीछे होना पड़े।
      
               

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