बुधवार, 6 मार्च 2013

अनुभव के पन्नों से ............

अनुभव के पन्नों से ............

जब कोई जानबूझ कर गलती करता है तो उसी की जबान से उस गलती को स्वीकार करने की
जिद्द नहीं करनी चाहिये

जब किसी ने झूठ बोल दिया है और आप समझ जाते हैं कि सामनेवाला व्यक्ति सच नहीं बोल
रहा है तो उसकी हर बात पर विश्वास मत करो उसे सत्य की कसौटी पर कस कर देखो

आपका दोस्त यदि चापलूस है और आपकी झूठी प्रशंसा करता है तो सावधान हो जाओ क्योंकि
आप भटकाव वाले मार्ग की ओर बढ़ सकते हैं

बहुत  सारे मेमनों की जगह कुछ शेरों के साथ रहना अच्छा क्योंकि संकट काल में बहुत से
मेमने भी रक्षा नहीं कर पाते हैं

सलाह उस व्यक्ति से लो जिसको आपसे रत्ती भर भी स्वार्थ नहीं हो

दान उतना ही करो कि खुद कंगाल ना हो,समाज सेवा उतनी ही करो कि आप अपने परिवार
को भी प्रर्याप्त समय दे सको ,वादा इतना छोटा करो कि आप उसे निभा सको,धन कमाने के
लिए उतना ही समय दो कि आपकी सेहत पर विपरीत प्रभाव ना पड़े

सर्व गुण सम्पन्न बनने की कोशिश मत करो पर धीरे-धीरे करके भी द्रढ़ता से एक-एक
अवगुण छोड़ते रहो

यदि सच्चा दोस्त मिलना कठिन लगे तो कच्चे लोगों को दोस्त समझने की भूल मत करो
अपना सच्चा साथी अच्छी पुस्तकों में खोजो ताकि सही मार्ग पर चल सको

आपके हित चिन्तक की बात ही ज्यादा कडवी होती है क्योंकि ओषधि कभी भी स्वादिष्ट
नहीं होती है लेकिन रोग को नष्ट करने की ताकत रखती है

अपने बच्चों को सर्वश्रेष्ठ देखने की आकांक्षा में मत जीओ बस उन्हें अच्छा बनाने का प्रयास
करो क्योंकि सर्वश्रेष्ठ भ्रम होता है जो समय पाकर टूट जाता है

झूठ बोलने की आवश्यकता लगे तो चतुराई से बोलो मगर झूठ से दुरी बनाए रखो

पैसा या चरित्र यदि दोनों में से एक को चुनना हो तो चरित्र को चुन लो क्योंकि चरित्र के बल
पर पैसा लौट आयेगा

दूसरों से या अपनों से सुख पाने की इच्छा के कारण ज्यादातर लोग दुखी हैं

अपने भविष्य की चिंता में इतने मत उलझो कि आपका अतीत दुख भरी दास्तान बन जाए

कूटनीति का प्रयोग सह्रदयी के साथ,राजनीति का प्रयोग बंधू के साथ,बल का प्रयोग मित्र के
साथ,दण्ड का प्रयोग बच्चों के साथ मत करो क्योंकि इससे प्राप्त परिणाम अनर्थकारी होते हैं

प्राप्त धन ,विद्या,उच्च कुल में जन्म के कारण अहंकार मत करो क्योंकि इन वस्तुओं से उपजा
अहंकार निर्धन,मुढ़ और शुद्र बना देगा

यदि हम नास्तिक बनना चाहते हैं तो आस्तिकता के मार्ग पर चल कर बनों ताकि नास्तिकता
का मूल भाव क्या होना चाहिए इसे समझ सके          

कोई टिप्पणी नहीं: