सोमवार, 20 मई 2013

शिक्षा बाजार

शिक्षा बाजार

शिक्षक बने सौदागर, शिक्षा बाजार नजर आती है
छात्र खरीद रहे सौदा, शिक्षा मंडी- हाट नजर आती है

ज्ञान की दुकानों पर केवल द्रोण नजर आते हैं
बेबस होकर एकलव्य मन मसोस रह जाते हैं
उनकी जिज्ञासा के प्रश्न पैसों से तोले जाते हैं
ज्ञान के बाजारों  में गुरु बिकते नजर आते हैं

कोई विक्रेता विज्ञान बेचता कोई बेच रहा वाणिज्य
बिक रहा इतिहास कहीं पर कोई बेच रहा गणित
कोई नैतिक शास्त्र बेचता कोई केमेस्ट्री फिजिक्स
हर चोराहा अटा पड़ा है बिकती भाषाएँ भी मिक्स

अलग-अलग विज्ञापन देकर करते सर्वश्रेष्ठ साबित
लिख रहे हैं बड़ी शान से बिकते हो गये साल पच्चीस
एक दूजे की टांग खिंच कर खेल रहे हैं उन्नीस बीस
क्रेता बन कर छात्र खड़ा है पड़ रही बाजीगर की भीड़

ज्ञान बेच के खुश है शिक्षक मिल गया है मोल
सीख रहा कुछ या अनगढ़ है, तू ही तुझ को तौल
ज्ञान तिजारत बना है जब से हो गया डांवाडोल
गुरु शिष्य का पावन रिश्ता खा रहा है झोल 

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