रविवार, 21 अक्तूबर 2012

फूल और काँटे

फूल और काँटे 

गुलाब के पेड़ पर पहले काँटों ने जन्म लिया और उसके बाद फूल ने।काँटे उम्र में फूल से
बड़े थे मगर हर प्राणी उनसे दुरी बनाना पसंद करता था।यह बात काँटो को पसंद नहीं
आयी।

काँटों ने फूल से कहा - फूल ,हम और तुम एक ही माँ की सन्तान हैं।हम तुम्हारे से पहले
इस सँसार में आये हैं लेकिन कारण क्या है कि तुम अल्पायु होकर भी लोगों को पसंद
आते हो जबकि हम दीर्घायु होकर भी हीन समझे जाते हैं?

फूल ने जबाब दिया- ज्येष्ठ भ्राता , हम कितना लम्बा जीये यह बात महत्वहीन है।महत्व
इस बात का है कि हम जीये  किस तरह। हमारे गुण और कर्म ही मुख्य है।मैं अल्प जीवन
पाकर भी जग को सुगन्धित करता हूँ और मुस्कराता रहता हूँ और तुम दीर्घायु होकर भी
कभी जग में सुगंध नहीं बिखेर पाये और जीवन में मुस्करा नहीं पाये।

सार - चरित्रवान और गुणी बनो और बनाओ।        

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