सोमवार, 18 फ़रवरी 2013

आँखें .............

आँखें .............

डूबने के लिए समन्दर की है कहाँ जरुरत
इन आँखों में बस एक गोता ...लगा कर बताओ

शाम ढलते ही भागते क्यों मयखाने की तरफ
इन नशीली आँखों का ... एक जाम पी कर बताओ

यूँ चोराहे पर खड़े होकर ढूंढने की कहाँ जरुरत
इन निगाहों से निगाहें ...एक पल मिला कर बताओ

खूब गाते हो तन्हाइयों में रूमानियत के गीत
इन नयनों से कोई ... एक गजल चुरा कर बताओ

बड़ी दिलेरी से उतरते हो तूफान भरे समंदर में
इन आँखों के किनारों से ...मोती उठा कर दिखाओ



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