मंगलवार, 16 अक्तूबर 2012

जादूगर

जादूगर 

जादूगर अपना तामझाम समेट रहा था।
मेने  पूछा- कहाँ चल दिये सम्राट ?
वो बोले -आज से ये धंधा बंद!
मेने पूछा-   क्या हुआ ?
जादूगर बोला - जब से इस देश में बड़े-बड़े घोटाले हुए हैं तब से लोगो को
मेरी हाथ की सफाई में मजा भी नहीं आता।सब बोलते हैं असली में गायब
करने वाले तुर्मखां बैठे हैं तो नकली को क्यों देखे।

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जादूगर अपने बरसों पुराने जादू दिखा रहा था तभी दर्शक में से आवाज
आयी ....कुछ नया दिखाओ।
जादूगर बोला - सरकार,मैं सरदार नहीं हूँ,मामूली आदमी हूँ।नया देखना
है तो अखबार में  पढो, समाचार में सुनो। मैं तो पुराना ही दिखाऊंगा।   


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मेने जादूगर से पूछा - आपकी कला में और भ्रष्ट नेता की कला में अंतर
क्या है ?
जादूगर बोला -मेरी कला में जो नही दीखता उसका भी अस्तित्व बना
रहता है और भ्रष्ट नेता की कला में जो बचा है वह भी गायब हो जाता है।

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