सोमवार, 15 अप्रैल 2013

शेर

         शेर


वो दिल बहलाने को फेंकते हैं समन्दर में कंकड़
नहीं सोचते हजारों लहरें यूँ ही खत्म हो जायेगी

उनके मुस्कराने का अंदाज कैसे बयाँ करे?
जानो इतना कि- कयामत इसी को कहते हैं

आज फिर से दिल में दर्द क्यों उठा है
क्या चाँद दूर बादलों में खिलखिलाया है ?


लोग समझते हैं निहायत बेकुसूर उनको
नहीं समझना चाहते कि- कुसूर किसका है ?


जब से देखे हैं उनके दिलकश अंदाज
अपने सीने से दिल को गायब पाते हैं




  

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