रविवार, 11 नवंबर 2012

मच्छर पुराण के महत्वपूर्ण अंश .............

मच्छर  पुराण के महत्वपूर्ण अंश .............

मच्छ पुराण  सनातन काल से है और मच्छर पुराण का उल्लेख ताजा है।विकास की 
परिभाषा में मच्छर कहीं फिट नहीं बैठता है मगर फिर भी नई ऊर्जा उत्पन्न कर देता 
है यह आज का सच है ।

मकड़ियाँ जाले बुनती है, उनमे खुद सुरक्षित रहती है और मच्छरों को फँसा कर पेट
भरती है मगर मच्छर मकड़ियों को डंक मारे और मकड़ी दर्द से बिलबिलाये ऐसा 
सनातन में नहीं परन्तु इस नये दौर का सच है। 

मच्छर के काटने पर खुजला कर आत्म संतुष्टि प्राप्त करना सनातन है मगर अब सिर्फ 
खुजलाने से काम नहीं बनता है।अब मच्छर के जहर से अधिक खुद के खून में जहर 
पैदा करना जरूरी है।

मच्छर गंदगी से फैलता है यह सनातन है मगर गंदगी में रचे बसे कीड़े फलफुल रहे हैं 
और मच्छर कभी कभी भिनभिनाते हैं यह आज का सच है।

मच्छर के काटने पर बैचेनी आती है यह वेद भी कहते हैं मगर किसी दुश्मन को मच्छर 
काटने पर आनन्द हिलौरे मारता है यह वर्तमान का आठंवा सुख है और मच्छर अपनों 
को डंक मारे तो महान दू:ख है ।

मच्छर रोग फैलाते हैं यह सनातन है मगर मच्छर रोगी को बार बार काटे और उसका 
परिणाम निरोगी शरीर का बनना हो यह भी कटु सत्य है।

मच्छर के संगीत से मन उचाट खा जाता है यह सार्वभोमिक है मगर जोंक का मन ही 
उचाट खाए और बाकी का मन खुश हो जाये यह अभी का दर्शन है।

मच्छर से बस्ती परेशान यह सर्वत्र जन का कहना है मगर मच्छर से सिर्फ सत्ता परेशान 
और बस्ती मौज में यह आधुनिक सिद्धांत है।

मच्छर मच्छर होता है यह पोराणिक सच है मगर मच्छर की भी बड़ी औकात होती है 
यह इस जमाने का सच है 

मच्छर के काटने पर आदमी की मौत यह होता आया है मगर मच्छर के काटने से कोबरा 
की मौत यह अभी का सच है  

   
  

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