बुधवार, 8 मई 2013

यही तो अजूबा है!!

यही तो अजूबा है! 

यह देश बिना भ्रष्टाचार  के अपाहिज हो जाता है,इसकी गति रुक जाती है।

इस देश का नागरिक शक के आधार पर गिरफ्तार हो जाता है और देश के नेता आधार 
होने पर भी शक के घेरे से बाहर रहते हैं। 

जनता समय पर कर का भुगतान नहीं करे तो उसके लिए दंड का प्रावधान है मगर 
शासक वर्ग उस कर के धन को चट कर ले तो उच्च पद पर आसीन होने के अवसर 
बढ़ जाते हैं। 

अन्न के दुरूपयोग में शासन अव्वल आता है पहले उसे इकट्टा करता है,खुल्ले में रखता 
है बारिस का इन्तजार करता है और फिर बारिस में सड़ने देता है तथा सड़ने के बाद 
उस अन्न का सदुपयोग करता है और शराब विक्रेता को बेच पीठ थपथपाता है। 

जब कोई हमें धौंस दिखता है तो हम विनम्रता के गुण को प्रदर्शित करते हैं जब कोई 
हमें गाली देता है तो हम व्यवहार कुशलता दिखाते हैं जब कोई हमारी मुर्खता का 
फायदा उठता है तो वार्ता की कुर्सी पर आ जाते हैं और जब कोई हम पर हमला करता है 
तो हम दूसरो से पट्टी करवा के तसल्ली दे देते हैं कि हमने उसके खिलाफ कुछ किया है। 

दुनियाँ जानती है कि हम शक्तिशाली कायर हैं।हम उनके पास जाते हैं तो वे आने से 
रोक देते हैं और वो जब आना चाहते हैं तब हम कमर तक झुक कर सलाम करते हैं 
वो हमें नंगा करते हैं और हम उन्हें दावत परोसते हैं। 

हम जनता को समझाते हैं कि पैसा पेड़ पर नहीं लगता ,काम करो ,निट्ठल्ले मत बैठो 
मगर अपने कबीले में पेसा उगलने वाले झाड़ लगाते हैं और पैसा बटोरते हैं। 

जिसने रिश्वत दी उसे मामला खुल जाने पर जेल की हवा खिलाते हैं और रिश्वत ली 
या नहीं ली उसका सबूत दुसरे के घर ढूंढ़वाते हैं। 

जब चोरी करते पकडे जाते हैं तो कबीले से गंगा स्नान करवाने का आह्वान करते हैं
और अपनी चोरी को छोटी तथा दुसरे कबीले की चोरी को बड़ा बताते हैं। 

हम मंदिर के अन्दर देवी को प्रणाम करते हैं बाहर खुल्ली सडक पर उसके साथ योन 
अपराध करते हैं। 

जब जब भी हम जन कल्याण की योजना बनाते हैं तब निरीह लोग समझ जाते हैं कि 
उसके आस पास क़यामत बरसने वाली है। 

हम बहुमत के आधार पर फैसले करते हैं और बहुमत के लिये जन भावना को भी ताक 
पर रख देते हैं। 

हम काम करने में विश्वास नहीं रखते हैं बल्कि कुतर्क से जीते हैं।        


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