मंगलवार, 18 जून 2013

क्या माहेश्वरी समाज अपने अन्दर झाँकने की कोशिश करेगा ?

क्या माहेश्वरी समाज अपने अन्दर झाँकने की कोशिश करेगा ?

महेश नवमी के पावन अवसर पर क्या माहेश्वरी समाज खुद के अंदर झाँकने की  कोशिश करेगा-

1. सामाजिक पदों पर सत्ता की भूख - सामाजिक संगठनों पर पद प्राप्ति की लालसा समाज को
          गतिशील रख पाएगी या विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी खुद के अहं को ही पोषते रहेंगे ?

2. समाज पर धनी लोग ही हावी -भारत भर के विभिन्न राज्यों में रहने वाले माहेश्वरी समुदाय
         पर क्या धनी लोग ही हावी रहेंगे या सबको साथ में लेकर बन्धुत्व भाव से भी चल पायेंगे ?

3. वोट का अधिकार -भारत भर में बहुत जगह पर समाज का सामान्य सदस्य बनने के लिए भी
    बहुत ऊँचा शुल्क रखा जाता है इसका दुष्प्रभाव यह हुआ कि बहु संख्यक गरीब या मध्यम
    वर्ग का बन्धु योग्य मगर आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण समाज की सेवा करने या
    समाज हित में अपने विचार रखने से वंचित रह जाता है,क्या यह व्यवस्था उचित है ?

4. व्यक्ति एक और मताधिकार एक से ज्यादा - समाज में बहुत सी सामजिक संस्थाओं में यह
     दूषण घुस गया है कि जो सामाजिक संस्था को ज्यादा आर्थिक सहयोग करेगा वह व्यक्ति
    एक से ज्यादा मत देने का अधिकारी बन जाता है क्या यह भारतीय संविधान के अनुकूल है ?

5.कहीं पर नियम कहीं पर मनमानापन -भारत के हर राज्य में बस रहे माहेश्वरी कहीं पर कुछ
    मर्यादा तय कर देते हैं और उस का पालन भी उस स्थान पर रह कर करते हैं मगर उसी स्थान
   का व्यक्ति दूसरी जगह जाकर उस सामजिक नियम को तार-तार कर देता है ,क्या समस्त
    भारत में समान सामाजिक नियम कभी बनाये जायेंगे ....?

6. दिखावा और प्रदर्शन-माहेश्वरी समाज का धनी तबका बेसुमार दिखावा और प्रदर्शन सामाजिक
    कार्यक्रमों में कर रहा है उसका दुष्प्रभाव निचे के वर्ग पर हो रहा है ,यह वर्ग झूठी रीति को
    निभाने के चक्कर में पीस रहा है ,क्या सामजिक कायदे और व्यवस्था सब जगह एक सी हो
   इस पर कोई कार्य हुआ है ?

7. पुत्र और पुत्री में समभाव -अपने को उन्नतिशील समझने वाला समाज पुत्र और पुत्री के लालन
    पालन से लेकर सम्पति के अधिकार तक अलग-अलग मत क्यों रखता है।पुत्री को पराया धन
    मानकर ही उसका पोषण क्यों ?उसे पुत्र के समकक्ष अधिकार क्यों नहीं (स्वेच्छा से) मिलते हैं ?

8. कन्या भ्रूण हत्या - यह भयंकर बिमारी इस समाज में भी घुस चुकी है और इस कारण से
    सामजिक संतुलन बिगड़ रहा है ,क्या माहेश्वरी समाज कन्या भ्रूण हत्या करने वाले पापी
    को समाज से बहिष्कृत कर नए समाज की रचना करेगा ?

9. तलाक की समस्या -नए भारत की यह समस्या इस समाज को भी रुग्ण कर रही है,क्या इस
    विकत परिस्थिति से निपटने के लिए हमारे पास कोई विचारधारा है ?

10.बहु और बेटी में भेद - हम अपनी बेटी को छुट दे देते हैं कि वह अपनी इच्छा मुताबिक़ काम
    कर सकती है मगर बहु को वो सब अधिकार सहजता से नहीं दे पाते ,दोनों के लिए अलग-
    अलग नजरिया क्यों ?

11. राष्ट्रिय स्तर पर पहचान का अभाव-हमारा समाज अन्य समाज की तरह खुद की पहचान
     राष्ट्रिय स्तर पर क्यों नहीं बना पा रहा है                    













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