बुधवार, 20 फ़रवरी 2013

दिलचस्प मगर सच के करीब 

 ....आदमी की फितरत होती है कि वह दुसरे की बुराई जानने को उत्सुक रहता है
मगर खुद की बुराई सहन नहीं कर पाता।
....अच्छे कपडे और आला श्रृंगार के साथ सभाओं में चुप रहकर आदमी विद्वान सिद्ध
हो जाता है।
.... व्यक्ति गंदा बनना चाहता है मगर समय अभाव,स्थान या फिर समाज के भय से
गन्दा बन नहीं पाता।
....आदमी ख़ुशी के मौके पर भी मुस्कराता है और मज़बूरी या असफलता को छिपाने
के लिये भी।
....एक स्त्री दूसरी स्त्री की सुन्दरता को देख कर मन ही मन कुढती है मगर उसके पास
जाकर यह जरुर कह देती है कि- सच में,बहुत सुंदर लग रही हो।
....आदमी जानता है कि उसे जो भी सुख मिला है वह भगवान् की कृपा है परन्तु और
अधिक सुख पाने के लिए वह भगवान् को भी लालच देने की भरपूर कोशिश करता है।
....जब भी कोई किसी की प्रशंसा करता है उस समय प्रशंसा पाने वाले को वह सबसे
प्यारा लगता है।
....जब भी व्यक्ति झूठ बात को सच के साथ मिक्स करता है तब उसके हाथ मुंह की
तरफ उठते है ,नजरे दिशा बदल लेती है या आँखे बंद हो जाती है।
...जब कोई अपने को संतुष्ट बताने की कोशिश बार-बार करता है तो उसका मन
सामने वाले की प्रगति के कारण जल रहा होता है।
....जब आदमी किसी पार्टी में जाता है तो लिमिट से ज्यादा खाता है और दुसरे पर
फब्ती कसता है देखो वह पेटू है ,डटकर खा रहा है।
.... सफल होने पर खुद को आगे करता है और असफल होने पर परिस्थिति को।    
      

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