शनिवार, 1 दिसंबर 2012

चुहिया और शेर

चुहिया और शेर 

जँगल का राजा शेर एक सरोवर के पास बैठा सुस्ता रहा था।शेर को वहाँ देख पानी
पीने के लिए आने वाले पशु दूर से ही वापिस निकल जाते,मगर शेर भी वहां जम
कर बैठ गया था।बेचारे पशु क्या करे ,इन्तजार के सिवा कोई उपाय नहीं बचा था।

   सरोवर से दूर काफी पशु इकट्टा हो गए। सांड ने हाथी से कहा- दादा ,आप तो
शेर से काफी बड़े हैं ,वजनदार डील है फिर शेर से क्यों डर रहे हैं ?

  हाथी बोला- बात डर या मोटे होने का नहीं है दरअसल इस सरोवर में पानी कम
है इसलिए सोचता हूँ कि यदि मैं अकेला सारा पानी पी गया तो आप सब प्यासे
रह जायेंगे इसलिए पानी पीने का विचार बदल चूका हूँ।

   तभी वहां पर गेंडा आ गया उसने भी शेर को देखा तो वहीँ रुक गया। उसे रुकते
देख हाथी ने कहा -गेंडा बेटे ,सरोवर पर पानी पीने आये हो तो यहाँ क्यों रुक गए?

  गेंडे ने कहा-दादा, मैं तो आपको देख कर यहाँ तक चला आया,मुझे प्यास नहीं है
बस आपसे भेंट नहीं हुयी थी इसलिए आपको देख ईधर चला आया।

     थोड़ी देर में बाघ भी पानी पीने आ गया ,मगर शेर को देख वह भी हाथी ,सांड
और गेंडे के पास रुक गया।सांड ने बाघ से कहा -आप बहुत प्यासे लग रहे हैं ,क्या
सरोवर पर जा रहे हैं?

   बाघ ने कहा-नहीं ,मैं तो गुफा की तरफ जा रहा था आप सब को देख इधर चला
आया।यहाँ हाथी दादा,गैंडा भैया को देख मिलने चला आया।

  थोड़ी देर में एक प्यासी चुहिया वहां आ गयी।हाथी,गेंडे,सांड,बाघ को देख वह भी
वहां रुक गयी।गेंडे ने कहा -चुहिया बहन ,क्या पानी पीने जा रही हो?

 चुहिया बोली -हाँ भैया, प्यास लगी है मगर आप सब यहाँ क्या कर रहे हैं ?

सांड बोला- बहन हम तो गप शप के लिए रुक गए हैं।तुम सरोवर तक जा रही हो
तो शेर आका को जगा देना।

  चुहिया सरोवर की तरफ चल पड़ी और सरोवर पर सुस्ता रहे शेर के पंजे पर
खुजाली करते बोली -आका उठो?

 शेर ने कहा-मैं यहाँ सुस्ता रहा हूँ ,शाम तक यहीं रुकुंगा,तुम जाओ।

चुहिया ने फिर खुजाली करते हुए कहा-आका उठो।

शेर ने कहा-तुम चली जाओ ,मुझे सुस्ताने दो।

चुहिया फिर शेर के पंजे पर चढ़ कर बोली-आका उठो।

शेर को आराम के वक्त चुहिया का खलल जँचा नहीं।उसने जोर से दहाड़ कर पंजा
घुमाया , पंजे पर बैठी चुहिया सरोवर के बीच में जा गिरी और मर गयी।

सार- बिना सोचे समझे किसी की बात पर अमल करना  मुसीबत को सामने से न्योता देना है।                        

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