रविवार, 21 अप्रैल 2013

स्थान परिवर्तन

स्थान  परिवर्तन 

कल शाम की बात है ,मैं अपने रिश्तेदार के ग्रह प्रवेश के अवसर पर उपस्थित था।गाँव से आये
भैया ने मुझसे कुशल क्षेम पूछी। मेने कहा -मैं यहाँ प्रसन्न हूँ।मेने उनके बारे में पूछा -

वो बोले - आप शहरी लोगों जैसी जिन्दगी हमारी नहीं है,बस ठीक ठाक चल रहा है।

मेने उनसे पूछा -आप ऐसा क्यों कह रहे हैं ?

वो बोले -यह इसलिए कह रहा हूँ कि आप लोग गाँव छोड़ कर शहर मैं आ गए और हम वहीं
रह गये।आप ने तकलीफ झेलकर स्थान परिवर्तन कर लिया इसलिए उन्नति के अवसर भी
आप लोगों को हमारे बनस्पत ज्यादा मिले।

बात यहीं खत्म हो गयी और मैं भी स्व रूचि भोज लेकर घर आ गया।

सुबह जब मैं उठा तो घर की वाटिका में टहलने लगा।मेरा ध्यान अनायास एक गमले पर
चला गया जिस गमले में मेने 9 -10 महीने पहले कुछ बीज बिल्व के पेड़ के डाल दिए थे
उस गमले में उस समय पाँच पौधे लगे थे।उन पौधों में से मेने एक पौधा दुसरे गमले में लगा
दिया था और एक पौधा उस गमले में लगा दिया जिसमे पहले से गुलाब का पौधा लगा था।
मेने जिस गमले में अकेले बिल्व को लगाया था वह पौधा चार फुट लम्बा हो गया था और तना
भी काफी मोटा हो गया था।जिस गमले में गुलाब के साथ बिल्व के पौधे को लगाया था वह पौधा
ज्यादा नहीं पनप पाया केवल छह सात इंच का था और जिन पौधों का स्थान परिवर्तन नहीं
किया था उनमे से एक-एक करके दौ पौधे नष्ट हो गए और अंतिम पौधा नष्ट होने की कगार पर था।

              मुझे यह देख कर अचानक रात का वाकया याद आ गया कि गाँव से आये भैया ने बहुत
सटीक बात कही थी कि आप लोगों ने स्थान परिवर्तन कर लिया और उन्नती के अवसर पकड़ते
रहे।
        मेने उस बिल्व को देखा जो चार फुट लंबा था शायद मेरे से यह कह रहा था कि खुद को
उन्नती के पायदान पर देखना हो तो अकेले ही चल पड़ो और संघर्ष करो ,डटे रहो।

       गुलाब के साथ वाला पौधा यह कह रहा था कि अपने से बड़े पेड़ की छाया में मत पलो ,एक
बड़े पेड़ की छाया तले दूसरा बड़ा पेड़ विकसित नहीं हो सकता अगर खुद को बड़ा बनाना है तो
बड़े पेड़ की छाया से दूर जाकर संघर्ष करो।

      जिस गमले के बिल्व का स्थान परिवर्तन नहीं किया था वह मुझसे यह कह रहा था कि
यदि एक ही स्थान पर पड़े रहोगे और मजे की जिन्दगी जीना चाहोगे तो कुछ समय बाद पतन
की ओर चले जाओगे। लक्ष्य को हासिल करने के लिए गतिशील रहना होगा,अवसर की प्रतीक्षा
में समय खोना मुर्खता है।                        

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