मंगलवार, 11 दिसंबर 2012

क्या गुजरात की आलोचना करना फैशन बन गया है?

क्या गुजरात की आलोचना करना फैशन बन गया है?

चुनावी गहमागहमी में राष्ट्रीय नेता गुजरात के चक्कर लगा रहे हैं और गुजरात के विकास की
मनमाफिक व्याख्या प्रस्तुत कर आलोचना करते हैं। मोदी की आलोचना हो सकती है
यह तो राजनीती की बात है मगर गुजरात की गलत आलोचना क्यों?

         आलोचना यदि तथ्यात्मक हो और उसमे दम हो तो सुनने में ठीक लगती है मगर
गलत तथ्य से की गई आलोचना केवल देश और दुनिया में गलत भ्रम पैदा करती है और
गुजरात इस देश का मानवता विहीन प्रदेश हो ऐसा सबको जानबूझ कर महसूस करा के क्या
ये राज नेता देश का भला कर रहे हैं?

          चुनावी जंग में सब दल अपनी बात रखे और वास्तविकता से जनता को परिचय कराए
यह बात स्वस्थ है लेकिन जो सत्य से विहीन बात है उसे रखना राष्ट्रिय राजनेताओं को शोभा
नहीं देता है।

            गुजरात में कुपोषण देश के अन्य राज्यों से ज्यादा है और कुपोषण के लिए श्री लंका
के कुपोषित बच्चे का चित्र जनता के सामने रख दिया जाता है क्या यह दू:खद नहीं है गुजरात
के लिए।

           गुजरात में प्रति व्यक्ति कर्ज बढ़ गया है ? गुजरात ने कर्ज लिया लिया और धन का उपयोग
विकास के कामो में किया तो क्या क्या यह कर्ज राज्य की सुविधा और सम्पति को पतन के मार्ग
में ले जाने वाला है ,यदि नहीं तो फिर भ्रमित बातें क्यों?

          गुजरात में जनता असुरक्षित जीवन जी रही है ,यह आरोप मनमोहन साहब ने लगा दिया
आरोप लगाने से पहले यह नहीं सोचा कि महाराष्ट्र में फेस बुक पर कामेंट करने से शाहीन को
प्रताड़ित किसकी सरकार में होना पड़ा और वह लडकी अपना सुरक्षित भविष्य गुजरात में क्यों
देखती है? उत्तर सीधा है गुजरात एक दशक से शांति से जी रहा है।

         गुजरात का किसान बेहाल है यह आरोप लगाने से पहले राष्ट्रीय नेता यह नहीं देखते हैं की
पैदावार के हिसाब से गुजरात अग्रिम पंक्ति में खड़ा है ,उन्हें महाराष्ट्र,बिहार,उत्तरप्रदेश के किसानो
की हालत नहीं दिखती जो BPL हैं उन्हें तो गुजरात का समृद्ध किसान भी गरीब दीखता है और
उसे सिद्ध करने के लिए समाचार पत्रों के विज्ञापन में दुसरे प्रदेश के किसान की फोटो लगा कर
झूठ फैलाया जा रहा है।

         गुजरात शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है ,कैसा बेबुनियाद आरोप है। गुजरात के अंतर्राष्ट्रीय
कक्षा के विश्व विद्यालय उन्हें क्यों नहीं दिखाई दे रहे हैं ?गुजरात के बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में दौड़
लगा रहे हैं आने वाला समय गुजरात के ज्ञान और प्रतिभा का ही होगा।

        गुजरात का उद्योग आज मजदूरो की कमी से झुझ रहा है।manpower की कमी सब जगह है
अन्य  प्रदेशो से आने वाले लोग भी उस कमी को पूरा नही कर पा रहे हैं यह हकीकत है मगर आरोप
राष्ट्रीय नेता यह लगाते हैं की गुजरात में बेरोजगारी बढ़ रही है।गुजरात पुरुषार्थी लोगो का तीर्थ
स्थान है यहाँ काम करने वाला हर व्यक्ति समृद्ध है और जिसे काम नही करना है वह तो स्वर्ग में
भी बेरोजगारी फैला सकता है।

          गुजरात में बिजली और पानी की व्यवस्था नही है ऐसा आरोप कांग्रेस लगाती है लेकिन
आज इतने उद्योगों को 24 घंटे बिजली कौन दे रहा है ,सरदार सरोवर का पानी किसे मिल रहा है ?

       गुजरात में बड़े उद्योग ही पनप रहे हैं यह आरोप पाया बगेर है क्योंकि गुजरात में बहुत
बड़ी SSI  है छोटे और मध्यम उद्योग जाल की माफिक फैले हुए हैं।

         मोदी प्रसिद्धि घोटाला कर रहे हैं ,कोई भी घोटाला नहीं मिला तो राष्ट्रीय नेता जल भुन कर
मोदी की हर जगह हो रही काम की प्रशंसा को ही मुद्दा बना रहे हैं,क्या आज भारतीय इस नेता का
बखान कर रहा है तो मोदी से कुछ पाकर कर रहा है? क्या विदेशी लोग गुजरात के बिना भारत
अधुरा समझते हैं तो मोदी से कुछ लेकर समझते हैं? आत्म विश्वास वहीं पनपता है जो काम
करना जानता है सिर्फ बातों से कुछ नहीं होता है।

         राष्ट्रिय नेताओं ने गुजरात में आकर गुजरात की आलोचना की,उन्हें गुजरात की विशिष्टताएँ
क्यों नही दिखाई दे रही है?किसी भी राष्ट्रीय नेता ने आरोप जरुर लगाये परन्तु एक भी सकारात्मक
बात नहीं रखी। किसी भी दल ने गुजरात की प्रजा को यह विश्वास नहीं दिलाया की मोदी सरकार
ने जो विकास के झंडे गुजरात में गाड़े हैं उससे बड़े झंडे हमारी पार्टी गाड देगी क्योंकि गुजरात के
बेहतर भविष्य के लिए उनके  पास मोदी से बढिया सोच और योजना है और इमानदारी से अमल
करने का साहस है।

         गुजरात के कर्मठ लोग कर्म में विश्वास रखते हैं,गुजरात की राजनीती को समझना है तो
गुजराती मानसिकता का अध्ययन करना होगा।यह कर्मठ भूमि है ,विकास लोगो के खून में
समाया हुआ है,यहाँ काम ही पूजा है और इसी तथ्य को समझ मोदी शासन कर रहे हैं,अजेय
बने हुए हैं तथा बाकी दल सिर्फ केंकड़ा वृति में फंसे है।                   

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