शनिवार, 20 जुलाई 2013

धर्मनिरपेक्षता से साक्षात्कार .............

धर्मनिरपेक्षता से साक्षात्कार .............

समय - आप कौन हैं ?
मैं धर्मनिरपेक्षता हूँ मगर मेरा जन्म कब हुआ मैं इस बारे में कुछ नहीं जानती।

समय - आपका परिवार ....?
मैं अपने माँ -बाप को भी नहीं पहचानती हूँ परिवार तो दूर की बात है।

समय -आप विश्वव्यापी हैं या सिर्फ भारत में ही बसती हैं ?
विश्व अपने अपने सम्प्रदाय में खुश है मैं ही एक अभागिन हूँ जो भारत में भटकती
फिरती हूँ।

समय -.........लेकिन भारत में तो आप सम्मान से जी रही हैं फिर भटकने से तात्पर्य ?
सम्मान तो दिखावा है ,छलावा है ,सपना है।मैं जिसकी चोखट पर जाती हूँ वो मेरा
शोषण करता है ,मुझसे हर समय कुछ पाने की लालसा रखता है।

समय - भारतीय राजनीति में आपका बड़ा रुतबा है,हर नेता आपके साथ खड़ा रहना
पसंद करता है  ?
यही तो सबसे बड़ी समस्या है,पेंसठ साल से मैं राजनेताओ के बगल में खड़ी हूँ मगर
मेरा सिर्फ इस्तेमाल हुआ है ,मुझे मासूम,निर्दोष और निश्चल देख उन्होंने लाल डोरे
डाले हैं कभी प्रेम नहीं किया।

समय - इतना सह कर भी आप उफ्फ तक नहीं करती उलटे जिन्होंने आपको छला
उनको ही गद्दी पर पहुँचा देती हैं ?
बार - बार विश्वास  किया और हर बार वादा पाया और उस वादे पर पुन: विश्वास
किया।हर बार सब कुछ लुटा कर विश्वास किया।

समय -जब आप हर बार धोखा खाती हैं तो उनके पास फिर क्यों चली जाती है ?
यही तो मज़बूरी है मेरी,ये साये की तरह पीछा करते हैं।मेने बहुत बार कोशिश की
इनसे छूटकर अपनी सहेली के घर पर रहने की,मगर ये अपने सुख की तृष्णा को
पूरा करने के लिए उसको और मुझको लड़ाते रहते हैं।

समय - आप मुझे अपनी सहेली का नाम बताये मैं खुद आपको सकुशल छोड़ दूंगा  ?
मेरे को झाँसा दे रहे हो या सही कह रहे हो ...............

समय - नाम बता दे फिर भरोसा करे।
उसका नाम है साम्प्रदायिकता .........!

समय भी कोई उत्तर नहीं दे रहा था शायद मौके की तलाश में था कि जैसे ही धर्म-
निरपेक्षता दूसरी ओर देखे तो निकल ले।                         

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