रविवार, 30 जून 2013

नेता वचन

नेता वचन 

चुन लिया हमको नेता तो हश्र उसका पाईये
बच गये कयामत से कैसे उत्तर देते जाईये 

बच गया हिमालय ! इसे करिश्मा ही मानिए  
हिमगिरी के वस्त्र हरण में कसर रही ये जानिए  

खुदा से भी बड़ा अब तो हमको हुजुर मानिए  
पर्यटन के भ्रष्ट पाश में सबको तडफता पाइये

नेताओं के कुकर्मों से शिवशंकर गच्चा खा गए!
भस्मासुर नहीं भस्म हुआ भोले जी भी मान गए
  
महा मौत के खप्पर से भी लोग जिन्दा बच गए?
इसे हमारी नीतियों का नाकारापन ही जानिए 

जो बच गये आबाद सलामत उन्हें आगे डुबो देंगे
नही होता है विश्वास तो इतिहास पलटते जाइए  

राहत-बचाव के नाम का इश्तहार चिपकायेंगे 
तेरे आँसुओं की बाढ़ में तुम सबको ही डुबोयेंगे   

     

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