शनिवार, 27 अक्तूबर 2012

मुहब्बत एक दरिया है .........

मुहब्बत एक दरिया है .........

मुहब्बत  एक  दरिया  है,  जो  डूब  गया   वो  दीवाना।
शमा   तो एक जरिया है , जो  मिट गया  वो परवाना।।

आँखों   के  सागर  में मोती , चुनता  गया  वो  दीवाना।
प्यासी  है  होटों  की  धरती  ,बरस   गया  वो  परवाना।।
कुछ कहना था कह न पाया, चुपचाप  सहे  वो  दीवाना।
शब्द, तो बात का जरिया है, जो  मौन  रहे  वो परवाना।।

उड़े  हवा में   केश  घटा  बन , उलझ  गया  वो  दीवाना।
साँसों  में  है  गीतों  की  धुन , थिरक गया  वो परवाना।।
अंगडाई  में  यौवन  का धन , खरच   सका  वो दीवाना।
इश्क,तो आग का दरिया है,जो जलता चला वो परवाना।।                      

कुंदन  सा बदन  चेहरा चन्दन , दहक  गया वो दीवाना।
मदहोश अदा चंचल चितवन , बहक  गया  वो परवाना ।।
दिल के कागज पे   इबादत ,  लिखता गया  वो दीवाना।
यार,तो प्यार की हथकड़ियाँ,जो बंधता गया वो परवाना।।


                                                                                                    (छवि गूगल से साभार )  


  

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